पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी 99 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो सरकार और तेल कंपनियों के लिए मौजूदा कीमतों को बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा।
क्यों बढ़ सकता है पेट्रोल-डीजल का दाम?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। देश करीब 88% कच्चा तेल और लगभग 60% LPG दूसरे देशों से खरीदता है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ते खतरे की वजह से कच्चे तेल की सप्लाई और कीमत दोनों प्रभावित हुई हैं। यही कारण है कि भारतीय तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकारी तेल कंपनियों को मौजूदा कीमतों पर रोजाना करीब ₹1600-1700 करोड़ का नुकसान हो रहा है।
कब और कितनी बढ़ सकती हैं कीमतें?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 15 मई के बाद पेट्रोल और डीजल ₹4-5 प्रति लीटर तक महंगे हो सकते हैं, जबकि घरेलू LPG सिलेंडर ₹40-50 तक महंगा हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार एकमुश्त बड़ी बढ़ोतरी करने की बजाय धीरे-धीरे कीमतें बढ़ा सकती है ताकि महंगाई का झटका कम लगे।
क्या एकदम से बढ़ेंगे दाम?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के डॉ. वीके विजयकुमार के मुताबिक राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी जरूरी हो सकती है, लेकिन इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करना ज्यादा बेहतर रहेगा।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार 2-4 रुपये की किश्तों में दाम बढ़ा सकती है ताकि आम लोगों पर अचानक बोझ न पड़े और महंगाई पर भी नियंत्रण बना रहे।
आम आदमी पर क्या होगा असर?
पेट्रोल, डीजल और LPG की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सिर्फ ईंधन तक सीमित नहीं रहता। अगर दाम बढ़ते हैं तो फल-सब्जियां और रोजमर्रा का सामान महंगा हो सकता है, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ सकती है, कैब, ऑटो और फ्लाइट किराए महंगे हो सकते हैं और मध्यम वर्ग के मासिक बजट पर सीधा असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक ईंधन महंगा होने से महंगाई दर पर भी दबाव बढ़ सकता है।
PM मोदी ने क्यों की ईंधन बचाने की अपील?
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ईंधन की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन अपनाने, कारपूलिंग करने और वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने की अपील की थी।
उन्होंने कहा था कि वैश्विक संकट के समय विदेशी मुद्रा बचाना और ऊर्जा खपत कम करना देशहित में जरूरी है।
तेल की कीमतें इतनी क्यों बढ़ीं?
विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका-ईरान तनाव, होर्मुज स्ट्रेट पर खतरा, सप्लाई चेन बाधाएं और युद्ध की आशंकाएं कच्चे तेल की कीमतों को लगातार ऊपर धकेल रही हैं। युद्ध शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल करीब 60 डॉलर प्रति बैरल था, लेकिन बाद में यह 120 डॉलर के करीब पहुंच गया। फिलहाल यह लंबे समय से 100 डॉलर के ऊपर बना हुआ है।
क्या आगे और बढ़ सकती है महंगाई?
अगर पश्चिम एशिया संकट लंबा चलता है, कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और रुपये पर दबाव बढ़ता है तो आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार फिलहाल महंगाई नियंत्रित रखने, विदेशी मुद्रा बचाने और सप्लाई चेन स्थिर रखने पर फोकस कर रही है।
क्या करना चाहिए आम लोगों को?
विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि लोग फिजूल ईंधन खर्च कम करें, सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल बढ़ाएं, गैर-जरूरी यात्रा टालें और घरेलू बजट को बेहतर तरीके से मैनेज करें। अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो इसका असर पूरे अर्थतंत्र पर दिखाई दे सकता है।
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