पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक ऊर्जा अस्थिरता के बीच भारत ने रूस से आने वाले प्रतिबंधित LNG (Liquefied Natural Gas) कार्गो को खरीदने से इनकार कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब दुनिया में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है और भारत लगातार वैकल्पिक ईंधन स्रोतों की तलाश कर रहा है।
भारत ने साफ कर दिया है कि वह केवल वही रूसी ईंधन खरीदेगा जो अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के दायरे से बाहर हो। इसी वजह से अमेरिकी प्रतिबंधों वाले एक रूसी LNG टैंकर को भारतीय बंदरगाह पर एंट्री नहीं मिली।
सिंगापुर के पास फंसा रूसी गैस जहाज
रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस के Portovaya LNG प्लांट से निकला “Kunpeng” नाम का LNG टैंकर गुजरात के दाहेज LNG टर्मिनल की ओर आ रहा था। इस जहाज में करीब 1,38,200 घन मीटर LNG मौजूद थी।
लेकिन चूंकि जहाज पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू हैं, इसलिए भारत ने इस कार्गो को खरीदने से इनकार कर दिया। अब यह जहाज सिंगापुर के पास बिना तय गंतव्य के समुद्र में खड़ा हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दस्तावेजों में इसे गैर-रूसी कार्गो दिखाने की कोशिश भी की गई थी, लेकिन ग्लोबल ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए इसकी पहचान सामने आ गई।
भारत ने क्यों लिया यह फैसला?
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत इस समय बेहद संतुलित रणनीति अपनाने की कोशिश कर रहा है। एक तरफ भारत को ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से तेल और गैस चाहिए, दूसरी तरफ अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का जोखिम भी बना हुआ है। इसी वजह से भारत केवल उन्हीं रूसी ऊर्जा उत्पादों की खरीद करना चाहता है जो कानूनी रूप से प्रतिबंधों से बाहर हों।
रूस के ऊर्जा मंत्री ने की भारत से बातचीत
रूस के उप ऊर्जा मंत्री Pavel Sorokin ने 30 अप्रैल को नई दिल्ली का दौरा किया था। उन्होंने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ ऊर्जा आपूर्ति, LNG व्यापार और दीर्घकालिक सहयोग को लेकर बातचीत की। सूत्रों के मुताबिक भारत ने रूस को साफ संदेश दिया है कि प्रतिबंधित LNG कार्गो स्वीकार नहीं किए जाएंगे। रिपोर्ट्स के अनुसार Pavel Sorokin जून में फिर भारत दौरे पर आ सकते हैं।
तेल खरीद जारी, लेकिन LNG में अलग स्थिति क्यों?
भारत अभी भी रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है, लेकिन LNG के मामले में स्थिति अलग है। इसके पीछे कई तकनीकी कारण हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक कच्चे तेल को समुद्र में दूसरे जहाजों में ट्रांसफर करके उसकी पहचान छिपाई जा सकती है, लेकिन LNG के साथ ऐसा करना बेहद मुश्किल होता है।
इसके अलावा LNG जहाजों को सैटेलाइट से आसानी से ट्रैक किया जा सकता है, इसलिए प्रतिबंधों से बचना लगभग असंभव हो जाता है।
भारत के लिए LNG कितना अहम?
भारत अपनी प्राकृतिक गैस जरूरतों का लगभग 50% हिस्सा आयात करता है। इन आयातों का करीब 60% हिस्सा Strait of Hormuz के रास्ते आता है। पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव की वजह से भारत ऊर्जा सुरक्षा को लेकर ज्यादा सतर्क हो गया है।
रूस क्यों बढ़ाना चाहता है भारत से गैस व्यापार?
रूस भारत के साथ LNG सप्लाई, फर्टिलाइजर एक्सपोर्ट और दीर्घकालिक ऊर्जा समझौते बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। रूस चाहता है कि भारत पोटाश, फास्फोरस, यूरिया और प्राकृतिक गैस के लिए लंबे समय तक रूसी सप्लाई पर निर्भर रहे।
क्या भारत पर बढ़ सकता है ऊर्जा दबाव?
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया संकट लंबा चलता है और वैश्विक LNG सप्लाई प्रभावित होती है तो भारत पर ऊर्जा लागत का दबाव बढ़ सकता है। इसका असर बिजली कीमतों, उर्वरक लागत और घरेलू गैस सप्लाई पर भी दिखाई दे सकता है।
भारत की रणनीति क्या है?
भारत फिलहाल रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना जारी रखना चाहता है, लेकिन प्रतिबंधों से जुड़े जोखिम से भी बचना चाहता है। इसी वजह से सरकार ऊर्जा स्रोतों में विविधता, LNG सप्लाई सुरक्षा और वैकल्पिक आयात मार्गों पर तेजी से काम कर रही है।
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