UPI Payment MDR Rule: दिल्ली के चांदनी चौक में कुछ दुकानदारों द्वारा UPI पेमेंट के बोर्ड हटाने के बाद डिजिटल पेमेंट सिस्टम में मर्चेंट चार्ज को लेकर बहस तेज हो गई है। विवाद खास तौर पर ₹2,000 से ज्यादा के कुछ मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर लागू होने वाले MDR यानी Merchant Discount Rate को लेकर है। सरकार का कहना है कि नए ढांचे में ₹2,000 तक के मर्चेंट UPI भुगतान शुल्क मुक्त रहेंगे और करीब 96% मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर इसका असर नहीं पड़ेगा।
भारत में UPI लंबे समय से छोटे-बड़े कारोबारियों के लिए भुगतान का एक प्रमुख माध्यम बन चुका है। किराना दुकान से लेकर बड़े स्टोर, रेस्टोरेंट और अन्य कारोबारों में ग्राहक QR कोड स्कैन करके सीधे भुगतान करते हैं। ऐसे में UPI भुगतान पर किसी भी तरह के मर्चेंट चार्ज की चर्चा व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
चांदनी चौक में दुकानदारों ने क्यों हटाए UPI बोर्ड?
UPI पर मर्चेंट फीस को लेकर व्यापारियों और ग्राहकों में नाराजगी बढ़ी। विरोध में दुकानदार ने UPI भुगतान को बढ़ावा देने वाले पेमेंट बोर्ड दुकान से हटा दिए।#UPI #DigitalPayments #MerchantFee #OnlinePayments pic.twitter.com/6DItyYRqFY
— NBT Hindi News (@NavbharatTimes) September 16, 2026 दिल्ली के चांदनी चौक में कुछ दुकानदारों ने अपनी दुकानों पर लगे UPI भुगतान से जुड़े बोर्ड हटाए हैं। इस घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें एक दुकानदार दुकान से UPI बोर्ड हटाता दिखाई दे रहा है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब ₹2,000 से अधिक के कुछ मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर MDR को लेकर व्यापारियों के बीच चिंता जताई जा रही है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि कुछ दुकानदारों द्वारा बोर्ड हटाने की घटना को पूरे देश के व्यापारियों की राय नहीं माना जा सकता।
विवाद का मुख्य मुद्दा यह है कि बड़े मूल्य के कुछ कारोबारी डिजिटल भुगतान पर शुल्क लगने की स्थिति में उनकी लागत बढ़ सकती है। व्यापारियों का एक वर्ग इसे अतिरिक्त खर्च के तौर पर देख रहा है।
MDR क्या होता है?
MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले मर्चेंट ट्रांजैक्शन से जुड़ा होता है। यह सीधे ग्राहक से वसूला जाने वाला सामान्य UPI चार्ज नहीं है।
UPI के मामले में भुगतान पूरा होने के पीछे कई संस्थाएं और तकनीकी प्रणालियां काम करती हैं। बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और अन्य संबंधित पक्ष इस पेमेंट इकोसिस्टम का हिस्सा होते हैं। MDR से मिलने वाला शुल्क इसी व्यवस्था से जुड़े पक्षों के बीच वितरित हो सकता है।
इसलिए अगर किसी ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि ग्राहक के UPI ऐप से भुगतान करते समय उसके खाते से अलग से MDR काट लिया जाएगा।
₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर क्या होगा?
नए ढांचे को लेकर सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि ₹2,000 तक के मर्चेंट UPI भुगतान पर MDR नहीं लगेगा।
इसके अलावा व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P (Person-to-Person) UPI ट्रांजैक्शन पर भी कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा।
सरकार के मुताबिक करीब 96% मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे। इसका मतलब है कि रोजमर्रा की बड़ी संख्या में होने वाली छोटी राशि की डिजिटल पेमेंट पहले की तरह शुल्क मुक्त व्यवस्था में जारी रहेगी।
उदाहरण के लिए अगर किसी ग्राहक ने किसी दुकान पर ₹500, ₹1,000 या ₹2,000 का UPI भुगतान किया, तो इस सीमा के भीतर भुगतान पर MDR लागू नहीं होगा।
फिर ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर विवाद क्यों?
विवाद की वजह ₹2,000 से ज्यादा के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होने की संभावना है।
बड़े कारोबार में एक ही UPI ट्रांजैक्शन की रकम हजारों या लाखों रुपये तक पहुंच सकती है। ऐसे में व्यापारी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यदि इन ट्रांजैक्शन पर शुल्क देना पड़ा तो उनके कुल डिजिटल पेमेंट खर्च में बढ़ोतरी हो सकती है।
मसलन, कोई ग्राहक किसी कारोबारी को ₹25,000 का भुगतान UPI से करता है। यदि उस श्रेणी के ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होता है, तो व्यापारी के लिए भुगतान स्वीकार करने की लागत पैदा होगी। यही वजह है कि बड़े मर्चेंट और कारोबारियों के लिए MDR का मुद्दा छोटे मूल्य के UPI भुगतान की तुलना में ज्यादा महत्वपूर्ण है।
हालांकि, हर ₹2,000 से ऊपर के UPI भुगतान को एक समान तरीके से देखना सही नहीं होगा। MDR का दायरा और लागू होने की शर्तें संबंधित भुगतान व्यवस्था और मर्चेंट की श्रेणी पर निर्भर करती हैं।
क्या ग्राहक से MDR लिया जाएगा?
सरकार के स्पष्टीकरण के मुताबिक MDR ग्राहक से लिया जाने वाला कोई UPI टैक्स नहीं है।
UPI से भुगतान करने वाले ग्राहक को सामान्य तौर पर यह नहीं कहा गया है कि ₹2,000 से ज्यादा का भुगतान करने पर उसे अलग से MDR देना होगा। MDR मुख्य रूप से मर्चेंट और पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़ी लागत का विषय है।
हालांकि व्यापारियों की चिंता यह है कि अगर उनकी लागत बढ़ती है तो भविष्य में वे कीमत, मार्जिन या भुगतान के दूसरे विकल्पों के जरिए इस अतिरिक्त लागत को संभालने की कोशिश कर सकते हैं।
यही बिंदु इस पूरी बहस को केवल पेमेंट कंपनियों और व्यापारियों का मुद्दा नहीं रहने देता, बल्कि इसे ग्राहकों के लिए भी महत्वपूर्ण बनाता है।
सरकार का तर्क क्या है?
सरकार की ओर से नए ढांचे के पीछे UPI इकोसिस्टम को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने की जरूरत बताई गई है।
UPI के संचालन में तकनीकी ढांचा, साइबर सुरक्षा, बैंकिंग नेटवर्क, सर्वर क्षमता और लगातार बढ़ते ट्रांजैक्शन को संभालने वाली प्रणालियों पर खर्च होता है। UPI का इस्तेमाल जितना बढ़ता है, इस पूरे नेटवर्क को मजबूत और सुरक्षित बनाए रखना उतना ही महत्वपूर्ण हो जाता है।
सरकार के मुताबिक MDR से जुड़े ढांचे का उद्देश्य इसी पेमेंट इकोसिस्टम की आर्थिक स्थिरता को समर्थन देना है। साथ ही छोटे मूल्य के अधिकांश मर्चेंट ट्रांजैक्शन को शुल्क से बाहर रखा गया है।
व्यापारियों को सबसे बड़ी चिंता किस बात की है?
व्यापारियों की मुख्य चिंता लागत बढ़ने को लेकर है।
आज UPI कई कारोबारियों के लिए ग्राहकों से भुगतान लेने का आसान माध्यम है। अगर बड़े भुगतान पर MDR जैसी लागत जुड़ती है, तो कारोबारी को हर डिजिटल भुगतान पर मिलने वाली वास्तविक रकम प्रभावित हो सकती है।
व्यापारियों के सामने मुख्य रूप से तीन सवाल हैं:
- बड़े UPI भुगतान पर वास्तविक लागत कितनी होगी?
- इस लागत का भुगतान व्यापारी खुद करेगा या इसे किसी अन्य तरीके से संभालेगा?
- लंबे समय में इसका असर वस्तुओं की कीमत और कारोबार के मार्जिन पर पड़ेगा या नहीं?
इन सवालों के जवाब कारोबार के आकार, भुगतान की श्रेणी और MDR की वास्तविक दर पर निर्भर करेंगे।
क्या इससे UPI का इस्तेमाल कम हो जाएगा?
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि MDR व्यवस्था के कारण UPI का इस्तेमाल कितनी मात्रा में बदलेगा।
सरकार के अनुसार लगभग 96% मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन प्रभावित नहीं होंगे। ऐसे में छोटे मूल्य के रोजमर्रा के भुगतान पर तत्काल सीधा असर सीमित रहने की बात कही गई है।
दूसरी तरफ बड़े कारोबारियों के लिए स्थिति अलग हो सकती है। जहां बड़ी रकम के डिजिटल भुगतान ज्यादा होते हैं, वहां शुल्क की लागत कारोबारियों के फैसलों को प्रभावित कर सकती है।
इसका वास्तविक प्रभाव देखने के लिए यह देखना जरूरी होगा कि व्यापारी नए शुल्क ढांचे को किस तरह अपनाते हैं और ग्राहक भुगतान के लिए UPI के अलावा कार्ड, बैंक ट्रांसफर या अन्य विकल्पों का कितना इस्तेमाल करते हैं।
सोशल मीडिया पर भी तेज हुई बहस
MDR को लेकर सोशल मीडिया पर भी राजनीतिक और कारोबारी बहस देखने को मिल रही है। समाजवादी पार्टी नेता आईपी सिंह ने चांदनी चौक में UPI बोर्ड हटाए जाने के वीडियो को साझा करते हुए इस मुद्दे पर टिप्पणी की।
भारतपे के पूर्व को-फाउंडर अश्नीर ग्रोवर ने भी मर्चेंट चार्ज को लेकर सवाल उठाए हैं। उनकी दलील है कि यदि डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की लागत व्यापारियों पर बढ़ती है तो उसका प्रभाव अप्रत्यक्ष रूप से ग्राहकों तक पहुंच सकता है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी UPI पर प्रस्तावित MDR को लेकर सरकार की आलोचना करते हुए इसे वापस लेने की मांग की है।
यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि नेताओं और कारोबारियों की ओर से दिए गए ये बयान राजनीतिक या व्यक्तिगत दावे/राय हैं, जबकि ₹2,000 की सीमा और करीब 96% ट्रांजैक्शन के प्रभावित नहीं होने का आंकड़ा सरकार के बताए ढांचे से संबंधित है।
ग्राहक के लिए क्या समझना जरूरी है?
अगर आप UPI का इस्तेमाल रोजमर्रा की खरीदारी के लिए करते हैं तो सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान शुल्क मुक्त रखने की बात कही गई है।
इसके अलावा व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P भुगतान पर भी MDR लागू नहीं होने की बात स्पष्ट की गई है।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि अब हर UPI भुगतान पर ग्राहक से कोई नया चार्ज लिया जाएगा। विवाद मुख्य रूप से कुछ बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लगने वाली लागत और उसके कारोबारी प्रभाव को लेकर है।
आगे क्या देखना होगा?
अब इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि MDR का नया ढांचा जमीन पर किस तरह लागू होता है और व्यापारी इसे किस तरह अपनाते हैं।
छोटे कारोबारियों के लिए ₹2,000 तक के भुगतान शुल्क मुक्त रहना महत्वपूर्ण है, जबकि बड़े कारोबारियों के लिए बड़ी रकम के डिजिटल भुगतान की लागत अहम रहेगी।
UPI भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम का बड़ा हिस्सा बन चुका है। इसलिए इसके शुल्क ढांचे में कोई भी बदलाव सिर्फ पेमेंट कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर व्यापारियों, बैंकों, पेमेंट ऐप्स और कुछ मामलों में ग्राहकों के व्यवहार पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर सबसे अहम बात यही है कि UPI को लेकर कोई सामान्य ग्राहक शुल्क लागू होने की बात नहीं है। ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान और P2P ट्रांजैक्शन को शुल्क से बाहर रखने की बात कही गई है, जबकि विवाद कुछ ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR को लेकर है।
Source: उपलब्ध सरकारी स्पष्टीकरण और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित।


