भारत का गोल्ड लोन मार्केट पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बदलता हुआ एक बड़ा फाइनेंशियल सेगमेंट बन गया है। जहां पहले यह केवल आपातकालीन जरूरतों तक सीमित था, अब यह एक मुख्यधारा (mainstream) रिटेल क्रेडिट प्रोडक्ट बन चुका है।
ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2022 के बाद से भारत का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो 3.8 गुना बढ़ चुका है और अब यह देश के रिटेल क्रेडिट मार्केट का दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा बन गया है।
यह डेटा TransUnion CIBIL की Gold Loan Landscape Report में सामने आया है।
गोल्ड लोन अब बना 11.1% रिटेल क्रेडिट मार्केट का हिस्सा
रिपोर्ट के मुताबिक, गोल्ड लोन अब भारत के कुल रिटेल क्रेडिट पोर्टफोलियो का 11.1% हिस्सा बन चुका है।
यह एक बड़ा बदलाव है क्योंकि:
- मार्च 2022 में यह हिस्सा सिर्फ 5.9% था
- यानी लगभग दोगुना से भी ज्यादा वृद्धि
यह दर्शाता है कि भारत में गोल्ड-आधारित उधारी (gold-backed borrowing) तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
लोन साइज़ और डिमांड दोनों में तेज बढ़ोतरी
गोल्ड लोन मार्केट में सिर्फ संख्या ही नहीं, बल्कि लोन का औसत आकार भी बढ़ा है।
- औसत गोल्ड लोन: ₹1.1 लाख (2022) → ₹1.9 लाख (2025)
इसके साथ:
- ओरिजिनेशन वैल्यू 5.1 गुना बढ़ी
- ओरिजिनेशन वॉल्यूम 2.3 गुना बढ़ा
यानी लोग अब ज्यादा और बड़े गोल्ड लोन ले रहे हैं।
बैंक और NBFC दोनों की बढ़ती हिस्सेदारी
गोल्ड लोन मार्केट में बैंकों और NBFCs दोनों की भूमिका तेजी से बढ़ी है।
- Public Sector Banks की हिस्सेदारी: 57% → 62%
- NBFCs की हिस्सेदारी: 7% → 11%
इससे साफ है कि यह सेक्टर अब संगठित (organized) और भरोसेमंद फाइनेंशियल प्रोडक्ट बन चुका है।
गोल्ड लोन क्यों बन रहा है भारत का भरोसेमंद क्रेडिट विकल्प?
भारत में सोना सिर्फ एक संपत्ति नहीं, बल्कि एक सुरक्षा कवच माना जाता है। इसी वजह से गोल्ड लोन तेजी से बढ़ रहा है।
मुख्य कारण:
- आसान लोन प्रोसेस
- कम डॉक्यूमेंटेशन
- तुरंत कैश उपलब्धता
- बैंक और NBFC दोनों की पहुंच
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण ट्रेंड सामने आया है:
- 2025 में 39% गोल्ड लोन महिलाएं ले रही हैं
यह बदलाव दिखाता है कि:
- महिलाओं की फाइनेंशियल भागीदारी बढ़ रही है
- ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में क्रेडिट एक्सेस आसान हुआ है
क्रेडिट प्रोफाइल में बड़ा बदलाव
गोल्ड लोन लेने वाले ग्राहकों की प्रोफाइल भी बदल रही है।
- Prime और above-prime borrowers: 43% → 52%
यानी अब बेहतर क्रेडिट स्कोर वाले लोग भी गोल्ड लोन ले रहे हैं।
रिस्क भी बढ़ा, डिफॉल्ट पैटर्न पर नजर
हालांकि ग्रोथ मजबूत है, लेकिन रिपोर्ट में कुछ जोखिम भी सामने आए हैं।
- कुल डिलिंक्वेंसी: 1.1%
- ₹2.5 लाख से ज्यादा लोन में डिफॉल्ट: 1.5%
यानी बड़े लोन पर रिस्क ज्यादा है।
“लास्ट रिज़ॉर्ट” लोन बनने का खतरा
रिपोर्ट के अनुसार कुछ मामलों में गोल्ड लोन अब “last resort borrowing” बनता जा रहा है।
इसका मतलब:
- कुछ उधारकर्ता वित्तीय तनाव में इसका उपयोग कर रहे हैं
- क्रेडिट एक्सेस बंद होने पर यह अंतिम विकल्प बन रहा है
बैंकों के लिए नई चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार अब लेंडर्स को सिर्फ कोलैटरल पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
जरूरी फैक्टर:
- borrower की repayment capacity
- कुल कर्ज (total indebtedness)
- credit behavior
- cross-lender exposure
गोल्ड लोन मार्केट का भविष्य
भारत में गोल्ड लोन सेक्टर आगे भी मजबूत रहने की संभावना है क्योंकि:
- सोने की कीमतें स्थिर रूप से ऊंची हैं
- क्रेडिट की मांग बढ़ रही है
- NBFC और बैंक दोनों का विस्तार जारी है
निष्कर्ष
TransUnion CIBIL की रिपोर्ट यह साफ संकेत देती है कि भारत का गोल्ड लोन मार्केट अब एक छोटे से सेगमेंट से निकलकर एक बड़े फाइनेंशियल इंजन में बदल चुका है।
3.8 गुना की वृद्धि और 11.1% मार्केट शेयर यह दिखाता है कि भारत में गोल्ड अब सिर्फ आभूषण नहीं, बल्कि एक मजबूत आर्थिक संसाधन बन चुका है।
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