Gold Demand India Q2 2026: भारत में सोने की मांग भले ही कम हो गई है, लेकिन इसकी कीमतों में तेज उछाल के कारण सोने पर खर्च की गई रकम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल-जून 2026 तिमाही में भारतीयों ने मात्रा (Volume) के लिहाज से कम सोना खरीदा, लेकिन ऊंची कीमतों की वजह से इसकी कुल वैल्यू अब तक के सबसे बड़े स्तर पर पहुंच गई।
रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 तिमाही में भारत में सोने की कुल मांग सालाना आधार पर 6 फीसदी घटकर 131 टन रह गई। यह हाल के वर्षों में जून तिमाही की सबसे कमजोर मांग में से एक रही। हालांकि, इसी अवधि में सोने पर किया गया कुल खर्च 50 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड ₹1.98 लाख करोड़ तक पहुंच गया।
इसकी सबसे बड़ी वजह घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में आई जबरदस्त तेजी रही। रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान भारत में सोने के भाव करीब 59 फीसदी तक मजबूत हुए, जिससे कम मात्रा में खरीदारी के बावजूद कुल खर्च बढ़ गया।
ऊंची कीमतों ने बदला सोना खरीदने का तरीका
सोने की लगातार बढ़ती कीमतों ने भारतीय ग्राहकों के खरीदारी पैटर्न में बड़ा बदलाव किया है। लोग सोना खरीदना बंद नहीं कर रहे हैं, बल्कि कम वजन, कम कैरेट और ज्यादा किफायती विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं।
ज्वेलर्स के मुताबिक, अब ग्राहक भारी गहनों की जगह हल्के वजन वाली ज्वेलरी, स्टडेड ज्वेलरी और कम बजट वाले डिजाइन पसंद कर रहे हैं। इसके अलावा पुराने गहनों को एक्सचेंज कर नए आभूषण खरीदने का चलन भी काफी बढ़ा है।
कुछ ज्वेलर्स के अनुसार, उनकी कुल बिक्री में पुराने गहनों के बदले नई खरीदारी की हिस्सेदारी करीब 70 फीसदी तक पहुंच गई। जून तिमाही में इस तरह की खरीदारी में 10 से 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी देखने को मिली।
ज्वेलरी डिमांड में गिरावट, लेकिन वैल्यू बढ़ी
जून तिमाही में सोने की ज्वेलरी की मांग वॉल्यूम के हिसाब से सालाना आधार पर 15 फीसदी घटकर 75 टन रही। यह साल 2000 के बाद दूसरी सबसे कमजोर जून तिमाही रही।
हालांकि, कीमतों में तेजी के कारण ज्वेलरी की कुल वैल्यू 34 फीसदी बढ़कर ₹1.13 लाख करोड़ हो गई।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत अभी भी दुनिया का सबसे बड़ा ज्वेलरी बाजार बना हुआ है और ग्लोबल ज्वेलरी डिमांड में भारत की हिस्सेदारी करीब 27 फीसदी रही।
सोने की मांग घटने की बड़ी वजहें
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, सोने की मांग कमजोर होने के पीछे कई कारण रहे:
- पिछले दो वर्षों में सोने की कीमतों में तेज उछाल
- रुपये में कमजोरी
- आयात शुल्क में बढ़ोतरी
- कुछ महीनों में शादी और शुभ अवसरों से जुड़ी कम खरीदारी
हालांकि मार्च तिमाही की तुलना में जून तिमाही में अक्षय तृतीया और शादी-ब्याह के सीजन की वजह से ज्वेलरी डिमांड में सुधार देखने को मिला।
गोल्ड इन्वेस्टमेंट डिमांड में आई गिरावट
सोने में निवेश की मांग भी जून तिमाही में कमजोर रही। बार, कॉइन्स और गोल्ड ईटीएफ को मिलाकर निवेश मांग घटकर 54 टन रह गई।
इससे पहले लगातार तीन तिमाहियों में औसत निवेश मांग करीब 100 टन रही थी।
बार और सिक्कों की खरीदारी मार्च तिमाही के मुकाबले 19 फीसदी घटकर 50 टन रह गई। हालांकि, सालाना आधार पर इसमें 9 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
वहीं, 2026 की पहली छमाही में बार और सिक्कों की खरीदारी पिछले 13 वर्षों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई।
गोल्ड ETF में निवेश घटा, लेकिन भारत का प्रदर्शन बेहतर
मार्च तिमाही में रिकॉर्ड निवेश के बाद जून तिमाही में गोल्ड ETF की मांग घटकर करीब 4 टन रह गई।
इसके बावजूद भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल रहा, जहां गोल्ड ETF में निवेश जारी रहा। इसके उलट अमेरिका और चीन जैसे बड़े बाजारों में निवेशकों ने गोल्ड ETF से पैसा निकाला।
जून 2026 के अंत तक भारत में गोल्ड ETF की कुल होल्डिंग 119 टन और इसका एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) करीब ₹1.7 लाख करोड़ तक पहुंच गया।
सोने की सप्लाई छह साल के निचले स्तर पर
रिपोर्ट के अनुसार, जून तिमाही में भारत में सोने की सप्लाई घटकर 120 टन रह गई, जो पिछले छह वर्षों का सबसे निचला स्तर है।
इस गिरावट की मुख्य वजह सोने के आयात में कमी रही। आयात शुल्क बढ़ने के बाद तिमाही आधार पर आयात में 53 फीसदी और सालाना आधार पर 22 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि, वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने कहा कि घरेलू बाजार में सोने की उपलब्धता को लेकर कोई बड़ी समस्या नहीं रही। पुराने स्टॉक और रिसाइकल्ड गोल्ड ने बाजार की जरूरतों को पूरा किया।
सोना बेचने की बजाय लोग ले रहे गोल्ड लोन
रिपोर्ट में एक अहम ट्रेंड सामने आया है कि ऊंची कीमतों के बावजूद लोग सोना बेचने की बजाय उसे गिरवी रखकर कर्ज लेना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
बैंकों का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो सालाना आधार पर दोगुना होकर ₹5.1 लाख करोड़ तक पहुंच गया।
वहीं, एनबीएफसी कंपनियों का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो करीब 70 फीसदी बढ़कर ₹3.3 लाख करोड़ हो गया।
इससे साफ है कि भारतीय परिवार सोने को सिर्फ आभूषण नहीं बल्कि एक वित्तीय संपत्ति के तौर पर भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
आगे कैसी रह सकती है गोल्ड डिमांड?
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर सोने की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं तो आने वाले महीनों में वॉल्यूम के हिसाब से मांग पर दबाव रह सकता है। हालांकि, शादी सीजन, त्योहारी मांग और निवेशकों की दिलचस्पी के कारण सोने की वैल्यू मजबूत बनी रह सकती है।
भारत में सोने को पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है। यही वजह है कि कीमतों में तेजी के बावजूद लोग पूरी तरह इससे दूरी नहीं बना रहे हैं, बल्कि खरीदारी और निवेश के तरीके बदल रहे हैं।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी केवल सूचना के उद्देश्य से है। निवेश करने से पहले हमेशा अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। NewsJagran किसी भी व्यक्ति को किसी शेयर, कमोडिटी या निवेश विकल्प में पैसा लगाने की सलाह नहीं देता है।


