नई दिल्ली: भारत में स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) को बढ़ावा देने की दिशा में टाटा समूह बड़ा कदम उठाने जा रहा है। समूह की प्रमुख बिजली कंपनी टाटा पावर (Tata Power) ने मध्य प्रदेश, ओडिशा और गुजरात में संभावित न्यूक्लियर पावर प्लांट स्थापित करने के लिए साइट स्टडी शुरू कर दी है। कंपनी का कहना है कि अगले छह महीनों में डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार होने की उम्मीद है, जबकि नए न्यूक्लियर नियम लागू होने के बाद करीब 12 महीनों के भीतर टेक्नोलॉजी और प्रोजेक्ट मॉडल पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।
यह कदम भारत के निजी क्षेत्र की न्यूक्लियर ऊर्जा में बढ़ती भागीदारी का संकेत माना जा रहा है।
मुख्य बातें
- टाटा पावर ने तीन राज्यों में न्यूक्लियर प्लांट के लिए साइट स्टडी शुरू की।
- मध्य प्रदेश, ओडिशा और गुजरात में मिट्टी व जमीन की जांच जारी।
- अगले 6 महीनों में DPR तैयार होने की उम्मीद।
- NPCIL के रिएक्टर डिजाइन को प्राथमिकता देने की योजना।
- नए न्यूक्लियर नियम लागू होने के बाद टेक्नोलॉजी पर अंतिम फैसला।
तीन राज्यों में शुरू हुई जियो-टेक्निकल स्टडी
कंपनी के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर प्रवीर सिन्हा ने बताया कि कंपनी ने संभावित परियोजनाओं के लिए जमीन और मिट्टी से जुड़ी जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। इसके तहत जियो-टेक्निकल स्टडी की जा रही है ताकि यह आकलन किया जा सके कि संबंधित स्थान न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए उपयुक्त हैं या नहीं।
उन्होंने कहा कि कंपनी सिर्फ नियमों का इंतजार नहीं कर रही, बल्कि समानांतर रूप से तकनीकी और भौगोलिक तैयारियां भी कर रही है ताकि मंजूरी मिलने के बाद परियोजना में तेजी लाई जा सके।
नए न्यूक्लियर नियमों का इंतजार
प्रवीर सिन्हा के मुताबिक, सरकार द्वारा निजी कंपनियों के लिए जारी किए जाने वाले नए न्यूक्लियर नियम बेहद अहम होंगे। इन्हीं नियमों के आधार पर यह तय होगा कि टेक्नोलॉजी कौन-सी होगी, ईंधन की व्यवस्था कैसे होगी, परमिट और नियामकीय मंजूरी की प्रक्रिया क्या होगी और निजी कंपनियों की भूमिका कितनी होगी।
उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले 3 से 5 महीनों में नियमों पर स्पष्टता आ जाएगी। तब तक कंपनी अपनी शुरुआती तैयारियां काफी हद तक पूरी कर चुकी होगी।
अगले 12 महीनों में होगा बड़ा फैसला
टाटा पावर फिलहाल 220 मेगावाट और 700 मेगावाट क्षमता वाले रिएक्टर विकल्पों का अध्ययन कर रही है। कंपनी यह मूल्यांकन करेगी कि कौन-सा मॉडल लागत, ईंधन दक्षता, निर्माण अवधि और संचालन के लिहाज से अधिक उपयुक्त रहेगा।
कंपनी का मानना है कि अगले 12 महीनों के भीतर तकनीकी और आर्थिक विश्लेषण पूरा होने के बाद अंतिम निर्णय लिया जा सकेगा।
NPCIL के डिजाइन को क्यों मिल रही प्राथमिकता?
टाटा पावर फिलहाल सरकारी कंपनी न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) के रिएक्टर डिजाइन को प्राथमिकता दे रही है।
इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं—
- पहले से नियामकीय मंजूरी मिलने का फायदा।
- नई विदेशी तकनीकों की तुलना में कम समय में परियोजना शुरू होने की संभावना।
- लागत अपेक्षाकृत कम रहने की उम्मीद।
- भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप विकसित और परीक्षण किया गया डिजाइन।
कंपनी का मानना है कि शुरुआती चरण में भारतीय तकनीक के साथ आगे बढ़ना अधिक व्यावहारिक और आर्थिक रूप से लाभदायक रहेगा।
मंजूरी की प्रक्रिया होगी आसान
NPCIL के रिएक्टर पहले से ही एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड (AERB) से मंजूर हैं। ऐसे में यदि इन्हीं डिजाइन का उपयोग किया जाता है तो नई तकनीक के मुकाबले मंजूरी मिलने में कम समय लग सकता है।
यही वजह है कि टाटा पावर फिलहाल इसी मॉडल को सबसे मजबूत विकल्प मान रही है।
सोलर मॉड्यूल एक्सपोर्ट पर भी फोकस
न्यूक्लियर परियोजना के साथ-साथ कंपनी अपने सोलर कारोबार का भी विस्तार कर रही है। टाटा पावर की योजना FY27 के अंत तक यूरोप और अमेरिका को सोलर मॉड्यूल निर्यात शुरू करने की है।
कंपनी का लक्ष्य हर वर्ष कम से कम 500 मेगावाट सोलर मॉड्यूल एक्सपोर्ट करना है। इससे वैश्विक बाजार में कंपनी की मौजूदगी और मजबूत होने की उम्मीद है।
भारत के ऊर्जा सेक्टर के लिए क्यों अहम है यह कदम?
भारत आने वाले वर्षों में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों पर तेजी से निवेश कर रहा है। सौर और पवन ऊर्जा के साथ-साथ न्यूक्लियर ऊर्जा को भी बेसलोड बिजली का भरोसेमंद स्रोत माना जाता है।
यदि टाटा पावर की यह परियोजना आगे बढ़ती है तो निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी, नई तकनीक और निवेश आएगा तथा देश के ऊर्जा मिश्रण (Energy Mix) में न्यूक्लियर पावर की हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिल सकती है।


