काठमांडू, 17 अप्रैल: नेपाल की राजनीति में एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति की व्यापक जांच शुरू कर दी गई है। इस कार्रवाई को देश के इतिहास की सबसे बड़ी एंटी-करप्शन जांच माना जा रहा है, जिसमें 2006 के बाद से सत्ता में रहे लगभग हर बड़े राजनीतिक चेहरे को दायरे में लाया गया है।
यह कदम प्रधानमंत्री Balen Shah की सरकार की ओर से उठाया गया है, जिसने एक 5 सदस्यीय न्यायिक पैनल गठित किया है जो पिछले लगभग दो दशकों के दौरान सार्वजनिक पदों पर रहे लोगों की संपत्ति और वित्तीय लेन-देन की जांच करेगा।
जांच के दायरे में कौन-कौन?

इस जांच का दायरा बेहद व्यापक है। 2005–06 के बाद नेपाल में सत्ता संभालने वाले सभी सात पूर्व प्रधानमंत्रियों को इसमें शामिल किया गया है।
इनमें शामिल हैं:
- सुशील कोईराला
- पुष्प कमल दहल “प्रचंड”
- माधव कुमार नेपाल
- झलनाथ खनाल
- बाबूराम भट्टराई
- केपी शर्मा ओली
- शेर बहादुर देउबा
इसके अलावा दो अंतरिम सरकार प्रमुख—खिलराज रेग्मी और सुशीला कार्की—भी जांच के दायरे में हैं।
पूर्व राजा और राष्ट्रपति भी जांच में

इस जांच की सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें नेपाल के पूर्व राजा Gyanendra Shah भी शामिल किए गए हैं।
इसके साथ ही देश के तीन राष्ट्रपति भी जांच के घेरे में आए हैं:
- राम बरन यादव
- विद्या देवी भंडारी
- रामचंद्र पौडेल
यह पहली बार है जब नेपाल में शीर्ष संवैधानिक पदों पर रहे सभी प्रमुख व्यक्तित्व एक साथ किसी भ्रष्टाचार जांच के दायरे में आए हैं।
100 से ज्यादा मंत्री और अधिकारी भी जांच में

यह जांच केवल राजनीतिक नेतृत्व तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार:
- 100 से अधिक मंत्री
- वरिष्ठ नौकरशाह
- संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारी
- और कई अन्य प्रशासनिक अधिकारी
भी इस जांच के दायरे में शामिल किए गए हैं।
इससे साफ संकेत मिलता है कि यह जांच केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि सिस्टम के पूरे ढांचे को खंगालने के उद्देश्य से की जा रही है।
मृत नेताओं की संपत्ति भी जांच के दायरे में
इस जांच का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें उन नेताओं की संपत्ति भी शामिल की जा रही है जो अब जीवित नहीं हैं। इसका मतलब है कि उनकी संपत्ति और संपत्ति हस्तांतरण की प्रक्रिया की भी जांच होगी।
इसमें गिरिजा प्रसाद कोईराला और सुशील कोईराला जैसे नेताओं के परिवारों की संपत्ति भी जांच के दायरे में आ सकती है।
राजनीतिक प्रभाव: सत्ता और विपक्ष दोनों में हलचल
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह जांच किसी एक पार्टी या गुट तक सीमित नहीं है। यहां तक कि मौजूदा सत्ता पक्ष के कुछ नेता भी इसके दायरे में आ सकते हैं।
यह भी कहा जा रहा है कि जांच:
- मौजूदा स्पीकर
- कुछ मंत्री
- और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के प्रमुख रवि लामिछाने
तक भी पहुंच सकती है, क्योंकि वे पहले सार्वजनिक पदों पर रह चुके हैं।
जांच आयोग का नेतृत्व
इस पूरे मामले की निगरानी एक 5 सदस्यीय आयोग कर रहा है, जिसकी अध्यक्षता रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज Rajendra Kumar Bhardwaj कर रहे हैं।
सरकार का कहना है कि यह पैनल पूरी तरह स्वतंत्र है और इसका उद्देश्य केवल सबूतों के आधार पर निष्पक्ष जांच करना है।
कैसे शुरू हुई यह कार्रवाई?
यह जांच उस राजनीतिक बदलाव के बाद शुरू हुई है, जिसमें Balen Shah की पार्टी ने हालिया चुनावों में भारी जीत दर्ज की। यह जीत पिछले साल हुए भ्रष्टाचार विरोधी जनआंदोलन के बाद और मजबूत हुई।
सरकार का दावा है कि जनता ने स्पष्ट जनादेश दिया है कि देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
प्रमुख घोटाले जो जांच के केंद्र में हैं
नेपाल में पिछले दो दशकों में कई बड़े घोटाले सामने आए हैं, जो अब इस जांच के व्यापक दायरे का हिस्सा बन सकते हैं।
1. भूटानी शरणार्थी घोटाला (2023)
इस मामले में आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए नेपाली नागरिकों को भूटानी शरणार्थी बनाकर विदेश भेजने का रैकेट चलाया गया। कई लोगों से भारी रकम वसूली गई। इस केस में पूर्व गृह मंत्री तक का नाम सामने आया था।
2. ललिता निवास भूमि घोटाला (2021)
काठमांडू के बालुवाटार इलाके की सरकारी जमीन को फर्जी दस्तावेजों के जरिए निजी संपत्ति में बदलने का आरोप। इस घोटाले में कई पूर्व प्रधानमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल बताए गए।
3. वाइड बॉडी विमान खरीद घोटाला (2018)
नेपाल एयरलाइंस द्वारा विमान खरीद में अरबों रुपये की अनियमितताओं के आरोप लगे।
4. भूकंप राहत घोटाला (2015)
2015 के विनाशकारी भूकंप के बाद राहत फंड और सामग्री के वितरण में गड़बड़ी के आरोप सामने आए।
5. टेलीकॉम लाइसेंस घोटाला (2009)
टेलीकॉम सेक्टर में लाइसेंस जारी करने के दौरान रिश्वत और नियमों की अनदेखी के आरोप लगे।
राजनीतिक विश्लेषण: क्यों यह जांच ऐतिहासिक है?
यह जांच इसलिए ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि:
- पहली बार लगभग पूरा राजनीतिक नेतृत्व जांच के दायरे में है
- सत्ता, विपक्ष, पूर्व राजा और नौकरशाही सभी शामिल हैं
- जांच का दायरा 20 साल के पूरे लोकतांत्रिक दौर तक फैला है
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम नेपाल की राजनीति में एक बड़ा “reset moment” साबित हो सकता है।
निष्कर्ष: नेपाल की राजनीति में बड़ा मोड़
Balen Shah सरकार द्वारा शुरू की गई यह जांच नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे महत्वाकांक्षी प्रयास माना जा रहा है। अगर यह जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ती है, तो यह देश की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था को गहराई से बदल सकती है।
हालांकि, इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जांच कितनी स्वतंत्र और राजनीतिक दबाव से मुक्त रहती है।
फिलहाल इतना तय है कि नेपाल की राजनीति एक बड़े और अस्थिर लेकिन ऐतिहासिक दौर में प्रवेश कर चुकी है।
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