देश के सबसे बड़े औद्योगिक समूहों में शामिल टाटा ग्रुप में जल्द बड़ा नेतृत्व बदलाव देखने को मिल सकता है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा इस साल नवंबर में 70 वर्ष के होने जा रहे हैं और इसी के साथ समूह की कई कंपनियों के बोर्ड से उनके संभावित रिटायरमेंट को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
टाटा ग्रुप में लंबे समय से यह परंपरा रही है कि 65 वर्ष की उम्र में executive roles से और 70 वर्ष की उम्र में non-executive board positions से रिटायरमेंट लिया जाता है। यही वजह है कि अब बाजार और कॉर्पोरेट जगत की नजरें नोएल टाटा के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
टाटा ग्रुप में किन पदों पर हैं नोएल टाटा?
इस समय नोएल टाटा टाटा ग्रुप की कई बड़ी कंपनियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। वह Tata Investment Corporation, Tata International, Trent और Voltas में non-executive director और chairperson की भूमिका में हैं।
इसके अलावा Titan और Tata Steel में वह vice chairman और non-executive director के तौर पर जुड़े हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि consumer-facing businesses में नोएल टाटा की रणनीतिक भूमिका काफी अहम मानी जाती रही है और उन्होंने कई कंपनियों को expansion और profitability के नए स्तर तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
रतन टाटा के बाद बढ़ी जिम्मेदारी
अक्टूबर 2024 में रतन टाटा के निधन के बाद नोएल टाटा को Tata Trusts का chairman बनाया गया था। इसके बाद समूह में उनकी भूमिका और प्रभाव दोनों काफी बढ़ गए।
हालांकि Tata Trusts के chairman या trustee पद के लिए कोई तय retirement age नहीं है, लेकिन टाटा ग्रुप की listed companies में non-executive positions के लिए retirement norms लागू होते हैं।
ET की रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल संभावित successors को लेकर समूह के भीतर चर्चा चल रही है। हालांकि इस मुद्दे पर नोएल टाटा की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।
टाटा ग्रुप की रिटायरमेंट पॉलिसी क्यों है खास?
टाटा ग्रुप को भारत के सबसे disciplined corporate houses में गिना जाता है। समूह में senior executives और board members के लिए retirement rules काफी सख्त माने जाते हैं।
ग्रुप की policy के मुताबिक executive roles के लिए retirement age 65 वर्ष तय मानी जाती है, जबकि non-executive board positions के लिए 70 वर्ष की सीमा लागू होती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इसी policy की वजह से टाटा ग्रुप में leadership transition अपेक्षाकृत smooth रहता है और succession planning पहले से तैयार रखी जाती है। यही कारण है कि समूह में अचानक leadership vacuum जैसी स्थिति कम देखने को मिलती है।
Trent को नई ऊंचाई पर पहुंचाया
नोएल टाटा की सबसे बड़ी उपलब्धियों में Trent को तेजी से विस्तार देना माना जाता है। वह अप्रैल 2014 में FH Kavarana के रिटायरमेंट के बाद Trent के chairman बने थे। उनकी leadership में कंपनी का business पूरी तरह बदल गया और retail sector में Trent ने तेजी से अपनी मौजूदगी मजबूत की।
विशेषज्ञों के मुताबिक कंपनी का revenue करीब 9 गुना बढ़ा और profitability में भी जबरदस्त सुधार हुआ।
वित्त वर्ष 2014 में Trent को लगभग ₹19 करोड़ का घाटा हुआ था, जबकि पिछले वित्त वर्ष में कंपनी का net profit बढ़कर करीब ₹1,477 करोड़ पहुंच गया।
इसी दौरान Trent के शेयरों ने निवेशकों को करीब 3,500 फीसदी का शानदार return दिया। यही वजह है कि बाजार में नोएल टाटा को consumer retail business का मजबूत strategist माना जाता है।
Voltas में भी दिखा मजबूत प्रदर्शन
नोएल टाटा अगस्त 2017 में Voltas के chairman बने थे। उनके नेतृत्व में कंपनी ने revenue growth और profitability दोनों में मजबूती दिखाई।
वित्त वर्ष 2017 में Voltas का revenue करीब ₹6,404 करोड़ था, जो बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में लगभग ₹15,737 करोड़ तक पहुंच गया।
वहीं कंपनी का net profit ₹578 करोड़ से बढ़कर लगभग ₹841 करोड़ तक पहुंच गया। इस दौरान कंपनी के शेयरों में करीब 151 फीसदी की तेजी दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि Voltas ने consumer appliances और cooling solutions segment में अपनी पकड़ मजबूत की है और कंपनी ने लगातार market share बढ़ाने पर फोकस किया है।
Tata Investment Corp ने भी दिया मजबूत रिटर्न
नोएल टाटा की अगुवाई में Tata Investment Corporation ने भी लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है।
पिछले पांच वर्षों में कंपनी के profit में करीब 35 फीसदी annual growth देखने को मिली है। विशेषज्ञों के मुताबिक समूह की investment strategy को मजबूत बनाने और long-term value creation में भी उनकी अहम भूमिका रही है।
क्यों अहम माना जा रहा है यह बदलाव?
टाटा ग्रुप में यह संभावित leadership transition ऐसे समय हो रहा है जब समूह कई बड़े capital expenditure projects, manufacturing expansion और consumer businesses growth पर जोर दे रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में Tata Group electric vehicles, semiconductors, retail, aviation और infrastructure sectors में aggressive investment strategy पर काम कर सकता है।
ऐसे में leadership continuity और succession planning को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह निवेशकों के भरोसे और समूह की दीर्घकालिक रणनीति दोनों से जुड़ा हुआ है।
क्या Tata Trusts में बने रहेंगे नोएल टाटा?
Corporate experts का कहना है कि भले ही listed companies के boards से retirement की प्रक्रिया शुरू हो, लेकिन Tata Trusts में उनकी भूमिका जारी रह सकती है।
क्योंकि Tata Trusts समूह की holding structure का सबसे अहम हिस्सा है और उसके chairman के लिए कोई fixed retirement age नहीं है। यही वजह है कि भविष्य में उनकी strategic influence पूरी तरह खत्म होने की संभावना कम मानी जा रही है।
बाजार क्यों रखे हुए है नजर?
विशेषज्ञों का कहना है कि Tata Group भारत के सबसे भरोसेमंद corporate brands में शामिल है। ऐसे में leadership changes का असर investor sentiment, succession clarity और group companies valuation पर दिखाई दे सकता है।
हालांकि analysts का मानना है कि Tata Group लंबे समय से structured governance model पर काम करता रहा है। इसलिए transition process व्यवस्थित रहने की उम्मीद है और निवेशकों के बीच घबराहट जैसी स्थिति बनने की संभावना फिलहाल कम दिखाई देती है।
FAQ
नोएल टाटा कब 70 साल के होंगे?
नोएल टाटा नवंबर 2026 में 70 वर्ष के हो जाएंगे।
टाटा ग्रुप में retirement age क्या है?
Executive roles के लिए 65 वर्ष और non-executive board positions के लिए 70 वर्ष की परंपरा रही है।
नोएल टाटा किन कंपनियों से जुड़े हैं?
वह Trent, Voltas, Titan, Tata Steel और कई दूसरी Tata companies से जुड़े हुए हैं।
Trent का प्रदर्शन कैसा रहा?
नोएल टाटा की leadership में Trent का revenue करीब 9 गुना बढ़ा और शेयर ने 3,500% return दिया।
क्या Tata Trusts में भी retirement age लागू होती है?
नहीं, Tata Trusts chairman और trustees के लिए कोई fixed retirement age नहीं है।
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