नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने बुधवार को छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने साफ कहा कि यदि छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए गए, तो उनकी पार्टी एक बार फिर बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करेगी। दिपके का यह बयान ऐसे समय आया है, जब लोकसभा ने ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ को ध्वनि मत से पारित कर दिया है। सरकार का दावा है कि इस कानून का उद्देश्य पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
लोकसभा में पास हुआ पेपर लीक संशोधन विधेयक
लोकसभा में बुधवार को पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा हुई। चर्चा के दौरान विपक्ष ने कई प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए सदन से वॉकआउट किया। वहीं, विपक्ष के नेता राहुल गांधी की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर की गई टिप्पणी पर भी सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला।
हंगामे के बीच विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। सरकार का कहना है कि इस संशोधन के जरिए पेपर लीक, परीक्षा में धोखाधड़ी और संगठित परीक्षा अपराधों पर पहले से अधिक सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।
सिर्फ कानून बदलने से नहीं होगा समाधान: अभिजीत दिपके
विधेयक पारित होने के बाद अभिजीत दिपके ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केवल कानून को सख्त बना देने से समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए केवल कानूनी बदलाव पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि व्यवस्था और लोगों की नीयत में भी बदलाव जरूरी है।
दिपके ने कहा कि देश में लगातार सुधार किए जा रहे हैं, लेकिन यदि भ्रष्ट मानसिकता और गलत इरादे नहीं बदलेंगे तो ऐसे अपराध पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाएंगे। उनके मुताबिक, कानून तभी प्रभावी साबित होगा जब उसका निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पालन भी किया जाए।
फास्ट-ट्रैक कोर्ट की सुनवाई पर भी उठाए सवाल
अभिजीत दिपके ने पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए गठित फास्ट-ट्रैक कोर्ट की कार्यवाही पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि पहली सुनवाई इसलिए टालनी पड़ी क्योंकि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का वकील अदालत में मौजूद नहीं था।
उन्होंने कहा कि यदि जांच एजेंसियां और सरकारी पक्ष समय पर अदालत में उपस्थित नहीं होंगे, तो मामलों के जल्द निपटारे का उद्देश्य कमजोर पड़ जाएगा। उनके अनुसार, इससे जांच प्रक्रिया और न्यायिक व्यवस्था की गति पर भी सवाल खड़े होते हैं।
FIR वापस नहीं हुई तो फिर होगा आंदोलन
अभिजीत दिपके ने दो टूक कहा कि यदि छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली गईं तो कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अपना आंदोलन दोबारा शुरू करेगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन में शामिल छात्रों को लगातार परेशान किया जा रहा है। उनका कहना था कि यदि यह स्थिति जारी रही तो पार्टी पहले से अधिक बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेगी।
दिपके ने कहा कि छात्रों की आवाज को दबाने की बजाय सरकार को उनकी शिकायतों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
‘धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से खत्म नहीं होगा गुस्सा’
अभिजीत दिपके ने यह भी कहा कि सरकार को यह नहीं मानना चाहिए कि केवल पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से लोगों का गुस्सा खत्म हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि छात्रों और आम लोगों में अब भी परीक्षा प्रणाली को लेकर नाराजगी बनी हुई है। यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया और छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस नहीं लिया, तो आने वाले समय में पहले से बड़ा जनआंदोलन देखने को मिल सकता है।
क्या है पूरा मामला?
हाल के महीनों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे। कई छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों ने निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग उठाई थी।
इसी बीच सरकार ने परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को संसद में पेश किया, जिसे अब लोकसभा की मंजूरी मिल चुकी है। हालांकि, विपक्ष और कई छात्र संगठनों का कहना है कि केवल कानून सख्त करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित करनी होगी।
निष्कर्ष
अभिजीत दिपके के ताजा बयान से साफ है कि पेपर लीक और छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर का मुद्दा अभी शांत नहीं हुआ है। एक ओर सरकार नए कानून के जरिए परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर छात्र संगठन और आंदोलनकारी समूह न्यायिक कार्रवाई, निष्पक्ष जांच और छात्रों को राहत देने की मांग पर अड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना रह सकता है।


