Asian Markets Today: गुरुवार को एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला लेकिन ज्यादातर सकारात्मक कारोबार देखने को मिला। जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान और हांगकांग के बाजारों में खरीदारी लौटी, जबकि सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स हल्की कमजोरी के साथ कारोबार करता दिखा। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त टिप्पणी और ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखने के संकेतों ने अमेरिकी शेयर और बॉन्ड बाजारों का मूड खराब कर दिया। इसके चलते डाओ जोंस 1,100 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि S&P 500 और नैस्डैक में भी डेढ़ फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
एशियाई बाजारों में कैसी रही शुरुआत?
गुरुवार सुबह एशियाई बाजारों में निवेशकों का रुख सकारात्मक रहा।
- जापान का निक्केई 225 1.38% की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा।
- दक्षिण कोरिया का कोस्पी पिछले सत्र की भारी गिरावट के बाद 2.95% उछल गया।
- ताइवान वेटेड इंडेक्स 1.50% की मजबूती के साथ 40,639.43 के स्तर पर पहुंच गया।
- हांगकांग का हैंगसेंग 0.14% की बढ़त के साथ 25,826 के आसपास कारोबार करता दिखा।
- सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स 0.64% की कमजोरी के साथ कारोबार कर रहा था।
विशेषज्ञों का मानना है कि वॉल स्ट्रीट में आई तेज गिरावट के बावजूद एशियाई बाजारों में रिकवरी निवेशकों की चुनिंदा खरीदारी और बेहतर कॉरपोरेट नतीजों की उम्मीद के कारण देखने को मिली।
वॉल स्ट्रीट में क्यों आई बड़ी गिरावट?
बुधवार के नियमित कारोबारी सत्र में अमेरिकी शेयर बाजारों में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली।
- डाओ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 1,153.18 अंक यानी 2.19% टूट गया। यह अप्रैल 2025 के बाद एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट रही।
- S&P 500 में 1.52% की गिरावट दर्ज की गई।
- नैस्डैक कंपोजिट 1.74% फिसल गया और अपने इंट्राडे रिकॉर्ड हाई से 10% से ज्यादा नीचे बंद हुआ।
हालांकि, बाजार बंद होने के बाद अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स में कुछ सुधार देखने को मिला।
- डाओ जोंस फ्यूचर्स 158 अंक (0.3%) चढ़े।
- S&P 500 फ्यूचर्स में 0.4% की बढ़त रही।
- नैस्डैक-100 फ्यूचर्स 0.7% मजबूत हुए।
US फेडरल रिजर्व ने क्या फैसला लिया?
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी दो दिवसीय FOMC बैठक के बाद उम्मीद के मुताबिक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया।
मुख्य बातें:
- बेंचमार्क ब्याज दर 3.50% से 3.75% के दायरे में बरकरार रखी गई।
- यह लगातार पांचवीं बैठक रही, जिसमें दरों को स्थिर रखा गया।
- फेड ने महंगाई और आर्थिक गतिविधियों पर करीबी नजर रखने की बात दोहराई।
- महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक विकास के अनुमान में भी कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया।
हालांकि, फेड अधिकारियों की सख्त टिप्पणियों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी कि ब्याज दरें अपेक्षा से अधिक समय तक ऊंची रह सकती हैं। इसी वजह से अमेरिकी बॉन्ड यील्ड फिर से 4.7% के करीब पहुंच गई।
अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ा
बाजार की चिंता केवल फेड तक सीमित नहीं रही। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भी निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया।
रिपोर्टों के अनुसार:
- अमेरिका ने ईरान से जुड़े ठिकानों पर नए सैन्य हमले किए।
- अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि कार्रवाई अमेरिकी सैनिकों पर हमले की कोशिशों के जवाब में की गई।
- मिस्र के डमिएटा बंदरगाह पर अमेरिका के स्वामित्व वाले गैस स्टोरेज टैंकर पर ड्रोन हमला हुआ।
- पूर्वी इराक में अमेरिका और सऊदी अरब ने ईरान समर्थित समूहों के खिलाफ कार्रवाई की।
- ईरान की ओर से जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइलें दागे जाने की भी खबरें सामने आईं।
इन घटनाओं ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है।
कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी
पिछले कारोबारी सत्र में जोरदार उछाल के बाद गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतों में कुछ मुनाफावसूली देखने को मिली।
- ब्रेंट क्रूड 1.29 डॉलर यानी 1.42% गिरकर 89.45 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
- WTI क्रूड 0.66% फिसलकर 83.90 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।
बुधवार को ब्रेंट में 7.91% और WTI में 6.56% की तेज बढ़त दर्ज की गई थी। विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल तेल टैंकरों की आवाजाही जारी रहने से सप्लाई को लेकर तत्काल बड़ी चिंता नहीं दिख रही है, जिसके चलते कीमतों में कुछ नरमी आई।
सोने में फिर लौटी चमक
सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर सोने में भी हल्की खरीदारी देखने को मिली।
- स्पॉट गोल्ड 0.4% बढ़कर 4,080.38 डॉलर प्रति औंस पहुंच गया।
- अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 1.1% की बढ़त के साथ 4,078 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करते दिखे।
हालांकि, बढ़ती ऊर्जा कीमतों और ऊंची ब्याज दरों की आशंकाओं के चलते निवेशक अभी भी सतर्क बने हुए हैं।
भारतीय बाजार पर क्या रहेगा असर?
वैश्विक संकेतों को देखें तो भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत उतार-चढ़ाव भरी रह सकती है। एक ओर एशियाई बाजारों में रिकवरी सकारात्मक संकेत दे रही है, वहीं वॉल स्ट्रीट की बड़ी गिरावट, ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव निवेशकों की धारणा पर दबाव बना सकता है। ऐसे में निवेशकों की नजर आज विदेशी निवेशकों के रुख, रुपये की चाल और कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी।
डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। NewsJagran.in किसी भी निवेश की सलाह नहीं देता। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।


