NewsjagranNewsjagranNewsjagran
  • बिजनेस न्यूज़
    बिजनेस न्यूज़Show More
    adani-defence-ak-203-rifle-ammunition-india-irrl-deal
    अदाणी ग्रुप का बड़ा कदम, भारत में ही बनेगी AK-203 राइफल की गोलियां, सेना को मिलेगा घरेलू सपोर्ट
    5 सितम्बर 2026
    uptet-2026-result-objection-representation-10-september
    UPTET 2026 Result: रिजल्ट से हैं नाखुश तो 10 सितंबर तक दर्ज करें आपत्ति, जानें पूरा तरीका
    5 सितम्बर 2026
    View this post on Instagram A post shared by StarPlus (@starplus) anil-kapoor-india-ke-top-1-percent-new-teaser-theme-song
    अनिल कपूर ने लूट ली महफिल, रिलीज हुआ ‘इंडिया के टॉप 1%’ का नया टीजर, झक्कास अंदाज में दिखे कपूर साहब
    5 सितम्बर 2026
    refurbished-phone-buying-guide-8-things-check-before-buy
    Refurbished Phone खरीदने से पहले 8 चीजें जरूर चेक करें, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान
    5 सितम्बर 2026
    top-10-makeup-companies-in-india
    भारत में तेजी से बढ़ रहा मेकअप का कारोबार, HUL से Nykaa तक ये 10 कंपनियां हैं सबसे चर्चित
    5 सितम्बर 2026
  • कमोडिटी
    कमोडिटीShow More
    gold-price-today-5-september-2026-gold-rate-silver-price
    Gold Price Today: सोने के भाव में फिर तेजी, दिल्ली में 24 कैरेट ₹1,56,820 पर पहुंचा; चांदी में गिरावट
    5 सितम्बर 2026
    gold-import-uae-india-import-increase-175-percent
    Gold Import: PM मोदी की अपील के बावजूद UAE से सोने का आयात 175% बढ़ा, अप्रैल-जुलाई में 15.17 अरब डॉलर का गोल्ड इंपोर्ट
    4 सितम्बर 2026
    gold-rate-today-3-september-2026-gold-price-falls-latest-rate
    Gold Rate Today: सोने की कीमत में लगातार छठे दिन गिरावट, दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड ₹1.52 लाख के करीब
    3 सितम्बर 2026
    gold-price-fall-3-week-low-crude-oil-fed-rate-hike
    Gold Price Fall: अचानक क्यों गिरा सोना? कच्चे तेल में उबाल से 3 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंचा गोल्ड
    2 सितम्बर 2026
    lpg-price-hike-september-2026-commercial-gas-cylinder-price
    LPG Price Today: सितंबर की शुरुआत में महंगा हुआ कमर्शियल सिलेंडर, जानें नए रेट
    1 सितम्बर 2026
  • शेयर बाज़ार
    शेयर बाज़ारShow More
    tata-technologies-former-ceo-patrick-mcgoldrick-share-sale-165-crore
    टाटा टेक के पूर्व CEO ने बेचे ₹165 करोड़ के शेयर, केन्या विवाद के बीच क्यों अहम है यह डील?
    5 सितम्बर 2026
    china-stock-market-earnings-growth-share-market-fall-reason
    चीन में कंपनियों की 26% अर्निंग्स ग्रोथ के बावजूद शेयर बाजार में गिरावट, जानिए क्या है वजह
    5 सितम्बर 2026
    apar-industries-dividend-60-rupees-record-date-14-september-2026
    Dividend Stock: ₹60 प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान, 14 सितंबर रिकॉर्ड डेट; 5 साल में 2600% रिटर्न
    5 सितम्बर 2026
    au-small-finance-bank-stock-target-icici-securities-buy-rating
    AU Small Finance Bank Stock: 17% तक चढ़ सकता है शेयर, ICICI Securities ने दी Buy रेटिंग; जानिए टारगेट प्राइस
    5 सितम्बर 2026
    nifty-target-december-record-high-healthcare-consumer-financial-sector
    Nifty Target: दिसंबर तक रिकॉर्ड हाई पर पहुंचेगा निफ्टी? इन सेक्टर्स पर एक्सपर्ट का दांव, क्या बढ़ा दें निवेश?
    5 सितम्बर 2026
Search
© 2026 News Jagran Digital Media. All Rights Reserved. | Udyam-HR-05-0178310
Reading: Agriculture Policy: इथेनॉल पर बढ़ते फोकस के बीच एक्सपर्ट की चेतावनी, बोले- ब्राजील की आंख बंद करके न करें नकल
Share
Notification Show More
Font ResizerAa
NewsjagranNewsjagran
Font ResizerAa
  • बिजनेस न्यूज़
  • कमोडिटी
  • शेयर बाज़ार
Search
  • बिजनेस न्यूज़
  • कमोडिटी
  • शेयर बाज़ार
Follow US
© 2026 News Jagran. All Rights Reserved.
बिजनेस न्यूज़

Agriculture Policy: इथेनॉल पर बढ़ते फोकस के बीच एक्सपर्ट की चेतावनी, बोले- ब्राजील की आंख बंद करके न करें नकल

Namam Sharma
Last updated: 2026/09/05 at 5:39 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
Share
12 Min Read
agriculture-policy-ethanol-devinder-sharma-brazil-policy-warning
SHARE

Agriculture Policy: भारत में इथेनॉल उत्पादन और ब्लेंडिंग को बढ़ावा देने के बीच कृषि विशेषज्ञ देविंदर शर्मा ने कृषि नीति को लेकर कई अहम सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि भारत को ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय और पर्यावरणीय संतुलन को भी प्राथमिकता देनी होगी। उनके मुताबिक, किसी दूसरे देश की कृषि या इथेनॉल नीति को बिना भारतीय परिस्थितियों का आकलन किए अपनाना लंबे समय में नुकसानदायक हो सकता है।

Contents
इथेनॉल को लेकर क्यों उठ रहे सवाल?मक्का और चावल पर भी बढ़ सकता है दबाव‘ब्राजील की आंख बंद करके नकल न करें’किसानों को मिलना चाहिए ‘इथेनॉल प्रीमियम’फर्टिलाइजर सब्सिडी पर भी बदलाव की जरूरतइनपुट सब्सिडी के बजाय डायरेक्ट इनकम सपोर्टMSP के लिए भरोसेमंद व्यवस्था जरूरीखेत और बाजार के बीच कीमत का बड़ा अंतरकिसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य अभी भी चुनौतीकृषि नीति में लॉन्ग टर्म सोच की जरूरत

नई दिल्ली: कृषि नीति को लेकर कृषि विश्लेषक देविंदर शर्मा ने सरकार से व्यापक स्तर पर पुनर्विचार की जरूरत बताई है। उनका मानना है कि कृषि से जुड़ी नीतियों का लक्ष्य सिर्फ इथेनॉल उत्पादन, फर्टिलाइजर सब्सिडी, कृषि व्यापार या उत्पादन बढ़ाना नहीं होना चाहिए। नीति का केंद्र किसानों की आय, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता होना चाहिए।

द इकोनॉमिक टाइम्स डिजिटल के साथ बातचीत में शर्मा ने इथेनॉल, चीनी, मक्का, चावल, फर्टिलाइजर सब्सिडी और न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर नीतियों के दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन नहीं किया गया तो आज का फायदा आने वाले वर्षों में नई समस्याएं पैदा कर सकता है।

इथेनॉल को लेकर क्यों उठ रहे सवाल?

भारत में पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाना और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। हालांकि, देविंदर शर्मा का कहना है कि इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के साथ यह भी देखना जरूरी है कि इसके लिए कृषि उपज का कितना हिस्सा भोजन से हटाकर ईंधन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

उनके अनुसार, चीनी सेक्टर इसका एक उदाहरण है। उनका दावा है कि भारत पहले चीनी के बड़े निर्यातकों में शामिल था, लेकिन अब परिस्थितियां बदल रही हैं। शर्मा का मानना है कि मौसम, सूखा और फसल संबंधी बीमारियों के साथ-साथ गन्ने को इथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ना भी चीनी की उपलब्धता पर चर्चा करते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए।

उनका सवाल है कि जब कृषि उत्पादों का इस्तेमाल ईंधन के लिए बढ़ाया जा रहा है तो किसानों को इसका पर्याप्त आर्थिक लाभ मिल रहा है या नहीं।

मक्का और चावल पर भी बढ़ सकता है दबाव

इथेनॉल की चर्चा केवल गन्ने तक सीमित नहीं है। मक्का और चावल भी इथेनॉल उत्पादन के लिए फीडस्टॉक के तौर पर इस्तेमाल किए जाते हैं। ऐसे में इन फसलों की मांग बढ़ने से खेती के पैटर्न में बदलाव की संभावना है।

शर्मा के मुताबिक, सरकार को पहले से यह तय करना चाहिए कि खाद्य सुरक्षा से समझौता किए बिना कितनी कृषि उपज को ईंधन उत्पादन की ओर मोड़ा जा सकता है। अगर इस सीमा का ध्यान नहीं रखा गया तो भविष्य में खाद्य उपलब्धता, कृषि कीमतों और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है।

उनका कहना है कि इथेनॉल नीति बनाते समय केवल पेट्रोलियम आयात में कमी या ऊर्जा सुरक्षा को नहीं देखा जाना चाहिए। इसमें किसानों की आमदनी और देश की खाद्य जरूरतों को भी बराबर महत्व मिलना चाहिए।

‘ब्राजील की आंख बंद करके नकल न करें’

शर्मा ने भारत की इथेनॉल रणनीति की तुलना ब्राजील से करते हुए सावधानी बरतने की बात कही है। उनका तर्क है कि भारत और ब्राजील की कृषि परिस्थितियां, पानी की उपलब्धता, फसल पैटर्न और किसानों की स्थिति अलग-अलग हैं। इसलिए किसी दूसरे देश के मॉडल को उसी रूप में भारत में लागू करना उचित नहीं होगा।

खास तौर पर धान जैसी अधिक पानी की जरूरत वाली फसलों को लेकर उन्होंने चिंता जताई। अगर इथेनॉल की मांग के कारण किसानों को ऐसी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहन मिलता है तो भूजल पर दबाव बढ़ सकता है।

इसलिए उनके मुताबिक भारत को ऐसी इथेनॉल नीति चाहिए जिसमें ऊर्जा सुरक्षा के साथ पानी, जमीन और खाद्य सुरक्षा का संतुलन बना रहे।

किसानों को मिलना चाहिए ‘इथेनॉल प्रीमियम’

देविंदर शर्मा ने यह भी सवाल उठाया कि कृषि उपज को ईंधन उत्पादन की ओर मोड़ने का सीधा फायदा किसानों को कितना मिल रहा है।

उन्होंने मक्का का उदाहरण देते हुए कहा कि मक्का इथेनॉल उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, लेकिन कई बार किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। ऐसे में अगर कृषि उत्पाद की मांग ईंधन क्षेत्र से बढ़ रही है तो किसानों को उसका अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलना चाहिए।

उनके अनुसार, किसानों को सिर्फ उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने के बजाय यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उन्हें अपनी उपज का लाभकारी मूल्य मिले।

फर्टिलाइजर सब्सिडी पर भी बदलाव की जरूरत

कृषि नीति में एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा फर्टिलाइजर सब्सिडी का है। शर्मा का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था में सरकार का बड़ा खर्च फर्टिलाइजर की कीमतों को नियंत्रित रखने में जाता है। इसके बावजूद किसानों को मिलने वाले प्रत्यक्ष लाभ को लेकर सवाल बने हुए हैं।

उनका तर्क है कि रासायनिक उर्वरकों पर लंबे समय तक निर्भरता ने पोषक तत्वों के असंतुलित इस्तेमाल को बढ़ावा दिया है। इसके अलावा कई उर्वरकों के लिए भारत की आयात निर्भरता भी एक चुनौती है।

हालांकि, शर्मा का सुझाव सब्सिडी को अचानक खत्म करने का नहीं है। वह धीरे-धीरे ऐसी कृषि व्यवस्था की ओर बढ़ने की बात करते हैं जिसमें प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल खेती के तरीकों को बढ़ावा मिले।

उन्होंने आंध्र प्रदेश में प्राकृतिक और समुदाय आधारित खेती के प्रयोगों का उदाहरण देते हुए कहा कि कम रासायनिक इनपुट के साथ भी खेती को टिकाऊ बनाया जा सकता है।

इनपुट सब्सिडी के बजाय डायरेक्ट इनकम सपोर्ट

शर्मा कृषि क्षेत्र में इनपुट आधारित सब्सिडी की जगह किसानों को सीधे आय सहायता देने की वकालत करते हैं। उनका मानना है कि इससे सरकारी सहायता का लाभ सीधे किसान तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, भारत में इसके सामने सबसे बड़ी चुनौती किराए पर खेती करने वाले किसानों की पहचान है। बड़ी संख्या में किसान ऐसी जमीन पर खेती करते हैं जिसका मालिकाना हक उनके पास नहीं होता। ऐसे में केवल जमीन के मालिकों के आधार पर योजनाएं तैयार करने से वास्तविक किसान बाहर रह सकते हैं।

इसलिए डायरेक्ट इनकम सपोर्ट के लिए ऐसा सिस्टम तैयार करना जरूरी होगा जो वास्तविक खेती करने वाले किसानों की पहचान कर सके।

शर्मा का यह भी मानना है कि किसानों के लिए मौजूदा प्रत्यक्ष आय सहायता को महंगाई के साथ जोड़ने पर विचार किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, यह कृषि नीति को केवल बाजार कीमतों पर निर्भर रहने के बजाय किसानों की आय सुरक्षा की दिशा में ले जा सकता है।

MSP के लिए भरोसेमंद व्यवस्था जरूरी

न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP को लेकर भी शर्मा ने अपनी राय रखी है। उनका कहना है कि किसानों को ऐसी व्यवस्था चाहिए जिसमें उन्हें अपनी फसल के लिए न्यूनतम लाभकारी मूल्य मिलने का भरोसा हो।

उनके मुताबिक, कृषि उत्पादों की कीमतों को पूरी तरह बाजार की ताकतों के भरोसे छोड़ना किसानों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। उत्पादन लागत, मौसम और बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव का सीधा असर किसानों की आमदनी पर पड़ता है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि सरकार को हर फसल की पूरी खरीद करनी ही होगी। उनके अनुसार, ऐसी प्रभावी व्यवस्था बनाई जा सकती है जो किसानों को कीमतों में भारी गिरावट से सुरक्षा दे।

खेत और बाजार के बीच कीमत का बड़ा अंतर

शर्मा ने कृषि सप्लाई चेन में किसानों की हिस्सेदारी का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि कई बार उपभोक्ता जिस कीमत पर कृषि उत्पाद खरीदता है, उसका छोटा हिस्सा ही किसान तक पहुंचता है।

उन्होंने पंजाब के किन्नू किसानों का उदाहरण देते हुए कृषि उत्पादों की खेत से बाजार तक की कीमतों में अंतर की ओर ध्यान दिलाया। उनके मुताबिक, यह दिखाता है कि कृषि बाजारों में अभी भी ऐसे सुधारों की जरूरत है जिनसे किसान को अपनी उपज के अंतिम मूल्य में बेहतर हिस्सा मिल सके।

किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य अभी भी चुनौती

देविंदर शर्मा इस बात से सहमत नहीं हैं कि किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य पूरी तरह हासिल हो चुका है। उनके मुताबिक, देश में कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई है और कई फसलों का रिकॉर्ड उत्पादन भी हुआ है, लेकिन उत्पादन बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि किसान की आय भी उसी अनुपात में बढ़ी है।

उनका कहना है कि किसानों की सबसे बड़ी समस्या सिर्फ उत्पादकता नहीं बल्कि उपज का सही दाम और स्थिर आय है।

उनके अनुसार, अगर किसान रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद बाजार में कम कीमत पर अपनी फसल बेचने के लिए मजबूर है तो केवल उत्पादन बढ़ाने की रणनीति पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।

कृषि नीति में लॉन्ग टर्म सोच की जरूरत

देविंदर शर्मा की पूरी दलील का केंद्र यही है कि भारत को कृषि नीति बनाते समय तत्काल फायदे के बजाय लंबे समय के प्रभावों को ध्यान में रखना चाहिए।

इथेनॉल से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है, लेकिन इसके लिए कृषि उपज को भोजन से ईंधन की ओर मोड़ने के असर का आकलन भी जरूरी है। इसी तरह फर्टिलाइजर सब्सिडी किसानों को राहत दे सकती है, लेकिन मिट्टी और पर्यावरण पर उसके प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

कृषि क्षेत्र के लिए ऐसी नीति की जरूरत है जो किसान की आय, खाद्य सुरक्षा, पानी, मिट्टी, पर्यावरण और ऊर्जा जरूरतों के बीच संतुलन बनाए। शर्मा के मुताबिक, भारत को अपनी परिस्थितियों के अनुसार कृषि मॉडल विकसित करना होगा, न कि दूसरे देशों की नीतियों की आंख बंद करके नकल करनी होगी।

You Might Also Like

अदाणी ग्रुप का बड़ा कदम, भारत में ही बनेगी AK-203 राइफल की गोलियां, सेना को मिलेगा घरेलू सपोर्ट

UPTET 2026 Result: रिजल्ट से हैं नाखुश तो 10 सितंबर तक दर्ज करें आपत्ति, जानें पूरा तरीका

अनिल कपूर ने लूट ली महफिल, रिलीज हुआ ‘इंडिया के टॉप 1%’ का नया टीजर, झक्कास अंदाज में दिखे कपूर साहब

Refurbished Phone खरीदने से पहले 8 चीजें जरूर चेक करें, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान

भारत में तेजी से बढ़ रहा मेकअप का कारोबार, HUL से Nykaa तक ये 10 कंपनियां हैं सबसे चर्चित

TAGGED: Agriculture Policy, Ethanol Policy India, Fertilizer Subsidy, food security, MSP, MSP कानून, इथेनॉल नीति, किसान आय, कृषि नीति, खाद्य सुरक्षा, देविंदर शर्मा, फर्टिलाइजर सब्सिडी
Share This Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Share
By Namam Sharma Senior Editor – Newsjagran
Follow:
नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
Previous Article insurance-claim-rejected-alcohol-habit-consumer-commission-nagpur शराब की आदत बताने पर भी इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट नहीं कर सकती कंपनी, देना होगा ₹50 लाख
Next Article us-debt-40-trillion-dollar-impact-on-india America Debt Crisis: 40 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज से बढ़ी चिंता, भारत के लिए क्या है खतरा?

आज के लाइव रेट्स

  • आज का सोने का भाव
  • आज का चांदी का भाव
  • आज का पेट्रोल-डीजल भाव
  • आज का LPG रेट
  • CNG रेट
  • PNG रेट
  • कच्चे तेल का भाव
  • डॉलर-रुपया रेट
  • IPO GMP Today

सबसे ज्यादा पढ़ी गई खबरें

ipo-gmp-today-mainboard-sme
Current IPO GMP Today: आज कौन सा IPO दे सकता है सबसे ज्यादा मुनाफा? 33 इश्यू का GMP, सब्सक्रिप्शन और लिस्टिंग डेट देखें
शेयर बाज़ार फाइनेंस
crude-oil-price-today
Crude Oil Price Today: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट या तेजी? जानिए आज का लेटेस्ट अपडेट
कमोडिटी फाइनेंस
png-price-today
PNG Price Today: आज भारत के प्रमुख शहरों में PNG गैस के ताजा रेट
कमोडिटी फाइनेंस
cng-price-today
CNG Price Today: आज भारत के प्रमुख शहरों में CNG के ताजा रेट
कमोडिटी फाइनेंस
lpg-price-today
LPG Price Today: आज भारत के प्रमुख शहरों में घरेलू और कमर्शियल LPG सिलेंडर के ताजा रेट
कमोडिटी फाइनेंस
live-petrol-diesel-price
Petrol Diesel Price Today: आज आपके शहर में पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट
कमोडिटी फाइनेंस
gold-price-today
Gold Price Today: आज भारत के प्रमुख शहरों में 24K, 22K और 18K सोने के ताजा रेट
कमोडिटी फाइनेंस
silver-price-today
Silver Price Today: आज भारत के प्रमुख शहरों में चांदी के ताजा रेट
कमोडिटी फाइनेंस
government-spending-as-percent-of-gdp-kiribati-marshall-islands-ukraine
USD/INR Live Chart: डॉलर बनाम रुपया, आज का एक्सचेंज रेट, लाइव चार्ट और पूरा विश्लेषण
फाइनेंस
bitcoin-price-today-live-chart-hindi
Bitcoin Price Today: लाइव बिटकॉइन प्राइस, चार्ट, मार्केट कैप और निवेश से पहले जानें जरूरी बातें
फाइनेंस

महत्वपूर्ण पृष्ठ

  • बिजनेस न्यूज़
  • कमोडिटी
  • शेयर बाज़ार

त्वरित लिंक्स

  • 8 वेतन आयोग
  • सरकारी योजनाएं
  • बिजनेस न्यूज़
  • Advertise With Us
  • अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
  • Terms of Service

Discover News Jagran

  • About Us
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer & Affiliate Disclosure
  • Editorial Policy
  • Author Bio & Team
  • Career

आज के लाइव रेट्स

  • आज का सोने का भाव
  • आज का चांदी का भाव
  • आज का पेट्रोल-डीजल भाव
  • आज का LPG रेट
  • CNG रेट
  • PNG रेट
  • कच्चे तेल का भाव
  • डॉलर-रुपया रेट
  • IPO GMP Today
NewsjagranNewsjagran
© 2026 News Jagran Digital Media | Google News Approved | MSME: Udyam-HR-05-0178310
  • बिजनेस न्यूज़
  • कमोडिटी
  • शेयर बाज़ार
Manage Consent
To provide the best experiences, we use technologies like cookies to store and/or access device information. Consenting to these technologies will allow us to process data such as browsing behaviour or unique IDs on this site. Not consenting or withdrawing consent, may adversely affect certain features and functions.
Functional Always active
The technical storage or access is strictly necessary for the legitimate purpose of enabling the use of a specific service explicitly requested by the subscriber or user, or for the sole purpose of carrying out the transmission of a communication over an electronic communications network.
Preferences
The technical storage or access is necessary for the legitimate purpose of storing preferences that are not requested by the subscriber or user.
Statistics
The technical storage or access that is used exclusively for statistical purposes. The technical storage or access that is used exclusively for anonymous statistical purposes. Without a subpoena, voluntary compliance on the part of your Internet Service Provider, or additional records from a third party, information stored or retrieved for this purpose alone cannot usually be used to identify you.
Marketing
The technical storage or access is required to create user profiles to send advertising, or to track the user on a website or across several websites for similar marketing purposes.
  • Manage options
  • Manage services
  • Manage {vendor_count} vendors
  • Read more about these purposes
View preferences
  • {title}
  • {title}
  • {title}
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?