प्राकृतिक खेती को लेकर हिमाचल सरकार का बड़ा विज़न
हिमाचल प्रदेश में कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के लिए राज्य सरकार प्राकृतिक खेती (Natural Farming) को भविष्य की मुख्य रणनीति के रूप में देख रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने रविवार को स्पष्ट किया कि आने वाले समय में हिमाचल की कृषि व्यवस्था का आधार प्राकृतिक खेती ही होगी और सरकार इस दिशा में तेजी से काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने यह बयान डॉ. वाई.एस. परमार यूनिवर्सिटी ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री, सोलन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया, जहां उन्होंने कुल ₹34.31 करोड़ की विकास परियोजनाओं का वर्चुअल उद्घाटन और शिलान्यास किया।
इस कार्यक्रम में कृषि शिक्षा, शोध और ग्रामीण विकास से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई और यह स्पष्ट किया गया कि हिमाचल की अर्थव्यवस्था में कृषि की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
2 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती से जुड़े
राज्य सरकार के अनुसार, हिमाचल में प्राकृतिक खेती को लेकर किसानों की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि अब तक 2 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं।
इनमें से लगभग 1.98 लाख किसानों को प्रमाण पत्र (Certificates) जारी किए जा चुके हैं, जो इस बात का संकेत है कि राज्य में यह मॉडल तेजी से जमीनी स्तर पर लागू हो रहा है।
सरकार का मानना है कि रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करके किसानों की लागत घटाई जा सकती है और उत्पाद की गुणवत्ता बढ़ाई जा सकती है। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
शैक्षणिक संस्थानों और कृषि केंद्रों का विकास तेज
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कई विकास परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया। इनमें नरी (हमीरपुर) स्थित कॉलेज ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री में 107 बिस्तरों वाले हॉस्टल का उद्घाटन शामिल है, जिसे लगभग ₹3.63 करोड़ की लागत से तैयार किया गया है।
इसके अलावा, लाहौल-स्पीति के ताबो में कृषि विज्ञान केंद्र (Krishi Vigyan Kendra) के प्रशासनिक भवन का भी उद्घाटन किया गया, जिसकी लागत ₹1.48 करोड़ है।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य कृषि शिक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी पहुंच को मजबूत करना है, ताकि युवा पीढ़ी आधुनिक और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों से जुड़ सके।
महिला सशक्तिकरण पर भी फोकस
सरकार ने कृषि शिक्षा संस्थानों में महिला कार्यबल के लिए विशेष पहल की है। मुख्यमंत्री ने नरी और खग्गल (हमीरपुर) में वर्किंग वूमेन हॉस्टल के निर्माण की आधारशिला रखी।
इन हॉस्टलों पर क्रमशः ₹8.57 करोड़ और ₹8.68 करोड़ की लागत आने का अनुमान है। वहीं सोलन स्थित नाहन यूनिवर्सिटी के मुख्य परिसर में 100 क्षमता वाले एक बड़े हॉस्टल का शिलान्यास भी किया गया, जिसकी लागत ₹11.95 करोड़ रखी गई है।
यह पहल दिखाती है कि राज्य सरकार शिक्षा और रोजगार दोनों क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करना चाहती है।
कृषि हिमाचल की अर्थव्यवस्था की रीढ़
मुख्यमंत्री सुक्खू ने अपने संबोधन में कहा कि कृषि हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। राज्य की लगभग 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और करीब 53.95 प्रतिशत लोग सीधे तौर पर कृषि पर निर्भर हैं।
ऐसे में सरकार का फोकस स्पष्ट रूप से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर है। इसके लिए कई नई नीतियां और योजनाएं लागू की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और खेती को अधिक लाभकारी बनाना है।
प्राकृतिक खेती क्यों बन रही है भविष्य का मॉडल?
हिमाचल सरकार का मानना है कि प्राकृतिक खेती केवल एक विकल्प नहीं बल्कि भविष्य की आवश्यकता है। रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से न केवल मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है, बल्कि मानव स्वास्थ्य पर भी इसका प्रभाव पड़ता है।
प्राकृतिक खेती के जरिए:
- खेती की लागत कम होती है
- मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है
- जैविक उत्पादों की मांग बढ़ती है
- पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है
इसी कारण सरकार इसे बड़े पैमाने पर अपनाने पर जोर दे रही है।
विश्वविद्यालयों की भूमिका को बताया अहम
सीएम सुक्खू ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों की भूमिका इस परिवर्तन में बेहद महत्वपूर्ण है। डॉ. वाई.एस. परमार यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान किसानों को प्रशिक्षण देने, नई तकनीक विकसित करने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
सरकार चाहती है कि ये संस्थान किसानों और वैज्ञानिक शोध के बीच एक मजबूत सेतु का काम करें, जिससे तकनीक सीधे खेतों तक पहुंचे।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार
हिमाचल सरकार का लक्ष्य केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना भी है। प्राकृतिक खेती के माध्यम से राज्य में छोटे किसानों की आय बढ़ाने की योजना पर काम हो रहा है।
इसके साथ ही कृषि आधारित रोजगार, प्रोसेसिंग यूनिट्स और ग्रामीण स्टार्टअप्स को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
निष्कर्ष: हिमाचल में कृषि का नया अध्याय शुरू
मुख्यमंत्री सुक्खू की यह पहल स्पष्ट संकेत देती है कि हिमाचल प्रदेश आने वाले वर्षों में प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में देश के लिए एक मॉडल राज्य बन सकता है।
2 लाख से अधिक किसानों की भागीदारी, बड़े पैमाने पर विकास परियोजनाएं और कृषि शिक्षा संस्थानों का विस्तार इस दिशा में मजबूत आधार तैयार कर रहे हैं।
यदि यह मॉडल सफल होता है, तो यह न केवल हिमाचल बल्कि पूरे देश के लिए कृषि क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
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