डिजिटल इंडिया के दौर में अब अपराध भी डिजिटल हो चुका है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए ड्रग्स की खरीद-फरोख्त एक नई चुनौती बनकर उभरी है। इसी खतरे से निपटने के लिए भारत की प्रमुख एजेंसी Narcotics Control Bureau (NCB) ने एक बड़ा ऑपरेशन लॉन्च किया है—Operation WIPE।
यह सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि भारत की ड्रग्स के खिलाफ रणनीति में एक बड़ा बदलाव है, जहां अब कार्रवाई “घटना के बाद” नहीं बल्कि “घटना से पहले” की जाएगी।
Operation WIPE क्या है और क्यों जरूरी है?
Operation WIPE का पूरा नाम है Web-based Illicit Activities Prevention & Enforcement। इसका मुख्य उद्देश्य है ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए हो रही अवैध ड्रग्स की बिक्री को रोकना।
दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में ड्रग्स तस्कर पारंपरिक तरीकों से हटकर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, B2B वेबसाइट्स और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने लगे हैं। ये लोग फार्मास्यूटिकल ड्रग्स—जैसे ट्रामाडोल, क्लोनाजेपाम, फेंटानिल—को ऑनलाइन लिस्ट करके सीधे ग्राहकों तक पहुंचा रहे थे।
NCB के अनुसार, यह ऑपरेशन इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए शुरू किया गया है ताकि ऑनलाइन स्पेस को ड्रग्स तस्करी से मुक्त किया जा सके।
डिजिटल प्लेटफॉर्म कैसे बने ड्रग तस्करी का नया हथियार
जांच में सामने आया है कि तस्कर अब बेहद स्मार्ट तरीके से काम कर रहे हैं। वे:
- ऑनलाइन B2B प्लेटफॉर्म्स पर दवाइयों की लिस्टिंग करते हैं
- ग्राहकों से सीधे संपर्क करते हैं
- बिना वैध डॉक्यूमेंट के दवाइयों की सप्लाई करते हैं
- पेमेंट के लिए क्रिप्टोकरेंसी, PayPal जैसे चैनल इस्तेमाल करते हैं
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन नेटवर्क्स ने कॉल सेंटर तक स्थापित कर रखे थे, जो ग्लोबल ऑर्डर संभालते थे।
यह पूरा सिस्टम इतना संगठित था कि यह एक मल्टी-कंट्री ऑपरेशन बन चुका था।
Operation MED-MAX से मिली सीख
Operation WIPE की नींव दरअसल 2025 में चलाए गए Operation MED-MAX से पड़ी। उस समय NCB ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का पर्दाफाश किया था।
इस ऑपरेशन में भारत के अलावा कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने सहयोग किया, जिनमें US Drug Enforcement Administration (DEA) और Australian Federal Police (AFP) शामिल थीं।
इस केस की शुरुआत भारत में 3.7 किलो ट्रामाडोल की बरामदगी से हुई थी, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर यह एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट तक पहुंच गई।
कैसे काम करता था यह अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क?
जांच में सामने आया कि:
- कर्नाटक के उडुपी में एक कॉल सेंटर से ऑपरेशन चलाया जा रहा था
- ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर NDPS के तहत आने वाली दवाइयां बेची जा रही थीं
- ग्राहक से सीधे संपर्क कर डिलीवरी सेट की जाती थी
- पेमेंट इंटरनेशनल चैनलों से ली जाती थी
- विदेशों में री-शिपर्स के जरिए अंतिम डिलीवरी होती थी
इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड UAE में बैठा था, जिसे बाद में पहचान लिया गया।
NDPS Act और कानून का दायरा
भारत में ड्रग्स और साइकोट्रोपिक पदार्थों को नियंत्रित करने के लिए Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985 (NDPS Act) लागू है।
इस कानून के तहत:
- ड्रग्स का उत्पादन, बिक्री और परिवहन सख्ती से नियंत्रित होता है
- बिना लाइसेंस या वैध दस्तावेज के सप्लाई अपराध है
- दोषी पाए जाने पर कड़ी सजा और भारी जुर्माना लगाया जाता है
Operation WIPE इसी कानून के तहत आने वाली दवाइयों की ऑनलाइन बिक्री को रोकने पर केंद्रित है।
NCB की अब तक की कार्रवाई: चौंकाने वाले आंकड़े
Operation WIPE के तहत NCB ने:
- 122 संदिग्ध मामलों की पहचान की
- 62 प्रकार के ड्रग्स और पदार्थों को चिन्हित किया
- इनमें से 58 NDPS Act के तहत आते हैं
इनमें क्लोनाजेपाम, डायजेपाम और फेंटानिल जैसे हाई-रिस्क ड्रग्स शामिल हैं।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर सख्ती
NCB ने कई बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी किया है। इनमें शामिल हैं:
- IndiaMART
- TradeIndia
- Dial4Trade
इन प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया गया कि वे:
- संदिग्ध लिस्टिंग हटाएं
- फर्जी विक्रेताओं को सस्पेंड करें
- NDPS पदार्थों की पहचान के लिए सिस्टम मजबूत करें
कुछ प्लेटफॉर्म्स ने पहले ही कार्रवाई शुरू कर दी है।
Proactive Monitoring: बड़ा बदलाव
Operation WIPE की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह “reactive” नहीं बल्कि “proactive” approach अपनाता है।
मतलब:
- पहले अपराध होने का इंतजार नहीं किया जाएगा
- संदिग्ध गतिविधियों को पहले ही पहचान लिया जाएगा
- लिस्टिंग हटाकर तस्करी को रोका जाएगा
यह बदलाव भारत की एंटी-ड्रग रणनीति में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी अहम
इस ऑपरेशन में International Narcotics Control Board (INCB) के SNOOP प्रोग्राम से भी इनपुट लिया जा रहा है।
यह प्रोग्राम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर नए ओपिओइड्स और ड्रग्स की पहचान करने में मदद करता है।
आम जनता की भूमिका भी महत्वपूर्ण
NCB ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना दें।
इसके लिए MANAS National Narcotics Helpline (1933) शुरू की गई है।
अगर आपको कहीं:
- संदिग्ध ड्रग्स की ऑनलाइन बिक्री
- सोशल मीडिया पर अवैध दवाइयों की पोस्ट
- या किसी संदिग्ध ट्रांजैक्शन की जानकारी
मिलती है, तो आप इसकी सूचना दे सकते हैं। आपकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
निष्कर्ष: डिजिटल युग में ड्रग्स के खिलाफ नई लड़ाई
Operation WIPE यह दिखाता है कि भारत अब ड्रग्स के खिलाफ अपनी रणनीति को डिजिटल युग के अनुसार बदल रहा है।
जहां पहले फोकस सिर्फ फिजिकल तस्करी पर था, वहीं अब ऑनलाइन नेटवर्क्स को भी टारगेट किया जा रहा है।
NCB की यह पहल न केवल कानून प्रवर्तन को मजबूत करेगी, बल्कि समाज को भी एक सुरक्षित दिशा में ले जाएगी।
अगर यह मॉडल सफल होता है, तो यह वैश्विक स्तर पर भी एक उदाहरण बन सकता है कि कैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का दुरुपयोग रोका जा सकता है।
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