Harsh Goenka Post: आरपीजी एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका की महंगाई पर शेयर की गई एक पोस्ट सोशल मीडिया पर चर्चा में है। इसमें एक छात्र ने डॉलर, पेट्रोल, दूध, प्याज, चीनी, दाल और सोने की बढ़ती कीमतों का जिक्र करते हुए ऐसा जवाब दिया, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया। छात्र ने कहा कि जब बाकी चीजों की कीमतें बढ़ रही हैं, तब भी स्कूल में पास होने के लिए 35 फीसदी अंक ही चाहिए।
नई दिल्ली: आरपीजी एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अक्सर कारोबार, अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े रोचक पोस्ट शेयर करते हैं। उनकी एक पोस्ट इन दिनों महंगाई के मुद्दे को एक छात्र के मजेदार जवाब के जरिए सामने ला रही है। पोस्ट में बढ़ती कीमतों और शिक्षा में पासिंग मार्क्स के बीच तुलना की गई है।
हर्ष गोयनका ने हाई-स्कूल के एक छात्र से जुड़ी एक कहानी शेयर की। इसमें छात्र से पूछा गया कि वह भगवान का शुक्रिया क्यों अदा करता है। छात्र ने अपने जवाब में रोजमर्रा की कई जरूरी चीजों की कीमतों का जिक्र किया और आखिर में ऐसी बात लिखी, जिसने पूरे जवाब को मजेदार बना दिया।
छात्र ने किन चीजों की कीमतों का किया जिक्र?
A high-school student was asked to write a short essay on why he is grateful to God.
He wrote:
Dollar: ₹96
Petrol: ₹111/litre
Milk: ₹100/litre
Onions: ₹54/kg
Sugar: ₹60/kg
Dal: ₹125/kg
Gold: ₹1.5 lakh/10g
“Thank you, God, for ensuring that while everything else keeps…
— Harsh Goenka (@hvgoenka) September 15, 2026 छात्र ने महंगाई को समझाने के लिए कई जरूरी वस्तुओं और कमोडिटीज की कीमतों का उदाहरण दिया। उसके जवाब में डॉलर से लेकर पेट्रोल और सोने तक की कीमतें शामिल थीं।
उसके मुताबिक:
- डॉलर: 96 रुपये
- पेट्रोल: 111 रुपये प्रति लीटर
- दूध: 100 रुपये प्रति लीटर
- प्याज: 54 रुपये प्रति किलो
- चीनी: 60 रुपये प्रति किलो
- दाल: 125 रुपये प्रति किलो
- सोना: 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम
छात्र ने इन कीमतों का जिक्र करते हुए यह बताने की कोशिश की कि समय के साथ रोजमर्रा की जरूरतों और निवेश से जुड़ी कई चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।
फिर आया 35 फीसदी वाला जवाब
छात्र का जवाब यहीं खत्म नहीं हुआ। महंगी होती चीजों की लंबी सूची देने के बाद उसने लिखा कि वह भगवान का शुक्रिया इसलिए अदा करता है क्योंकि जब बाकी चीजों की कीमतें बढ़ रही हैं, तब भी स्कूल में पास होने के लिए 35 फीसदी अंक ही चाहिए।
यही लाइन हर्ष गोयनका की पोस्ट का सबसे चर्चित हिस्सा बन गई। महंगाई और परीक्षा के पासिंग मार्क्स के बीच की यह तुलना सोशल मीडिया यूजर्स को काफी रोचक लगी।
इस जवाब में छात्र ने एक आम आर्थिक अनुभव को हल्के-फुल्के अंदाज में पेश किया है। रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में बदलाव के बीच परीक्षा के न्यूनतम पासिंग प्रतिशत को स्थिर बताना ही इस मजाक का आधार है।
सोशल मीडिया पर यूजर्स ने भी दिए अलग-अलग जवाब
हर्ष गोयनका की पोस्ट पर एक्स यूजर्स ने अपने-अपने अंदाज में प्रतिक्रिया दी। कुछ लोगों ने जहां छात्र के जवाब को मजेदार बताया, वहीं कुछ यूजर्स ने महंगाई की चर्चा को आय और शिक्षा की बढ़ती लागत से जोड़ दिया।
एक यूजर ने टिप्पणी करते हुए कहा कि छात्र ने अपने पिता की सैलरी या बिजनेस इनकम का जिक्र करना भूल गया। कमेंट में दावा किया गया कि पिता की मासिक आय करीब 1 लाख रुपये है और पिछले 10 वर्षों में इसमें 100 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इस प्रतिक्रिया का मुख्य बिंदु यह था कि महंगाई को समझते समय केवल कीमतों में बदलाव देखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आय में हुए बदलाव को भी ध्यान में रखना चाहिए।
बढ़ती स्कूल फीस का भी उठा मुद्दा
एक अन्य यूजर ने महंगाई के साथ शिक्षा की बढ़ती लागत का मुद्दा उठाया। उन्होंने स्कूल फीस में बढ़ोतरी और अच्छे स्कूलों में दाखिले के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा का जिक्र किया।
शिक्षा पर होने वाला खर्च कई परिवारों के बजट का अहम हिस्सा होता है। इसलिए महंगाई पर चर्चा में केवल पेट्रोल, दूध या खाद्य पदार्थों की कीमतें ही नहीं, बल्कि स्कूल फीस, किताबें, परिवहन और अन्य शिक्षा संबंधी खर्च भी शामिल किए जाते हैं।
सैलरी और महंगाई को लेकर भी प्रतिक्रिया
पोस्ट पर एक अन्य प्रतिक्रिया में वेतन वृद्धि का मुद्दा उठाया गया। यूजर ने दावा किया कि सैलरी में बढ़ोतरी महंगाई की रफ्तार के मुकाबले पर्याप्त नहीं है। उन्होंने फ्रेशर्स और अनुभवी कर्मचारियों की कमाई को लेकर अपने आंकड़े भी साझा किए।
हालांकि, सोशल मीडिया पर यूजर्स द्वारा साझा किए गए ऐसे व्यक्तिगत आंकड़ों और दावों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित आंकड़े नहीं माना जा सकता। अलग-अलग शहरों, कंपनियों, उद्योगों और कर्मचारियों के अनुभवों में काफी अंतर हो सकता है।
महंगाई पर एक गंभीर मुद्दे को मजेदार अंदाज में पेश किया
हर्ष गोयनका की यह पोस्ट मूल रूप से एक हास्यपूर्ण उदाहरण के जरिए महंगाई की चर्चा करती है। छात्र का जवाब इसलिए ध्यान खींचता है क्योंकि उसने आर्थिक दबाव से जुड़े कई उदाहरणों को परीक्षा के 35 फीसदी पासिंग मार्क्स के साथ जोड़ दिया।
वहीं, पोस्ट पर आई प्रतिक्रियाओं ने चर्चा को एक कदम आगे बढ़ाकर आय, वेतन, शिक्षा और परिवार के खर्च जैसे मुद्दों तक पहुंचा दिया। इस तरह एक मजेदार छात्र जवाब ने सोशल मीडिया पर महंगाई और आम आदमी की आर्थिक स्थिति को लेकर अलग-अलग नजरिए सामने ला दिए।
Source: सोशल मीडिया पर हर्ष गोयनका की पोस्ट और यूजर्स की प्रतिक्रियाओं पर आधारित।
डिस्क्लेमर: सोशल मीडिया पोस्ट में बताए गए व्यक्तिगत आंकड़े और दावे संबंधित यूजर्स की टिप्पणियां हैं। इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित आर्थिक आंकड़े नहीं माना जाना चाहिए।


