Market Insight: ग्लोबल संकेतों में सुधार और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत को मजबूती दी है। हालांकि बाजार में उतार-चढ़ाव अभी भी बना हुआ है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह दौर लंबी अवधि के निवेशकों के लिए बेहतरीन अवसर लेकर आया है। सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल के अनुसार, फिलहाल निवेशकों को अच्छी क्वालिटी के रेट-सेंसिटिव शेयरों में हर गिरावट पर खरीदारी करनी चाहिए, जबकि शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को बेहद सतर्क रहने और सख्त स्टॉप लॉस के साथ ट्रेड करना चाहिए।
ग्लोबल संकेतों से बाजार को मिला सहारा
सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सकारात्मक रही। इसकी सबसे बड़ी वजह मध्य-पूर्व में तनाव कम होना और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट रही। शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड में 5% से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली, जिससे निवेशकों का भरोसा लौटा।
हालांकि बाद में ब्रेंट क्रूड फिर से 92-93 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, लेकिन शुक्रवार को 100-102 डॉलर के स्तर की तुलना में यह अभी भी काफी राहत वाला स्तर माना जा रहा है। तेल की कीमतों में नरमी से ऑटो, बैंकिंग, एविएशन और अन्य रेट-सेंसिटिव सेक्टरों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
क्यों बदला बाजार का मूड?
अनुज सिंघल का कहना है कि पिछले कारोबारी सत्र में जो रणनीति अपनाई गई थी, वह लगभग पूरी तरह सफल रही। उन्होंने ज्यादा जोखिम लेने वाले ट्रेडर्स को निफ्टी कॉल ऑप्शन लेने की सलाह दी थी और बाजार ने उसी दिशा में मूवमेंट दिखाया।
उनका मानना है कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रही है। जब भी 10 साल की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 4.7% के करीब पहुंचती है, तब अमेरिकी प्रशासन पर दबाव बढ़ता है। अमेरिका आने वाले मिड-टर्म चुनावों को देखते हुए पेट्रोल और गैसोलीन की कीमतों को नियंत्रित रखना चाहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के लिए आदर्श स्थिति यही है कि कच्चा तेल 75 डॉलर से ऊपर लेकिन 90 डॉलर से नीचे बना रहे। इसी कारण तेल की कीमतों के अनुसार बाजार में खबरों का रुख भी बदलता रहता है।
क्या 23,600 निफ्टी का नया मजबूत बेस बन सकता है?
अनुज सिंघल के अनुसार फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि बाजार ने पूरी तरह बॉटम बना लिया है, लेकिन 23,600 का स्तर निफ्टी के लिए मजबूत आधार बनता हुआ दिखाई दे रहा है।
उन्होंने बताया कि इससे पहले निफ्टी ने 22,200 और फिर 23,100 के स्तर पर मजबूत बॉटम बनाया था। यदि इस बार 23,600 का स्तर कायम रहता है तो बाजार में एक और Higher Bottom बनेगा, जो लंबी अवधि की तेजी के लिए सकारात्मक संकेत होगा।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान बाजार बेहद अस्थिर है और हर सप्ताह रणनीति बदलने की जरूरत पड़ सकती है। पिछले सप्ताह जहां ब्रेकआउट फेल हुआ, वहीं उसके बाद ब्रेकडाउन भी टिक नहीं पाया।
निवेशकों के लिए क्यों है यह शानदार मौका?
एक्सपर्ट का मानना है कि मौजूदा समय धैर्य रखने वाले निवेशकों के लिए सबसे अच्छा दौर साबित हो सकता है। बाजार में गिरावट के कारण कई मजबूत कंपनियों के शेयर आकर्षक वैल्यूएशन पर उपलब्ध हैं।
उन्होंने सलाह दी कि निवेशकों को निम्न सेक्टरों में हर गिरावट पर धीरे-धीरे निवेश बढ़ाना चाहिए—
- ऑटो सेक्टर
- बैंकिंग सेक्टर
- एनबीएफसी (NBFC)
- रियल एस्टेट
- कच्चे तेल की वजह से गिरे क्वालिटी शेयर
ऐसे शेयरों में एकमुश्त निवेश करने के बजाय SIP या चरणबद्ध खरीदारी बेहतर रणनीति हो सकती है।
ट्रेडर्स के लिए क्या है रणनीति?
अनुज सिंघल का कहना है कि फिलहाल ट्रेडिंग और निवेश की रणनीति अलग-अलग रखनी होगी।
बाजार फिलहाल एक रेंज में कारोबार कर रहा है। ऐसे में ट्रेडर्स को हर ब्रेकआउट और ब्रेकडाउन पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए।
उनके अनुसार—
- ब्रेकआउट दिखे तो कॉन्ट्रा शॉर्ट की तैयारी रखें।
- ब्रेकडाउन दिखे तो कॉन्ट्रा लॉन्ग की रणनीति अपनाई जा सकती है।
- जब तक रेंज निर्णायक रूप से नहीं टूटती, तब तक बड़ी ट्रेंडिंग चाल की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
- हर ट्रेड में सख्त स्टॉप लॉस का पालन करना बेहद जरूरी है।
निफ्टी के लिए अहम स्तर
आज के कारोबार के लिए अनुज सिंघल ने निफ्टी के प्रमुख स्तर बताए हैं।
रेजिस्टेंस
- पहला रेजिस्टेंस: 23,900–23,950
- बड़ा रेजिस्टेंस: 24,050–24,150
सपोर्ट
- पहला सपोर्ट: 23,750–23,800
- मजबूत सपोर्ट: 23,650–23,700
यदि निफ्टी सुबह 10:30 बजे तक 23,900–23,950 के ऊपर टिक जाता है तो ट्रेडर्स अपनी पोजीशन बनाए रख सकते हैं और स्टॉप लॉस को दिन के निचले स्तर पर शिफ्ट कर सकते हैं। वहीं यदि इसी स्तर पर रिजेक्शन मिलता है तो सीमित बिकवाली की रणनीति अपनाई जा सकती है।
बैंक निफ्टी के लिए अहम रणनीति
बैंक निफ्टी में फिलहाल तेजी का रुख बना हुआ है।
- शुरुआती लक्ष्य: 57,400–57,500
- इसके ऊपर निकलने पर बड़ी तेजी संभव।
- पहला रेजिस्टेंस: 57,000–57,200
- मजबूत सपोर्ट: 56,500–56,600
यदि 57,400–57,500 के जोन पर रिजेक्शन मिलता है तो वहां से शॉर्ट ट्रेड का मौका बन सकता है।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए संदेश
मौजूदा बाजार उतार-चढ़ाव से भरा जरूर है, लेकिन इतिहास बताता है कि ऐसे दौर में धैर्य रखने वाले निवेशकों को भविष्य में बेहतर रिटर्न मिलता है। यदि आपके पोर्टफोलियो का नजरिया लंबी अवधि का है तो मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में गिरावट पर चरणबद्ध निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है। वहीं शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को अत्यधिक जोखिम लेने से बचना चाहिए और केवल तय स्टॉप लॉस के साथ ही ट्रेड करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें दिए गए बाजार संबंधी विचार एक्सपर्ट के निजी विचार हैं। NewsJagran.in या इसका प्रबंधन किसी भी निवेश निर्णय के लिए जिम्मेदार नहीं है। शेयर बाजार में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।


