भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए अपने एडवांस्ड प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) को “क्रिटिकैलिटी” तक पहुंचा दिया है। यह उपलब्धि देश के नागरिक परमाणु कार्यक्रम (Civil Nuclear Programme) के दूसरे चरण में ऐतिहासिक मानी जा रही है।
इस सफलता पर Narendra Modi ने इसे “गर्व का क्षण” बताते हुए वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी।
क्या है ‘क्रिटिकैलिटी’ और PFBR?
क्रिटिकैलिटी का मतलब है कि रिएक्टर में न्यूक्लियर चेन रिएक्शन स्थिर रूप से शुरू हो चुका है — यानी अब वह ऊर्जा उत्पादन के लिए तैयार है।
PFBR की खासियत:
- अपनी खपत से ज्यादा फ्यूल (ईंधन) पैदा करने की क्षमता
- तेज न्यूट्रॉन तकनीक पर आधारित
- भविष्य के लिए थोरियम उपयोग का रास्ता तैयार
- उच्च दक्षता और बेहतर ऊर्जा उत्पादन
किन संस्थानों की रही भूमिका?
इस प्रोजेक्ट में भारत के प्रमुख परमाणु संस्थानों का अहम योगदान रहा:
- Indira Gandhi Centre for Atomic Research (IGCAR)
- Department of Atomic Energy (DAE)
कलपक्कम (तमिलनाडु) स्थित यह रिएक्टर भारत की स्वदेशी तकनीक का शानदार उदाहरण है।
PM मोदी का बयान
Today, India takes a defining step in its civil nuclear journey, advancing the second stage of its nuclear programme.
The indigenously designed and built Prototype Fast Breeder Reactor at Kalpakkam has attained criticality.
This advanced reactor, capable of producing more fuel…
— Narendra Modi (@narendramodi) April 6, 2026 Narendra Modi ने सोशल मीडिया पर कहा:
“आज भारत अपनी सिविल न्यूक्लियर यात्रा में एक अहम कदम उठा रहा है… यह रिएक्टर हमारी वैज्ञानिक क्षमता और इंजीनियरिंग ताकत का प्रमाण है।”
उन्होंने इसे भारत के परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण की बड़ी सफलता बताया।
थोरियम मिशन में बड़ी छलांग
भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े थोरियम भंडार में से एक है।
PFBR की सफलता से:
- तीसरे चरण में थोरियम आधारित रिएक्टर का रास्ता खुलेगा
- लंबे समय तक सस्टेनेबल न्यूक्लियर एनर्जी संभव होगी
- भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और मजबूत होगी
वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति
इस उपलब्धि के साथ:
- भारत रूस के बाद
व्यावसायिक स्तर पर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित करने वाला
दुनिया का दूसरा देश बनने की राह पर है
यह भारत की तकनीकी क्षमता और वैश्विक पहचान को और मजबूत करेगा।
भारत को क्या मिलेगा फायदा?
ऊर्जा सुरक्षा
- बिजली उत्पादन में स्थिरता
- आयातित ईंधन पर निर्भरता कम
क्लीन एनर्जी
- कम कार्बन उत्सर्जन
- पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प
टेक्नोलॉजी लीडरशिप
- न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता
- वैश्विक सहयोग के नए अवसर
निष्कर्ष
कलपक्कम में PFBR का “क्रिटिकैलिटी” तक पहुंचना सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की ऊर्जा रणनीति का मजबूत आधार है।
यह सफलता भारत को न सिर्फ ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि दुनिया के सामने एक न्यूक्लियर पावरहाउस के रूप में स्थापित करेगी।
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