Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 8 सितंबर को बिकवाली का दबाव देखने को मिला। निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन बाजार में कमजोरी बढ़ी और Sensex इंट्रा-डे में 464 अंक तक टूट गया, जबकि Nifty 50 फिसलकर 23,700 के नीचे आ गया। पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है।
सुबह 11:45 बजे के आसपास Sensex 429.24 अंक यानी 0.56% की गिरावट के साथ 75,703.57 पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty 50 105.20 अंक यानी 0.44% गिरकर 23,673.95 पर था। इंट्रा-डे कारोबार में सेंसेक्स 464.33 अंक गिरकर 75,668.48 और निफ्टी 122 अंक टूटकर 23,657.15 तक पहुंच गया।
हालांकि, बाजार में गिरावट का दबाव व्यापक स्तर पर अपेक्षाकृत सीमित नजर आया। Nifty Midcap 100 और Nifty Smallcap 100 में भी हल्की कमजोरी देखने को मिली।
Share Market Crash: बाजार में गिरावट की 4 बड़ी वजहें
मंगलवार के कारोबार में बाजार पर कई घरेलू और वैश्विक फैक्टर्स का असर दिखाई दिया। इनमें पश्चिमी एशिया का बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, बैंकिंग और ऑटो शेयरों में कमजोरी तथा तकनीकी स्तरों पर दबाव प्रमुख रहे।
1. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
शेयर बाजार की कमजोरी की सबसे बड़ी वजहों में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी शामिल रही। पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क Brent Crude 1% से ज्यादा चढ़कर 98 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया।
ईरान की ओर से यह चेतावनी दिए जाने के बाद बाजार की चिंता बढ़ी कि अगर उस पर कोई नया हमला होता है तो वह खाड़ी देशों में अमेरिकी हितों से जुड़े एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए चिंता बढ़ाती है। इससे आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव पड़ने की आशंका रहती है। यही वजह है कि क्रूड में तेजी का असर शेयर बाजार की धारणा पर भी दिखाई देता है।
2. प्राइवेट बैंक और ऑटो शेयरों में बिकवाली
मंगलवार को बाजार पर प्राइवेट बैंकिंग और ऑटो सेक्टर ने भी दबाव बनाया। कारोबार के दौरान Nifty Private Bank और Nifty Auto इंडेक्स करीब 0.5% तक नीचे थे।
इन सेक्टर्स में कमजोरी का असर प्रमुख इंडेक्स पर पड़ा, क्योंकि बैंकिंग शेयरों का निफ्टी और सेंसेक्स में अच्छा खासा वजन है। निवेशकों की बिकवाली बढ़ने से बाजार की शुरुआती कमजोरी और गहरी हुई।
3. India VIX में बढ़ी हलचल
शेयर बाजार में बढ़ती अनिश्चितता का असर India VIX पर भी नजर आया। India VIX बाजार में आने वाली संभावित शॉर्ट-टर्म अस्थिरता का संकेत देने वाला प्रमुख इंडिकेटर है।
फिलहाल India VIX 0.60% की बढ़त के साथ 11.23 के स्तर पर था। VIX में बढ़ोतरी आमतौर पर यह संकेत देती है कि आने वाले समय में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
यानी निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ने के साथ ही बाजार में रिस्क लेने की क्षमता भी प्रभावित हुई।
4. Nifty पर टेक्निकल दबाव
बाजार में कमजोरी की एक बड़ी वजह टेक्निकल सेटअप भी है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक निफ्टी फिलहाल अपने अहम मूविंग एवरेज के नीचे कारोबार कर रहा है, जिससे शॉर्ट टर्म में दबाव बना हुआ है।
Choice Broking के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट हितेश टेलर के मुताबिक निफ्टी के लिए 23,650–23,700 का जोन तत्काल सपोर्ट के तौर पर महत्वपूर्ण है। वहीं ऊपर की तरफ 23,950–24,000 का स्तर अहम रेजिस्टेंस बना हुआ है।
उनके मुताबिक अगर 23,650–23,700 का सपोर्ट जोन कायम रहता है तो निफ्टी में रिकवरी की कोशिश देखने को मिल सकती है। लेकिन अगर 23,650 का स्तर निर्णायक रूप से टूटता है, तो बाजार में और कमजोरी आ सकती है। उनके अनुसार नियर टर्म में निफ्टी का रुझान सतर्क से बेयरेश बना हुआ है।
23,600 का लेवल क्यों है अहम?
HDFC Securities के हेड ऑफ प्राइस रिसर्च देवर्ष वकील के मुताबिक निफ्टी अपने सभी प्रमुख मूविंग एवरेज के नीचे कारोबार कर रहा है।
उनके अनुसार पिछले कारोबारी सत्र में निफ्टी ने 23,786 का स्तर तोड़ दिया, जिससे अब अगले महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन यानी 23,600 की ओर दबाव बढ़ा है।
वहीं ऊपर की तरफ 24,000 का स्तर निफ्टी के लिए अहम रेजिस्टेंस बना हुआ है। बाजार में स्थायी रिकवरी के लिए इस स्तर के ऊपर मजबूती जरूरी मानी जा रही है।
अब निवेशकों की नजर किन स्तरों पर?
मंगलवार के कारोबार में निफ्टी के लिए 23,650–23,700 का जोन तत्काल सपोर्ट के तौर पर महत्वपूर्ण है। अगर यह जोन टूटता है तो 23,600 अगला महत्वपूर्ण स्तर हो सकता है।
दूसरी तरफ रिकवरी की स्थिति में 23,950–24,000 का जोन अहम रेजिस्टेंस रहेगा। 24,000 के ऊपर टिकाऊ मजबूती बाजार के लिए पॉजिटिव संकेत दे सकती है।
फिलहाल बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव, क्रूड की कीमतों में तेजी और कमजोर टेक्निकल सेटअप के बीच निवेशकों को बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की आशंका है।
जरूरी बात
शेयर बाजार में गिरावट के दौरान सिर्फ एक दिन के उतार-चढ़ाव को देखकर निवेश का फैसला करना उचित नहीं है। निवेशकों को कंपनी के फंडामेंटल, वैल्यूएशन, सेक्टर की स्थिति और अपनी जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर या निवेश में पैसा लगाने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें। NewsJagran.in किसी भी निवेशक को किसी खास शेयर में निवेश करने की सलाह नहीं देता है।


