बड़ी कॉरपोरेट डील से जुड़े मामले में Supreme Court of India ने सोमवार को अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने Adani Group की Jaiprakash Associates Ltd (JAL) के अधिग्रहण प्रक्रिया में दखल देने से इनकार कर दिया।
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क्या है कोर्ट का फैसला?
चीफ जस्टिस Surya Kant और जस्टिस Joymalya Bagchi की बेंच ने कहा कि:
- NCLAT के आदेश में हस्तक्षेप की जरूरत नहीं
- मामले की अंतिम सुनवाई जल्द पूरी की जाए
- JAL की मॉनिटरिंग कमेटी कोई बड़ा फैसला बिना NCLAT की अनुमति के न ले
क्या है पूरा मामला?
- Adani Enterprises Ltd ने ₹14,535 करोड़ में Jaiprakash Associates Ltd को खरीदने की बोली जीती
- यह अधिग्रहण दिवालिया प्रक्रिया (Insolvency) के तहत हो रहा है
Vedanta ने क्यों दी चुनौती?
इस डील को Vedanta Ltd ने चुनौती दी है।
- Vedanta भी JAL को खरीदने की दौड़ में शामिल थी
- कंपनी ने NCLT और NCLAT के फैसलों के खिलाफ अपील की
- आरोप लगाया कि रेजोल्यूशन प्लान और उसकी मंजूरी में खामियां हैं
NCLAT और NCLT का रुख
- National Company Law Appellate Tribunal ने Adani की बोली पर रोक लगाने से इनकार किया
- इससे पहले National Company Law Tribunal ने भी Adani Group की बोली को मंजूरी दे दी थी
अब NCLAT 10 अप्रैल से इस मामले की अंतिम सुनवाई शुरू करेगा।
SC ने क्या निर्देश दिए?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा:
- सभी पक्ष (Adani और Vedanta) अपने तर्क NCLAT के सामने रखें
- NCLAT मामले का जल्द निपटारा करे
- मॉनिटरिंग कमेटी बड़े फैसले NCLAT की अनुमति के बिना न ले
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से साफ है कि फिलहाल Adani Group की JAL डील पर रोक नहीं लगेगी। अब इस हाई-प्रोफाइल कॉरपोरेट विवाद का अंतिम फैसला NCLAT के हाथ में है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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