भारतीय रेलवे देश की परिवहन व्यवस्था की सबसे अहम कड़ियों में से एक है। रोजाना करोड़ों लोग ट्रेन से सफर करते हैं और लाखों टन सामान भी रेल नेटवर्क के जरिए एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जाता है। भारत ही नहीं, जापान, चीन, अमेरिका और रूस जैसे देशों की अर्थव्यवस्था में भी रेलवे की बड़ी भूमिका है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में आज भी कई ऐसे देश हैं जहां राष्ट्रीय स्तर पर रेलवे नेटवर्क मौजूद नहीं है? इनमें कुछ बेहद छोटे द्वीपीय देश हैं, तो कुछ ऐसे देश भी हैं जहां भौगोलिक परिस्थितियां रेल लाइन बिछाने के रास्ते में बड़ी चुनौती बनती हैं। हैरानी की बात यह है कि भारत का पड़ोसी भूटान भी लंबे समय तक उन देशों में शामिल रहा है जहां रेलवे नेटवर्क नहीं था।
दुनिया के करीब 27-30 देशों में नहीं है रेलवे नेटवर्क
दुनिया के करीब 27 से 30 देशों को ऐसे देशों की सूची में रखा जाता है जहां नियमित राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क नहीं है। इनमें अंडोरा, साइप्रस, ईस्ट तिमोर, मॉरीशस, सोलोमन आइलैंड्स, माइक्रोनेशिया, नाइजर, ओमान, पापुआ न्यू गिनी, गिनी-बिसाऊ, आइसलैंड, कुवैत, लीबिया, माल्टा, मार्शल आइलैंड्स, कतर, रवांडा, सैन मैरिनो, सोमालिया, सूरीनाम, टोंगा, त्रिनिदाद एंड टोबैगो, तुवालू, वनुआतू और यमन जैसे देश शामिल हैं।
इन देशों में रेलवे न होने की वजह हर जगह एक जैसी नहीं है। कहीं पहाड़ और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां बड़ी समस्या हैं, कहीं देश का आकार बहुत छोटा है, तो कहीं सड़क परिवहन पहले से इतना मजबूत है कि रेलवे विकसित करने की जरूरत महसूस नहीं हुई।
भारत का पड़ोसी भूटान भी क्यों रहा रेलवे से दूर?
भारत के पड़ोसी देश भूटान का उदाहरण काफी दिलचस्प है। भूटान हिमालयी क्षेत्र में स्थित है और इसका बड़ा हिस्सा पहाड़ी तथा दुर्गम इलाकों से घिरा हुआ है।
रेलवे लाइन बिछाने के लिए जमीन को समतल करना, सुरंगें बनाना, पुल तैयार करना और पहाड़ों के बीच सुरक्षित ट्रैक तैयार करना बेहद महंगा और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यही वजह रही कि लंबे समय तक भूटान में नियमित रेलवे नेटवर्क विकसित नहीं हो सका।
हालांकि अब भारत और भूटान के बीच रेलवे कनेक्टिविटी बढ़ाने की दिशा में परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। भविष्य में रेल संपर्क दोनों देशों के बीच व्यापार और आवागमन को और आसान बना सकता है।
आइसलैंड में क्यों नहीं बनी रेलवे?
आइसलैंड का नाम भी उन देशों में आता है जहां राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क नहीं है। इसका एक बड़ा कारण देश की कठिन प्राकृतिक परिस्थितियां हैं।
आइसलैंड में ज्वालामुखीय क्षेत्र, ग्लेशियर और ऊबड़-खाबड़ भूभाग मौजूद हैं। ऐसे वातावरण में बड़े पैमाने पर रेलवे ट्रैक का निर्माण और उसका रखरखाव आसान नहीं है।
इसके अलावा देश की आबादी और बाजार का आकार भी ऐसा नहीं रहा कि पारंपरिक रेलवे नेटवर्क में बड़े पैमाने पर निवेश करना हमेशा आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित हो।
छोटे द्वीपीय देशों के लिए रेलवे क्यों मुश्किल?
कई ऐसे देश हैं जिनका क्षेत्रफल छोटा है और जो कई छोटे-छोटे द्वीपों में बंटे हुए हैं। तुवालू, टोंगा, वनुआतू और मार्शल आइलैंड्स जैसे देशों में रेलवे नेटवर्क विकसित करना व्यावहारिक रूप से काफी मुश्किल हो सकता है।
रेलवे को एक प्रभावी परिवहन व्यवस्था बनाने के लिए पर्याप्त दूरी, यात्रियों की संख्या और माल ढुलाई की मांग जरूरी होती है। छोटे और अलग-अलग द्वीपों में यह मांग सीमित हो सकती है। ऐसे में सड़क, बस, नाव या हवाई परिवहन अधिक उपयोगी विकल्प बन जाते हैं।
कुवैत और ओमान में रेलवे की जरूरत क्यों कम महसूस हुई?
हर देश में रेलवे न होने की वजह सिर्फ भौगोलिक मुश्किलें नहीं हैं। कुवैत और ओमान जैसे देशों का उदाहरण बताता है कि परिवहन की मौजूदा व्यवस्था भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इन देशों में सड़क नेटवर्क और निजी वाहनों पर काफी निर्भरता रही है। तेल आधारित अर्थव्यवस्थाओं के कारण लंबे समय तक सड़क और हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी बड़ा निवेश हुआ। ऐसे में यात्री परिवहन की जरूरतों को पूरा करने के लिए सड़क व्यवस्था प्रमुख माध्यम बनी रही।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि इन देशों में रेल से जुड़ी कोई योजना नहीं है। खाड़ी क्षेत्र में कई देशों ने आधुनिक रेलवे और मेट्रो परियोजनाओं पर निवेश बढ़ाया है।
सिर्फ पैसे की कमी ही नहीं, कई वजहें जिम्मेदार
किसी देश में रेलवे नेटवर्क का न होना सिर्फ आर्थिक कमजोरी का संकेत नहीं है। इसके पीछे कई कारण एक साथ काम कर सकते हैं।
मुख्य कारणों में शामिल हैं:
- कठिन पहाड़ी और भौगोलिक परिस्थितियां
- छोटे क्षेत्रफल या कम आबादी
- अलग-अलग द्वीपों में बंटा हुआ भूभाग
- रेलवे निर्माण की बहुत अधिक लागत
- सीमित यात्री और माल ढुलाई की मांग
- मजबूत सड़क परिवहन नेटवर्क
- राजनीतिक अस्थिरता
- बुनियादी ढांचे में निवेश की कमी
यानी हर उस देश की परिस्थितियां अलग हैं जहां रेलवे नेटवर्क नहीं है।
भारत में रेलवे क्यों इतना महत्वपूर्ण है?
भारत जैसे विशाल और घनी आबादी वाले देश में रेलवे की उपयोगिता काफी ज्यादा है। देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक बड़ी संख्या में यात्रियों को ले जाने के साथ-साथ कोयला, अनाज, सीमेंट, पेट्रोलियम उत्पाद और अन्य माल की ढुलाई में भी रेलवे अहम भूमिका निभाता है।
यही वजह है कि भारत में रेलवे सिर्फ यात्रा का साधन नहीं बल्कि लॉजिस्टिक्स, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण आधार भी है।
दूसरी तरफ छोटे देशों में जहां आबादी कम है, दूरी कम है या भौगोलिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं, वहां रेलवे का आर्थिक मॉडल उतना मजबूत नहीं हो सकता।
निष्कर्ष
दुनिया के जिन देशों में आज भी राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क नहीं है, वहां इसके पीछे कोई एक कारण नहीं है। भूटान में पहाड़ और कठिन भूभाग, आइसलैंड में प्राकृतिक परिस्थितियां, छोटे द्वीपीय देशों में भौगोलिक बिखराव और कुछ खाड़ी देशों में सड़क परिवहन की मजबूत भूमिका इसके अलग-अलग उदाहरण हैं।
इसलिए किसी देश में रेल नेटवर्क का होना या न होना उसके आकार, आबादी, भूगोल, अर्थव्यवस्था और परिवहन जरूरतों पर निर्भर करता है।


