Volkswagen Layoffs: जर्मनी की दिग्गज ऑटोमोबाइल कंपनी Volkswagen अपने कारोबार को नए सिरे से व्यवस्थित करने की तैयारी में है। कंपनी के सुपरवाइजरी बोर्ड ने ‘Future Plan 2030’ को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत दुनियाभर में करीब 50,000 अतिरिक्त नौकरियां कम करने, 2035 तक व्हीकल मॉडल लाइनअप को लगभग आधा करने और आने वाले वर्षों में पूंजीगत खर्च घटाने जैसी योजनाएं शामिल हैं।
यह Volkswagen के करीब 89 साल के इतिहास में सबसे बड़े रीस्ट्रक्चरिंग प्लान में से एक है। कंपनी पर ग्लोबल प्रतिस्पर्धा, कमजोर चीनी ऑटो बाजार, अमेरिका के इंपोर्ट टैरिफ और तेजी से बदलती ऑटो टेक्नोलॉजी का दबाव है।
50 हजार और नौकरियों में कटौती की मंजूरी
Volkswagen के नए प्लान के मुताबिक कंपनी दुनियाभर में अपनी वर्कफोर्स और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को कम करने जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी के मैनेजमेंट और यूनियनों के बीच इस दशक के अंत तक कुल 1 लाख नौकरियां कम करने पर सहमति बन चुकी है।
इसमें करीब 50,000 नौकरियों में कटौती का फैसला पहले ही लिया जा चुका था, जबकि अब लगभग 50,000 अतिरिक्त नौकरियों को कम करने की योजना को आगे बढ़ाया गया है।
कंपनी का लक्ष्य लागत कम करने के साथ-साथ अपने कारोबार को इलेक्ट्रिक व्हीकल, नई टेक्नोलॉजी और बदलती वैश्विक मांग के अनुरूप तैयार करना है।
2035 तक आधे हो सकते हैं Volkswagen के मॉडल
‘Future Plan 2030’ में केवल कर्मचारियों की संख्या घटाना ही शामिल नहीं है। कंपनी अपने व्हीकल पोर्टफोलियो को भी काफी छोटा करने की तैयारी में है।
योजना के तहत 2035 तक Volkswagen के व्हीकल मॉडल लाइनअप को लगभग आधा किया जा सकता है। इसके अलावा 2027 से 2031 के बीच कंपनी अपने कैपिटल एक्सपेंडिचर में करीब 16 फीसदी तक कटौती करने की योजना बना रही है।
जर्मनी में कंपनी के चार ऐसे प्लांट भी हैं, जहां मौजूदा मॉडल आने वाले वर्षों में बंद हो सकते हैं। इनके भविष्य को लेकर वैकल्पिक इस्तेमाल और दूसरे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
क्यों दबाव में है Volkswagen?
Volkswagen को इस समय कई मोर्चों पर चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी चुनौतियों में चीन का कमजोर ऑटोमोबाइल बाजार, बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा और अमेरिका की टैरिफ नीति शामिल हैं।
चीन Volkswagen के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण बाजार रहा है, लेकिन वहां घरेलू इलेक्ट्रिक कार कंपनियों से प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ी है। वहीं दुनिया भर में इलेक्ट्रिक वाहनों और नई ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी में तेजी से बदलाव हो रहा है।
ऐसे में कंपनी को लागत घटाने और अपनी उत्पादन क्षमता को मांग के मुताबिक ढालने की जरूरत महसूस हो रही है।
Volkswagen India में भी 12% नौकरियों पर कैंची
Volkswagen के ग्लोबल रीस्ट्रक्चरिंग प्लान का असर भारत में भी देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक Volkswagen Group की भारतीय यूनिट अपनी वर्कफोर्स में करीब 12 फीसदी की कटौती करने की तैयारी कर रही है।
कंपनी भारत में अपने तीन साल के रीस्ट्रक्चरिंग प्लान को तेज कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रक्रिया की शुरुआत 2025 में हुई थी और 2027 तक छंटनी की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है।
इस दौरान कुछ सौ व्हाइट-कॉलर और शॉप-फ्लोर कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित होने की संभावना बताई गई है।
भारत में Volkswagen Group की कंपनियों के संचालन के लिए Skoda Auto Volkswagen India Private Limited महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
अगली पीढ़ी की कारों से पहले लागत घटाने पर जोर
भारत में नौकरियों में कटौती की संभावित वजह कंपनी का अगला निवेश चक्र भी माना जा रहा है। Volkswagen Group भारत में अपनी अगली पीढ़ी की कारों और नए मॉडल्स के लिए तैयारी कर रहा है।
कंपनी लागत को नियंत्रित करके भविष्य के निवेश के लिए अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत करना चाहती है। हालांकि, इसका मतलब भारत से पीछे हटना नहीं है।
इसके उलट कंपनी अपनी लोकल इंजीनियरिंग क्षमता बढ़ाने और भारत को ग्रुप के लिए एक प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित करने पर भी ध्यान दे सकती है।
भारत में Volkswagen की मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी
Volkswagen को भारत में काम करते हुए दो दशक से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन भारतीय कार बाजार में कंपनी की मौजूदगी अभी भी कुछ बड़े घरेलू और विदेशी प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में सीमित है।
ऐसे में मौजूदा रीस्ट्रक्चरिंग को केवल नौकरी में कटौती के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता। कंपनी एक तरफ खर्च कम करने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ भारत में भविष्य के मॉडल, इंजीनियरिंग और एक्सपोर्ट क्षमता पर निवेश बढ़ाने की संभावना भी है।
यानी Volkswagen India के लिए आने वाले कुछ साल कॉस्ट कटिंग और नए निवेश—दोनों का दौर हो सकते हैं।
Volkswagen के लिए आगे की राह
Volkswagen का ‘Future Plan 2030’ बताता है कि दुनिया की बड़ी ऑटो कंपनियों के सामने अब केवल ज्यादा कार बेचने की चुनौती नहीं है। उन्हें इलेक्ट्रिक व्हीकल, सॉफ्टवेयर, नई मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी और चीन जैसे बाजारों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी लागत संरचना को भी बदलना पड़ रहा है।
कंपनी का ताजा फैसला इसी व्यापक बदलाव का हिस्सा है। हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर नौकरियों में कटौती का असर कर्मचारियों के साथ-साथ कंपनी के जर्मनी और अन्य देशों में मौजूद मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क पर भी पड़ सकता है।
डिस्क्लेमर: नौकरियों में कटौती से जुड़े आंकड़े मीडिया रिपोर्ट्स और उपलब्ध कंपनी/यूनियन संबंधी जानकारी पर आधारित हैं। अंतिम संख्या और प्रभावित कर्मचारियों की संख्या कंपनी की आगे की आधिकारिक घोषणाओं के अनुसार बदल सकती है।


