Bombay High Court Order: बैंक के पास लोन की सिक्योरिटी के तौर पर जमा आपकी प्रॉपर्टी के मूल दस्तावेज अगर खो जाएं तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? बॉम्बे हाई कोर्ट के एक अहम फैसले में इसका स्पष्ट जवाब सामने आया है। कोर्ट ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को आदेश दिया है कि वह एक कंपनी को हर दिन 5,000 रुपये का मुआवजा दे।
यह मामला ‘इन वोग क्रिएशंस बनाम स्टेट बैंक ऑफ इंडिया’ से जुड़ा है। कंपनी ने अपना लोन साल 2003 में पूरी तरह चुका दिया था, लेकिन बैंक के पास जमा उसकी प्रॉपर्टी के मूल टाइटल डॉक्यूमेंट वापस नहीं किए गए। बाद में बैंक ने स्वीकार किया कि वह इन दस्तावेजों को खोज नहीं पाया।
क्या है पूरा मामला?
मामला मुंबई की दो प्रॉपर्टीज से जुड़ा है। इन वोग क्रिएशंस ने प्रभादेवी स्थित बुसा इंडस्ट्रियल प्रेमिसेस कोऑपरेटिव सोसाइटी में यूनिट/गाला नंबर 317 और 318 खरीदे थे।
कंपनी ने साल 1979 में लोन सुविधाएं लेने के लिए इन प्रॉपर्टीज से जुड़े एग्रीमेंट और शेयर सर्टिफिकेट SBI की दादर कमर्शियल ब्रांच में सिक्योरिटी के तौर पर जमा किए थे।
इसके अलावा, कंपनी ने तालोजा, पनवेल में MIDC से जुड़े एक प्लॉट का रजिस्टर्ड लीज एग्रीमेंट और उससे संबंधित दूसरे दस्तावेज भी बैंक के पास सिक्योरिटी के तौर पर जमा किए थे।
बैंक ने कंपनी को लोन सुविधाएं उपलब्ध कराईं। कंपनी ने बाद में 28 अगस्त 2003 को पूरा बकाया चुका दिया।
20 साल बाद भी नहीं मिले मूल दस्तावेज
लोन चुकाने के बावजूद प्रॉपर्टी के मूल कागजात कंपनी को वापस नहीं मिले। लंबे समय बाद जब कंपनी ने इन दस्तावेजों की मांग की तो बैंक उन्हें उपलब्ध नहीं करा सका।
27 जुलाई 2023 को SBI ने नो-ड्यूज/नो-क्लेम सर्टिफिकेट जारी किया। इसमें बैंक ने पुष्टि की कि लोन पूरी तरह चुका दिया गया है और प्रॉपर्टीज पर बैंक का कोई बकाया दावा या मॉर्गेज नहीं है।
लेकिन मूल टाइटल डॉक्यूमेंट फिर भी कंपनी के हाथ नहीं लगे।
इसके बाद दिसंबर 2023 में बैंक ने संबंधित संस्थाओं को पत्र लिखकर बताया कि उसे दस्तावेज नहीं मिल रहे हैं। SBI ने बुसा इंडस्ट्रियल प्रेमिसेस कोऑपरेटिव सोसाइटी और MIDC से दस्तावेजों की प्रमाणित या अन्य उपलब्ध प्रतियां देने का अनुरोध किया।
कंपनी ने बैंक के खिलाफ उठाए कई कदम
दस्तावेज नहीं मिलने के बाद इन वोग क्रिएशंस ने अखबारों में सार्वजनिक नोटिस जारी कराया और दादर पुलिस स्टेशन में शिकायत भी दर्ज कराई। कंपनी ने बैंकिंग लोकपाल का भी रुख किया।
21 नवंबर 2024 को बैंकिंग लोकपाल ने SBI को कंपनी को 1 लाख रुपये मुआवजा देने की सलाह दी। कंपनी ने इस राशि को स्वीकार नहीं किया। इसके बावजूद SBI ने 22 नवंबर 2024 को उसके खाते में 1 लाख रुपये जमा कर दिए।
कंपनी का कहना था कि सिर्फ रकम देने से समस्या खत्म नहीं होती। वह दोनों प्रॉपर्टीज को बेचना चाहती थी और मूल दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की वजह से उसे परेशानी हो रही थी।
कंपनी ने यह भी कहा कि बैंक द्वारा उपलब्ध कराए गए वैकल्पिक दस्तावेज मूल कागजात के नुकसान से पैदा हुई सभी समस्याओं का समाधान नहीं करते।
SBI ने क्या दलील दी?
SBI ने कोर्ट के सामने कहा कि कंपनी ने लोन चुकाने के तुरंत बाद दस्तावेज वापस लेने के लिए संपर्क नहीं किया था। बैंक के मुताबिक, दस्तावेजों की मांग काफी वर्षों बाद की गई।
बैंक ने यह भी बताया कि इस दौरान संबंधित ब्रांच की जगह बदल गई थी और उसने दस्तावेज खोजने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं मिले।
SBI ने RBI के 13 सितंबर 2023 के सर्कुलर को लेकर भी दलील दी। बैंक का कहना था कि यह सर्कुलर 2003 में चुकाए जा चुके पुराने लोन पर पीछे की तारीख से लागू नहीं किया जा सकता।
इसी आधार पर बैंक ने 5,000 रुपये प्रतिदिन के मुआवजे को लागू करने का विरोध किया।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने बैंक की दलील नहीं मानी
2 सितंबर 2026 को बॉम्बे हाई कोर्ट की खंडपीठ ने मामले में आदेश पारित किया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति गौतम ए. अंखाड की पीठ ने SBI को संबंधित प्रक्रिया पूरी करने के लिए 12 सप्ताह का समय दिया।
कोर्ट ने दस्तावेजों की मांग में हुई देरी वाली बैंक की दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने RBI के 13 सितंबर 2023 के सर्कुलर के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए बैंक को मुआवजा देने का निर्देश दिया।
RBI के नियम में क्या है?
RBI के 13 सितंबर 2023 के सर्कुलर के अनुसार, लोन का पूरा भुगतान या निपटान होने के बाद बैंक और अन्य विनियमित संस्थाओं को 30 दिनों के भीतर चल या अचल संपत्ति से जुड़े मूल दस्तावेज जारी करने होते हैं।
अगर दस्तावेज जारी करने में देरी बैंक या संबंधित संस्था की वजह से होती है तो उसे उधारकर्ता को हर दिन 5,000 रुपये के हिसाब से मुआवजा देना पड़ सकता है।
इतना ही नहीं, अगर मूल दस्तावेज खो गए हैं या उन्हें नुकसान पहुंचा है तो बैंक को उधारकर्ता की मदद से डुप्लिकेट या प्रमाणित प्रतियां हासिल करनी होती हैं। इससे जुड़ी लागत भी बैंक को उठानी होती है।
1 दिसंबर 2023 से मिलेगा ₹5,000 रोज का मुआवजा
बॉम्बे हाई कोर्ट ने SBI को आदेश दिया है कि वह 1 दिसंबर 2023 से हर दिन 5,000 रुपये के हिसाब से मुआवजा दे।
यह भुगतान तब तक जारी रहेगा, जब तक बैंक खोए हुए दस्तावेजों से जुड़े जरूरी रिकॉर्ड दोबारा तैयार नहीं कर देता और कंपनी को प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध नहीं करा देता।
इस प्रक्रिया में आवश्यक एंडोर्समेंट, हलफनामे, इंडेम्निटी और अन्य सहायक दस्तावेज भी शामिल होंगे।
हालांकि, बैंक द्वारा पहले ही कंपनी के खाते में जमा किए गए 1 लाख रुपये को कोर्ट द्वारा निर्धारित कुल मुआवजे में समायोजित किया जाएगा।
प्रॉपर्टी मालिकों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
बॉम्बे हाई कोर्ट का यह आदेश उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जिनके प्रॉपर्टी के मूल दस्तावेज बैंक या वित्तीय संस्थान के पास लोन की सिक्योरिटी के तौर पर जमा रहते हैं।
लोन पूरा चुकाने के बाद सिर्फ नो-ड्यूज सर्टिफिकेट मिलना ही पर्याप्त नहीं है। प्रॉपर्टी के मूल दस्तावेज भी वापस मिलना जरूरी है। इन दस्तावेजों के बिना प्रॉपर्टी बेचने, ट्रांसफर करने या उसके मालिकाना हक से जुड़े कामों में परेशानी आ सकती है।
इस मामले में कोर्ट का आदेश यह भी स्पष्ट करता है कि दस्तावेजों की जिम्मेदारी बैंक की है और अगर उसकी वजह से मूल कागजात उपलब्ध नहीं होते हैं तो उधारकर्ता को मुआवजे का दावा मिल सकता है।
नोट: यह लेख आपके उपलब्ध मामले के विवरण और उसमें उद्धृत RBI प्रावधानों के आधार पर तैयार किया गया है। कानूनी मामलों में अंतिम स्थिति के लिए संबंधित कोर्ट आदेश और आधिकारिक RBI दस्तावेज को प्राथमिक स्रोत माना जाना चाहिए।


