Closing Auction Session (CAS): भारतीय शेयर बाजार में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) लागू होने के बाद पहले ही दिन कुछ असामान्य परिस्थितियां देखने को मिलीं। कैश मार्केट में कई शेयरों और इंडेक्स के भाव फ्यूचर्स मार्केट के मुकाबले प्रीमियम पर पहुंच गए। इस स्थिति को देखते हुए कुछ ब्रोकरेज फर्मों ने अपने रिटेल ग्राहकों को सलाह दी है कि वे दोपहर 3 बजे तक अपनी ट्रेडिंग पोजिशन स्क्वेयर ऑफ कर दें।
ब्रोकर्स का कहना है कि नया सिस्टम अभी शुरुआती चरण में है और जब तक बाजार के सभी हिस्से इस प्रक्रिया के साथ पूरी तरह सहज नहीं हो जाते, तब तक रिटेल ट्रेडर्स को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
पहले ही दिन दिखी कैश और फ्यूचर्स में बड़ी गड़बड़ी
क्लोजिंग ऑक्शन सेशन लागू होने के बाद पहले कारोबारी दिन दोपहर 3:15 बजे के बाद कैश मार्केट और फ्यूचर्स मार्केट के भाव में बड़ा अंतर देखने को मिला।
आमतौर पर फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट स्पॉट मार्केट यानी कैश प्राइस से ऊपर ट्रेड करते हैं, क्योंकि इसमें कॉस्ट ऑफ कैरी शामिल होती है। लेकिन नए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम के दौरान स्थिति उलट गई और कई मामलों में कैश मार्केट में कीमतें फ्यूचर्स से ज्यादा दिखाई दीं।
यह अंतर केवल निफ्टी जैसे प्रमुख इंडेक्स तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई व्यक्तिगत शेयरों में भी देखने को मिला। इससे ट्रेडर्स के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हुई और आर्बिट्रेज ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों के लिए भी चुनौती बढ़ गई।
ब्रोकर्स ने रिटेल निवेशकों को क्यों दी 3 बजे तक निकलने की सलाह?
कुछ ब्रोकरेज कंपनियों ने अपने ग्राहकों को सलाह दी है कि वे फिलहाल दोपहर 3 बजे से 3:05 बजे के बीच अपनी सभी ट्रेडिंग पोजिशन बंद कर दें।
एक ब्रोकरेज अधिकारी के अनुसार, रिटेल ग्राहकों को यह सलाह इसलिए दी गई है क्योंकि नए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम में अभी पर्याप्त भागीदारी नहीं बन पाई है। कम लिक्विडिटी और नए मैकेनिज्म के कारण अचानक प्राइस मूवमेंट का जोखिम बढ़ सकता है।
ब्रोकर्स नहीं चाहते कि शुरुआती दौर में किसी तकनीकी बदलाव के कारण छोटे निवेशकों को अनावश्यक नुकसान उठाना पड़े।
क्या है Closing Auction Session (CAS)?
क्लोजिंग ऑक्शन सेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें बाजार बंद होने से पहले खरीद और बिक्री के सभी ऑर्डर एकत्र किए जाते हैं। इसके बाद एक ऐसा भाव तय किया जाता है जिस पर अधिकतम संभव सौदों का मिलान हो सके।
इसका उद्देश्य बाजार के क्लोजिंग प्राइस को ज्यादा सटीक बनाना और कीमतों की बेहतर खोज (Price Discovery) सुनिश्चित करना है।
दुनिया के कई बड़े स्टॉक एक्सचेंज पहले से ही इस तरह की व्यवस्था का इस्तेमाल करते हैं, जिनमें New York Stock Exchange, London Stock Exchange, Euronext, Hong Kong Exchanges and Clearing और Australian Securities Exchange शामिल हैं।
NSE ने दी सफाई, कहा- इंडेक्स में अचानक बदलाव नहीं होता
National Stock Exchange of India (NSE) ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया है।
NSE के मुताबिक, 3:15 बजे से 3:30 बजे के बीच ऑर्डर जमा करने, रद्द करने और मैचिंग की प्रक्रिया चलती है। इस दौरान लगातार ट्रेडिंग नहीं होती, इसलिए इंडेक्स वैल्यू में अचानक बदलाव नहीं दिखना चाहिए।
एक्सचेंज ने कहा कि इस दौरान वेबसाइट पर दिखाई जाने वाली इंडिकेटिव वैल्यू लगातार कैलकुलेट की गई इक्विलिब्रियम कीमतों के आधार पर होती है। इसका उद्देश्य ट्रेडर्स को अनुमानित क्लोजिंग प्राइस की जानकारी देना है।
एक्सपर्ट ने बताई असली चुनौती
बीसीबी ब्रोकरेज के एमडी उत्तम बागड़ी के अनुसार, समस्या क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम में नहीं है, बल्कि इसमें पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित करने की है।
उनका कहना है कि CAS की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संस्थागत निवेशक, आर्बिट्रेज ट्रेडर्स और लिक्विडिटी प्रोवाइडर्स इस प्रक्रिया में कितनी सक्रियता से हिस्सा लेते हैं।
अगर ज्यादा मार्केट पार्टिसिपेंट्स क्लोजिंग ऑक्शन में ऑर्डर डालेंगे तो कीमतों में अंतर कम होगा और सिस्टम ज्यादा प्रभावी तरीके से काम करेगा।
आने वाले समय में बढ़ेगी भागीदारी
NSE का मानना है कि समय के साथ क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में भागीदारी बढ़ेगी। इससे बाजार में क्लोजिंग कीमतों की पारदर्शिता और सटीकता बेहतर होगी।
फिलहाल ब्रोकरेज फर्मों की सलाह है कि छोटे निवेशक नए सिस्टम को समझने तक सावधानी बरतें और आखिरी कुछ मिनटों की ट्रेडिंग में अतिरिक्त जोखिम लेने से बचें।
Disclaimer:
NewsJagran पर दी गई जानकारी निवेश सलाह नहीं है। यहां बताए गए विचार एक्सपर्ट्स, ब्रोकरेज फर्मों और बाजार विश्लेषकों के निजी विचार हैं। किसी भी निवेश निर्णय से पहले सर्टिफाइड वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।


