Nifty Trend: शेयर बाजार में पिछले करीब एक महीने से लगातार दबाव देखने को मिल रहा है। निफ्टी अपने हालिया हाई से लगभग 1,000 अंक नीचे आ चुका है। 24,775 के स्तर से फिसलते हुए इंडेक्स अब 23,775 के आसपास पहुंच गया है। खास बात यह है कि बाजार में किसी एक दिन बहुत बड़ी गिरावट नहीं आई, बल्कि लगातार छोटी-छोटी गिरावटों ने निफ्टी को करीब 1,000 अंक नीचे ला दिया।
मार्केट एक्सपर्ट अनुज सिंघल के मुताबिक, निफ्टी में अब ट्रेंडलाइन और ट्राइएंगल ब्रेकडाउन की पुष्टि हो चुकी है। ऐसे में बाजार की दिशा फिलहाल कमजोर नजर आ रही है। दूसरी तरफ कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, बढ़ती बॉन्ड यील्ड और मजबूत डॉलर इंडेक्स भी भारतीय शेयर बाजार के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं।
निफ्टी में लगातार बनी हुई कमजोरी
अनुज सिंघल के अनुसार, पिछले एक महीने में निफ्टी करीब 24,775 से गिरकर 23,775 तक आ गया है। इस दौरान गिरावट किसी एक बड़े झटके की वजह से नहीं आई। लगभग लगातार दबाव के चलते इंडेक्स धीरे-धीरे नीचे खिसका है।
इस अवधि में निफ्टी केवल 6 कारोबारी सत्रों में ही पॉजिटिव रहा। वहीं, किसी एक दिन की गिरावट 0.57% से अधिक नहीं रही। यानी बाजार में एक साथ बड़ी बिकवाली के बजाय लगातार बिकवाली देखने को मिली है।
तकनीकी नजरिए से निफ्टी में ट्रेंडलाइन के साथ-साथ ट्राइएंगल पैटर्न का ब्रेकडाउन भी कन्फर्म हो चुका है। इससे बाजार में कमजोरी के आगे भी बने रहने की आशंका बढ़ गई है।
IT शेयरों की कमजोरी ने बढ़ाई चिंता
बाजार की कमजोरी में Nifty IT का दोबारा दबाव में आना भी एक महत्वपूर्ण वजह है। पिछले एक महीने में Nifty IT इंडेक्स 6% से ज्यादा नीचे आ चुका है।
दूसरी तरफ बैंक निफ्टी फिलहाल ज्यादा नहीं गिरा है, लेकिन यह बार-बार अपने 200-DMA के नीचे फिसल रहा है। यह टेक्निकल संकेत बाजार के लिए बहुत मजबूत नहीं माना जाता।
ग्लोबल बाजारों में भी आने वाले दिनों में सावधानी देखने को मिल सकती है और बाजार 11 सितंबर तक ‘वेट एंड वॉच’ मोड में रह सकते हैं।
क्रूड ऑयल बना बाजार का सबसे बड़ा सिरदर्द
भारतीय शेयर बाजार के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमतें हैं। ब्रेंट क्रूड 97 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुका है। पिछले सप्ताह से इसमें करीब 9% की तेजी दर्ज की गई है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और सप्लाई को लेकर चिंता के कारण क्रूड की कीमतों को लगातार सपोर्ट मिल रहा है। अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने से सप्लाई रिस्क और गहरा हुआ है।
इसके अलावा ईरान और ओमान के बीच होर्मुज से जुड़े मैनेजमेंट समझौते की चर्चा, सऊदी अरामको की Jazan फैसिलिटी पर हमले की खबरें और चीन की क्रूड खरीद में रिकवरी भी तेल की कीमतों को ऊपर रखने वाले फैक्टर हैं।
Goldman Sachs ने दी क्रूड पर बड़ी चेतावनी
Goldman Sachs का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट में हमले बढ़ते हैं, तो क्रूड की कीमतों में और तेज उछाल आ सकता है। ऐसी स्थिति में ब्रेंट क्रूड के 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने का जोखिम भी बताया गया है।
मार्केट में क्रूड पर बुलिश सेंटीमेंट भी मजबूत हुआ है। हेज फंड्स मई के बाद ब्रेंट पर सबसे ज्यादा बुलिश नजर आ रहे हैं, जबकि WTI में नेट लॉन्ग पोजिशन जून के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं।
अमेरिका में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव
मिडिल ईस्ट में सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंता का असर अमेरिकी फ्यूल मार्केट पर भी देखने को मिल रहा है। अमेरिका में गैसोलीन और डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब पहुंच गई हैं।
अगर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आगे भी जारी रहती है, तो इससे दुनिया भर में महंगाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है। भारत जैसे बड़े क्रूड आयातक देश के लिए यह खास तौर पर महत्वपूर्ण फैक्टर है।
चीन लगातार बढ़ा रहा सोने का भंडार
जहां इक्विटी बाजार दबाव में हैं, वहीं सोने की मांग मजबूत बनी हुई है। चीन के केंद्रीय बैंक PBoC ने अगस्त में करीब 6.5 लाख औंस सोना खरीदा है।
यह अक्टूबर 2023 के बाद एक महीने में PBoC की सबसे बड़ी खरीदारी बताई जा रही है। केंद्रीय बैंक लगातार 22वें महीने सोने की खरीदारी कर रहा है।
इससे ग्लोबल स्तर पर सोने के प्रति केंद्रीय बैंकों की मजबूत मांग का संकेत मिलता है।
बढ़ती US Bond Yield से शेयर बाजार परेशान
शेयर बाजार के लिए दूसरा बड़ा जोखिम अमेरिका की 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड है। Societe Generale के मुताबिक, अगर US 10-year yield 5.5% तक पहुंचती है तो इक्विटी बाजार पर दबाव काफी बढ़ सकता है।
ऊंची यील्ड के कारण बॉरोइंग कॉस्ट बढ़ती है और इसका असर कंपनियों के वैल्यूएशन पर पड़ सकता है। खास तौर पर ऊंचे वैल्यूएशन वाले शेयरों में इसका असर ज्यादा देखने को मिल सकता है।
वहीं JPMorgan के मुताबिक, 10-year US yield का 5% स्तर बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण साइकोलॉजिकल थ्रेशोल्ड है। अगर यील्ड इस स्तर तक पहुंचती है तो इक्विटी निवेशकों की चिंता बढ़ सकती है।
अब कितना नीचे जा सकता है Nifty?
अनुज सिंघल के मुताबिक, इस साल निफ्टी में दो बड़े बॉटम देखने को मिले हैं। युद्ध के तुरंत बाद निफ्टी ने करीब 22,331 का लो बनाया था, जबकि मई में क्लोजिंग आधार पर 23,123 का स्तर देखने को मिला।
इसके बाद निफ्टी बढ़ते हुए करीब 24,774 तक पहुंचा था। अब मई के लो से आई तेजी का लगभग 60% रिट्रेसमेंट हो चुका है।
अगर निफ्टी 23,750 के नीचे क्लोज करता है तो 61.8% रिट्रेसमेंट का स्तर सक्रिय हो सकता है। ऐसी स्थिति में 23,100-23,200 की तरफ वापस जाने का जोखिम बढ़ जाएगा।
वहीं युद्ध के बाद बने लो से शुरू हुई रैली का करीब 41% रिट्रेसमेंट पहले ही हो चुका है। इसका 50% रिट्रेसमेंट लगभग 23,550 के आसपास आता है।
इसलिए तकनीकी नजरिए से निफ्टी के लिए 23,200-23,500 का जोन अब महत्वपूर्ण बन गया है।
आज किन सेक्टर्स और शेयरों पर नजर?
कमजोर बाजार में भी कुछ सेक्टर और शेयर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। अनुज सिंघल के मुताबिक, निफ्टी IT में फिर दबाव देखने को मिल सकता है।
इसके अलावा पावर इक्विपमेंट कंपनियों पर नजर रखी जा सकती है। GE Vernova T&D आज फोकस में रह सकता है। पावर ग्रिड से जुड़े ऑर्डर की उम्मीद के चलते पावर इक्विपमेंट सेक्टर में भी हलचल देखने को मिल सकती है।
AI से जुड़े शेयरों में भी फिर से खरीदारी लौटने के संकेत हैं। डिफेंस शेयर भी रडार पर रहेंगे, हालांकि ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली का जोखिम बना हुआ है।
मेटल और फार्मा शेयर भी फोकस में
मेटल सेक्टर में भी कुछ शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है। कॉपर रिकॉर्ड हाई के करीब है, जबकि जिंक करीब चार साल के उच्च स्तर पर पहुंच चुका है।
ऐसे माहौल में Hind Copper और Hind Zinc जैसे शेयरों पर नजर रखी जा सकती है।
वहीं बाजार में Risk-Off माहौल होने पर फार्मा सेक्टर को भी फायदा मिल सकता है। इसलिए आज फार्मा शेयर भी निवेशकों के रडार पर रह सकते हैं।
Nifty की आज की रणनीति
अनुज सिंघल के मुताबिक निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस इस प्रकार हैं:
| स्तर | निफ्टी |
|---|---|
| पहला सपोर्ट | 23,700-23,750 |
| बड़ा सपोर्ट | 23,550-23,600 |
| पहला रेजिस्टेंस | 23,800-23,850 |
| बड़ा रेजिस्टेंस | 23,900-23,950 |
रणनीति के लिहाज से कमजोर स्तरों पर बिकवाली का नजरिया रखा जा सकता है। यानी जहां रिकवरी फेल होती दिखाई दे, वहां सावधानी जरूरी होगी।
हालांकि आज साप्ताहिक एक्सपायरी भी है। ऐसे में बाजार में अचानक शॉर्ट कवरिंग देखने को मिल सकती है और दूसरे हाफ में तेज रिकवरी संभव है। लेकिन फिलहाल चार्ट और टेक्निकल संकेत किसी बड़ी तेजी की पुष्टि नहीं कर रहे हैं।
Bank Nifty की रणनीति
बैंक निफ्टी के लिए 56,800-57,000 का स्तर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसे ‘मेक ऑर ब्रेक’ जोन के तौर पर देखा जा सकता है।
अगर बैंक निफ्टी इस स्तर को बचाने में कामयाब रहता है तो इंडेक्स दोबारा 57,300-57,500 की तरफ बढ़ सकता है।
लेकिन अगर 56,800 का स्तर टूटता है तो बैंक निफ्टी में 56,500 तक कमजोरी का खतरा बढ़ सकता है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
फिलहाल बाजार में कई ग्लोबल और घरेलू जोखिम एक साथ बने हुए हैं। क्रूड की तेजी, US बॉन्ड यील्ड, डॉलर इंडेक्स और कमजोर IT इंडेक्स निफ्टी के लिए चुनौती बने हुए हैं।
ऐसे में जल्दबाजी में आक्रामक खरीदारी करने के बजाय महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस के टूटने या बचने का इंतजार करना बेहतर रणनीति हो सकती है। एक्सपायरी के दिन अचानक आने वाली शॉर्ट कवरिंग को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
नोट: यह लेख बाजार विशेषज्ञों के विचारों और उपलब्ध बाजार आंकड़ों पर आधारित है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है।
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