नई दिल्ली: विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस (World Nature Conservation Day) के अवसर पर उद्योगपति अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता ग्रुप ने पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास (Sustainability) के क्षेत्र में अपनी बड़ी उपलब्धियां साझा की हैं। कंपनी का दावा है कि वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के दौरान उसने 400 करोड़ यूनिट स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) का उत्पादन और उपयोग किया, जिससे FY21 के बाद से अब तक करीब 3.6 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन (CO₂ Emissions) कम करने में मदद मिली।
कंपनी के अनुसार, यह उपलब्धि करीब 80 लाख यात्री वाहनों को एक वर्ष के लिए सड़कों से हटाने के बराबर है। यह आंकड़ा भारत में औद्योगिक क्षेत्र द्वारा स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग में 450% की रिकॉर्ड बढ़ोतरी
वेदांता ने बताया कि FY21 की तुलना में FY26 में नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के उपयोग में लगभग 450% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके साथ ही कंपनी के धातु एवं खनन (Metals & Mining) कारोबार में कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता (Carbon Intensity) में करीब 14% की कमी आई है।
कंपनी ने वर्ष 2050 या उससे पहले नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन (Net Zero Emissions) हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए वेदांता चार प्रमुख रणनीतियों पर तेजी से काम कर रही है।
नेट-जीरो लक्ष्य के लिए कंपनी की प्रमुख रणनीतियां
- औद्योगिक परिचालन में ऊर्जा दक्षता बढ़ाना
- स्वच्छ ईंधन (Clean Fuel) का अधिक उपयोग
- नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी लगातार बढ़ाना
- प्रकृति आधारित कार्बन कटौती (Nature-Based Carbon Removal) परियोजनाओं में निवेश
इन पहलों का उद्देश्य उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना है।
जल संरक्षण पर भी बड़ा फोकस
वेदांता ने केवल स्वच्छ ऊर्जा ही नहीं बल्कि जल संरक्षण (Water Conservation) के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। कंपनी ने देशभर में 100 से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं विकसित की हैं।
इनमें शामिल हैं:
- वर्षा जल संग्रहण (Rainwater Harvesting) सिस्टम
- चेक डैम
- जल संग्रहण तालाब
- पुराने तालाबों का पुनर्जीवन
- भूजल स्तर बढ़ाने के लिए जलग्रहण क्षेत्रों का संरक्षण
कंपनी का कहना है कि इन परियोजनाओं से स्थानीय समुदायों को लंबे समय तक जल उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिल रही है।
40 लाख से अधिक पौधे लगाए
हरित आवरण बढ़ाने के लिए वेदांता ने 2021 से अब तक 40 लाख से अधिक पौधों का रोपण किया है। कंपनी कई राज्यों में मियावाकी (Miyawaki) मॉडल के तहत घने और तेजी से विकसित होने वाले जंगल तैयार कर रही है।
मियावाकी तकनीक कम जगह में अधिक घनत्व वाले जंगल विकसित करने के लिए जानी जाती है, जिससे जैव विविधता बढ़ती है और कार्बन अवशोषण की क्षमता भी अधिक होती है।
जैव विविधता संरक्षण पर भी काम
वेदांता अपने विभिन्न प्रोजेक्ट क्षेत्रों में जैव विविधता (Biodiversity) का वैज्ञानिक अध्ययन कर संरक्षण योजनाएं लागू कर रही है। कंपनी इन परियोजनाओं की निगरानी आधुनिक तकनीकों की मदद से करती है।
इसके तहत:
- GIS मैपिंग के जरिए निगरानी
- स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा मूल्यांकन
- स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी
- पर्यावरणीय प्रभाव का नियमित आकलन
इन प्रयासों का उद्देश्य औद्योगिक विकास और प्राकृतिक संसाधनों के बीच संतुलन बनाए रखना है।
ESG रणनीति के तहत टिकाऊ विकास
वेदांता की पूरी पहल उसकी ESG (Environment, Social & Governance) रणनीति का हिस्सा है। कंपनी का कहना है कि भविष्य में उद्योगों की सफलता केवल आर्थिक प्रदर्शन से नहीं, बल्कि पर्यावरण और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी से भी तय होगी।
स्वच्छ ऊर्जा, जल संरक्षण, वृक्षारोपण और जैव विविधता संरक्षण जैसे क्षेत्रों में निवेश कर वेदांता भारत के हरित विकास (Green Growth) में योगदान देने का लक्ष्य रखती है।
विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस पर कंपनी का संदेश
विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस के अवसर पर वेदांता ने कहा कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों साथ-साथ चल सकते हैं। कंपनी का मानना है कि स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और स्थानीय समुदायों के सहयोग से भारत को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल भविष्य की ओर ले जाया जा सकता है।


