Mushroom Farming Success Story: महाराष्ट्र के लोणी के रहने वाले धनंजय विखे पाटिल ने मशरूम की खेती की शुरुआत बेहद छोटे स्तर से की थी। 12वीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान उन्होंने घर के महज 100 वर्ग फुट हिस्से में ऑयस्टर मशरूम उगाने का प्रयोग किया। पहली कोशिश में असफलता मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। दोबारा प्रयास किया और धीरे-धीरे खेती के साथ ट्रेडिंग, वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स और ट्रेनिंग को जोड़कर कारोबार खड़ा कर लिया। आज उनके मुताबिक, उनका पूरा मशरूम बिजनेस करीब ₹4 लाख प्रति महीने का है।
₹15,000 की ट्रेनिंग लेकर शुरू किया काम
धनंजय को स्कूल के दिनों से ही मशरूम की खेती में रुचि थी। इसी रुचि के चलते उन्होंने पुणे में मशरूम उत्पादन की एक दिन की ट्रेनिंग ली। इसके लिए उन्होंने करीब ₹15,000 खर्च किए और ऑयस्टर मशरूम का किट लेकर घर के सिर्फ 100 वर्ग फुट हिस्से में उत्पादन शुरू किया।
हालांकि, पहली कोशिश में उन्हें सफलता नहीं मिली। शुरुआती ट्रेनिंग और व्यावहारिक अनुभव की कमी के कारण उनका पहला प्रयोग असफल रहा। लेकिन इस नाकामी को उन्होंने सीख के तौर पर लिया और दोबारा मशरूम उत्पादन शुरू करने का फैसला किया।
दूसरी कोशिश में ₹3,000 की कमाई
दूसरी बार धनंजय ने करीब ₹1,000 में 4 किलो मशरूम स्पॉन खरीदा और लगभग 50 बैग तैयार किए। इस बार उन्हें उत्पादन मिला और उन्होंने स्थानीय बाजार में मशरूम बेचकर करीब ₹3,000 की कमाई की।
भले ही यह रकम बहुत बड़ी नहीं थी, लेकिन इस सफलता ने उन्हें यह भरोसा दिया कि छोटे स्तर पर मशरूम का उत्पादन करके इसे बाजार में बेचा जा सकता है।
इसके बाद उन्होंने स्थानीय किसानों और दूसरे मशरूम उत्पादकों से सीखना शुरू किया। सोशल मीडिया और YouTube के जरिए भी उन्होंने मशरूम की खेती, उत्पादन तकनीक और बाजार से जुड़ी जानकारी हासिल की।
पढ़ाई के साथ जारी रखी मशरूम की खेती
धनंजय ने आगे BSc Biotechnology में दाखिला लिया। पढ़ाई के साथ उन्होंने मशरूम का काम भी जारी रखा। बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई से उन्हें मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक प्रक्रिया को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिली।
बाद में उन्होंने 2021 में MSc Biotechnology में भी दाखिला लिया। इसी दौरान उन्हें यह समझ आया कि किसी कृषि कारोबार को बड़ा बनाने के लिए सिर्फ उत्पादन बढ़ाना काफी नहीं है। उत्पादन के साथ बाजार, बिक्री और सप्लाई नेटवर्क पर भी ध्यान देना जरूरी है।
100 वर्ग फुट से 1,000 वर्ग फुट की यूनिट तक सफर
घर के 100 वर्ग फुट हिस्से से शुरू हुआ यह काम धीरे-धीरे बढ़ने लगा। कोविड के दौर में मशरूम की मांग बढ़ने के बाद धनंजय ने अपनी जमीन पर करीब 1,000 वर्ग फुट का शेड तैयार किया।
बांस से तैयार इस यूनिट में उन्होंने मशरूम का उत्पादन शुरू किया। शुरुआती दौर में यहां हर महीने लगभग 300-400 किलो मशरूम का उत्पादन होने लगा। इससे उनकी मासिक आमदनी करीब ₹40,000 तक पहुंच गई।
समय के साथ अनुभव बढ़ा और सोशल मीडिया के जरिए उनकी पहचान भी बनी। इसके बाद दूसरे किसान और युवा भी उनसे मशरूम की खेती सीखने के लिए संपर्क करने लगे।
सिर्फ अपनी फसल बेचने तक सीमित नहीं रहे
धनंजय ने अपने बिजनेस को बढ़ाने के लिए खेती के साथ मशरूम ट्रेडिंग भी शुरू की। उन्होंने दूसरे किसानों से ऑयस्टर मशरूम खरीदकर उसे थोक खरीदारों तक पहुंचाना शुरू किया।
इस मॉडल से उन्हें यह फायदा हुआ कि बिजनेस बढ़ाने के लिए सिर्फ अपनी जमीन या अपनी उत्पादन क्षमता पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं थी।
उन्होंने किसानों और खरीदारों के बीच एक नेटवर्क तैयार किया। किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बाजार मिला, जबकि खरीदारों को नियमित सप्लाई उपलब्ध होने लगी।
अब करीब 1,000 किलो मशरूम का उत्पादन
आज धनंजय की करीब 1,000 वर्ग फुट की यूनिट में 900-1,000 बैग उत्पादन में रहते हैं। वह मुख्य रूप से ऑयस्टर मशरूम उगाते हैं। गर्मियों के मौसम में वह मिल्की मशरूम का उत्पादन भी करते हैं।
उनके मुताबिक, यूनिट से हर महीने करीब 1,000 किलो मशरूम निकलता है। बाजार की स्थिति के अनुसार इसकी बिक्री कीमत लगभग ₹160-₹180 प्रति किलो तक रहती है।
सिर्फ अपनी खेती से उनकी मासिक कमाई करीब ₹1.8-2 लाख तक पहुंचती है।
ताजे मशरूम के साथ पाउडर और कुकीज भी
कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए धनंजय ने मशरूम से बनने वाले दूसरे उत्पादों पर भी काम किया। उन्होंने सूखे मशरूम से मशरूम पाउडर बनाना शुरू किया। इसके अलावा मशरूम से कुकीज भी तैयार की जाती हैं।
उनके मुताबिक, वह किसानों से सूखा ऑयस्टर मशरूम करीब ₹800 प्रति किलो में खरीदते हैं और उससे तैयार मशरूम पाउडर करीब ₹1,600 प्रति किलो तक बेचते हैं।
वहीं, करीब 200 ग्राम मशरूम कुकीज का पैक ₹120 में तैयार किया जाता है।
वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स और ट्रेडिंग को मिलाकर उनके मुताबिक इन गतिविधियों से उन्हें हर महीने ₹2 लाख से ज्यादा की कमाई होती है।
अब मशरूम की खेती की ट्रेनिंग भी देते हैं
धनंजय ने अपने अनुभव को ट्रेनिंग के जरिए भी बिजनेस मॉडल का हिस्सा बनाया है। वह ऑनलाइन क्लास के माध्यम से लोगों को मशरूम उत्पादन की जानकारी देते हैं।
ऑयस्टर मशरूम के अलावा वह शिटाके और गैनोडर्मा जैसी किस्मों की खेती से जुड़ी ट्रेनिंग भी देते हैं।
उनके सामान्य ट्रेनिंग बैच में करीब चार-पांच लोग होते हैं। ट्रेनिंग की फीस लगभग ₹5,000 प्रति व्यक्ति बताई गई है। इसमें यूनिट शुरू करने की जानकारी, मशरूम उत्पादन की ट्रेनिंग और स्टार्टर किट शामिल होती है।
खास बात यह है कि ट्रेनिंग लेने वाले किसानों के मशरूम तैयार होने के बाद उनकी उपज को बाजार तक पहुंचाने में भी मदद की जाती है।
₹3,000 की पहली कमाई से ₹4 लाख महीने तक पहुंचा कारोबार
धनंजय की कहानी यह दिखाती है कि खेती को सिर्फ उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय उससे जुड़े दूसरे बिजनेस मॉडल भी विकसित किए जा सकते हैं।
उन्होंने शुरुआत सिर्फ 100 वर्ग फुट जगह और करीब 50 बैग से की थी। पहली कोशिश में असफलता मिली, लेकिन दोबारा प्रयास करके उन्होंने उत्पादन शुरू किया। इसके बाद खेती के साथ ट्रेडिंग, वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स और ट्रेनिंग को जोड़ा।
धनंजय के मुताबिक, आज उनका पूरा मशरूम कारोबार करीब ₹4 लाख प्रति महीने का है। हालांकि, किसी भी कृषि व्यवसाय की कमाई उत्पादन, मौसम, लागत, बाजार भाव और बिक्री नेटवर्क जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है। इसलिए इस तरह की सफलता को हर किसान की निश्चित कमाई के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।


