Gyan Bharatam Mission: भारत की हजारों साल पुरानी ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में केंद्र सरकार के ज्ञान भारतम मिशन (GBM) ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। देशभर में चलाए गए राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के दौरान अब तक 1.19 करोड़ से अधिक पांडुलिपियों के रिकॉर्ड दर्ज किए जा चुके हैं। इन पांडुलिपियों में भारत के इतिहास, विज्ञान, साहित्य, दर्शन, चिकित्सा, गणित, खगोल विज्ञान और धार्मिक परंपराओं से जुड़ी दुर्लभ जानकारियां मौजूद हैं।
केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लोकसभा में इस मिशन से जुड़ी अहम जानकारियां साझा करते हुए बताया कि सरकार का उद्देश्य भारत की प्राचीन ज्ञान संपदा को संरक्षित करने के साथ-साथ उसे डिजिटल माध्यम से दुनिया भर के शोधकर्ताओं और आम लोगों तक पहुंचाना है।
क्या है ज्ञान भारतम मिशन?
ज्ञान भारतम मिशन (Gyan Bharatam Mission) भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की एक महत्वाकांक्षी पहल है। इसकी घोषणा केंद्रीय बजट 2025-26 में की गई थी। इस मिशन का मकसद भारत में मौजूद पांडुलिपियों की खोज, पहचान, संरक्षण, डिजिटाइजेशन और उन्हें वैश्विक स्तर पर उपलब्ध कराना है।
भारत में हजारों वर्षों से अलग-अलग भाषाओं, लिपियों और क्षेत्रों में ज्ञान का संग्रह पांडुलिपियों के रूप में मौजूद है। इनमें संस्कृत, प्राकृत, पाली, तमिल, तेलुगु, फारसी, अरबी समेत कई भाषाओं की दुर्लभ सामग्री शामिल है।
सरकार का मानना है कि ये पांडुलिपियां केवल पुराने दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
ज्ञान भारतम मिशन के लिए 491.66 करोड़ रुपये का बजट
पांडुलिपियों के सर्वेक्षण, संरक्षण और डिजिटलाइजेशन को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने बड़ा वित्तीय प्रावधान किया है।
स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी ने वर्ष 2025 से 2031 तक के लिए इस मिशन के तहत 491.66 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है।
इस राशि का इस्तेमाल मुख्य रूप से इन कामों में किया जाएगा:
- देशभर में मौजूद पांडुलिपियों का सर्वेक्षण
- पांडुलिपियों की पहचान और कैटलॉगिंग
- डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना
- खराब हो रही पांडुलिपियों का संरक्षण
- आधुनिक तकनीक के जरिए रिसर्च को बढ़ावा देना
- राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी तैयार करना
राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण में मिली बड़ी सफलता
ज्ञान भारतम मिशन के तहत मार्च 2026 में राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य देशभर में मौजूद पांडुलिपियों के मालिकों, संस्थानों, संग्रहकर्ताओं और संरक्षण केंद्रों की पहचान करना था।
इस सर्वेक्षण के दौरान अब तक:
- 1.19 करोड़ से ज्यादा पांडुलिपियों के रिकॉर्ड दर्ज किए गए हैं।
- 8 लाख से अधिक पांडुलिपियां डिजिटल रूप में उपलब्ध हैं।
- इनमें से 4.40 लाख से ज्यादा डिजिटल पांडुलिपियां ज्ञान भारतम पोर्टल पर उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।
इन डिजिटल पांडुलिपियों को राज्यवार एक्सेस किया जा सकता है, जिससे शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को काफी मदद मिलेगी।
ज्ञान भारतम मिशन के प्रमुख उद्देश्य
सरकार ने इस मिशन के तहत कई महत्वपूर्ण लक्ष्य तय किए हैं। इनमें सबसे बड़ा उद्देश्य भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को डिजिटल युग से जोड़ना है।
1. पांडुलिपियों का डिजिटाइजेशन
पुरानी और दुर्लभ पांडुलिपियों को स्कैन कर डिजिटल फॉर्मेट में सुरक्षित किया जा रहा है, ताकि वे समय के साथ खराब न हों।
2. राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी तैयार करना
सरकार ऐसी डिजिटल लाइब्रेरी तैयार करना चाहती है, जहां भारत की अलग-अलग भाषाओं और क्षेत्रों की पांडुलिपियां एक जगह उपलब्ध हों।
3. बेहतर कैटलॉगिंग और दस्तावेजीकरण
देशभर में मौजूद पांडुलिपियों की सही जानकारी तैयार की जा रही है, ताकि उनके विषय, भाषा, समयकाल और महत्व को समझा जा सके।
4. शोध और शिक्षा को बढ़ावा देना
मिशन के जरिए भारतीय भाषाओं, पांडुलिपि विज्ञान (Manuscriptology) और ऐतिहासिक शोध को बढ़ावा दिया जाएगा।
5. संरक्षण के लिए प्रशिक्षण
पांडुलिपियों को सुरक्षित रखने के लिए विशेषज्ञों को प्रशिक्षण देने और जागरूकता अभियान चलाने की भी योजना है।
क्लस्टर सेंटर और संस्थागत नेटवर्क तैयार
ज्ञान भारतम मिशन को लागू करने के लिए देशभर में एक मजबूत संस्थागत ढांचा तैयार किया गया है।
इसके तहत:
- विश्वविद्यालय
- रिसर्च संस्थान
- पुस्तकालय
- अभिलेखागार
- निजी संग्रहकर्ता
- धार्मिक संस्थान
को जोड़ा गया है।
इसके अलावा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिशन के लिए नोडल एजेंसी के रूप में शामिल किया गया है।
बिहार की कई प्रमुख संस्थाएं भी इस मिशन से जुड़ी हैं, जिनमें:
- नवा नालंदा महाविहार, नालंदा
- खुदा बख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी, पटना
- श्री बोधगया मठ, बोधगया
जैसी संस्थाएं शामिल हैं।
पांडुलिपियों की सुरक्षा और कॉपीराइट का रखा जा रहा ध्यान
सरकार ने डिजिटल पांडुलिपियों को उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके अधिकारों और सुरक्षा का भी ध्यान रखा है।
जिन पांडुलिपियों पर कोई कानूनी प्रतिबंध नहीं है, उन्हें राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी के जरिए आम लोगों और शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
वहीं, जिन पांडुलिपियों पर कॉपीराइट, निजी अधिकार या सुरक्षा संबंधी प्रतिबंध हैं, उन्हें तय नियमों और शर्तों के अनुसार ही एक्सेस दिया जाएगा।
भारत की ज्ञान विरासत को वैश्विक मंच देने की कोशिश
भारत में मौजूद पांडुलिपियां केवल धार्मिक या साहित्यिक दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि इनमें प्राचीन भारतीय विज्ञान, चिकित्सा, गणित, वास्तुकला और समाज व्यवस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी छिपी हैं।
ज्ञान भारतम मिशन के जरिए सरकार का लक्ष्य है कि इन दुर्लभ दस्तावेजों को सुरक्षित रखा जाए और दुनिया भर के शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध कराया जाए।
1.19 करोड़ पांडुलिपियों का रिकॉर्ड तैयार होना भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।


