BSE Share Price: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के प्रस्तावित IPO को 4 सितंबर को SEBI की मंजूरी मिलने के बाद शेयर बाजार में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। NSE के IPO का रास्ता साफ होने के बीच BSE के शेयरों में भी जोरदार हलचल देखने को मिली। अब निवेशकों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या NSE के IPO से पहले BSE के शेयरों में पैसा लगाना फायदे का सौदा हो सकता है?
4 सितंबर के कारोबारी सत्र में BSE के शेयरों में 3 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखने को मिली और शेयर करीब ₹3,411 के स्तर पर बंद हुआ। इससे एक दिन पहले भी इसमें बढ़त दर्ज की गई थी। इस तेजी के पीछे NSE के IPO से जुड़े घटनाक्रम के साथ-साथ BSE के मैनेजमेंट की ओर से दिए गए बयान को भी एक अहम वजह माना जा रहा है।
इस साल अब तक BSE के शेयर में करीब 30 फीसदी की बढ़त देखने को मिल चुकी है। हालांकि, शेयर अपने साल के ऊपरी स्तर से काफी नीचे कारोबार कर रहा है। ऐसे में मौजूदा स्तर पर निवेशकों के सामने तेजी की संभावना के साथ जोखिम भी मौजूद है।
NSE IPO को SEBI की मंजूरी से क्यों बढ़ी हलचल?
4 सितंबर को NSE के IPO को SEBI की मंजूरी मिलना भारतीय कैपिटल मार्केट के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। इसके साथ ही NSE के सार्वजनिक बाजार में आने की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है।
NSE के IPO की चर्चा का सीधा असर BSE के शेयरों पर भी पड़ रहा है, क्योंकि दोनों एक्सचेंज भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख खिलाड़ी हैं। NSE के IPO के बाद उसके शेयरों की संभावित लिस्टिंग और एक्सचेंज के बिजनेस मॉडल को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ गई है।
इसी बीच BSE के MD और CEO की ओर से यह संकेत दिया गया कि IPO के बाद NSE अपने ही प्लेटफॉर्म पर अपने शेयरों को लिस्ट नहीं करा सकता। इस खबर को BSE के लिए सकारात्मक माना गया और शेयर में खरीदारी बढ़ी।
ऑल-टाइम हाई से नीचे आया BSE Share
मार्केट एनालिस्ट मयंक जैन के मुताबिक, BSE के शेयर ने इस साल की शुरुआत में करीब ₹4,500 का हाई बनाया था। इसके बाद शेयर में लगातार मुनाफावसूली देखने को मिली और कीमत नीचे आई।
हालांकि, करीब ₹3,265 के 200-Day Simple Moving Average (200-DMA/SMA) के आसपास शेयर को सपोर्ट मिला। इस स्तर पर खरीदारी लौटने से शेयर में दोबारा मजबूती देखने को मिली है।
टेक्निकल एनालिसिस में 200-डे मूविंग एवरेज को लंबे समय के ट्रेंड का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। इसलिए इस स्तर के ऊपर शेयर का टिके रहना निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत हो सकता है।
₹3,550 के स्तर पर है अहम रेसिस्टेंस
मयंक जैन के अनुसार, डेली चार्ट पर BSE Share को लगभग ₹3,265 के आसपास सपोर्ट मिला है। अब शेयर के लिए करीब ₹3,550 का स्तर महत्वपूर्ण रेसिस्टेंस माना जा रहा है।
₹3,550 के आसपास 50-डे मूविंग एवरेज भी मौजूद है। अगर शेयर इस रेसिस्टेंस को मजबूती से पार करता है और उसके ऊपर टिकने में कामयाब रहता है, तो शॉर्ट टर्म में ट्रेंड में सुधार की पुष्टि हो सकती है।
इसके बाद शेयर में आगे की तेजी के लिए नई संभावनाएं बन सकती हैं। हालांकि, केवल किसी एक टेक्निकल लेवल के टूटने को खरीदारी का निश्चित संकेत नहीं माना जा सकता।
CAS को लेकर SEBI के रुख से भी BSE को मिला सपोर्ट
BSE के शेयरों में हालिया तेजी का एक अन्य कारण SEBI का Closing Auction Session (CAS) को लेकर दिया गया संकेत भी माना जा रहा है।
CAS की शुरुआत 3 अगस्त से हुई थी। इसके लागू होने के बाद खासकर एक्सपायरी के आसपास बाजार में उतार-चढ़ाव को लेकर चर्चा बढ़ी। SEBI को CAS व्यवस्था के संबंध में बाजार के अलग-अलग हिस्सों से फीडबैक मिला है।
SEBI अब मिले फीडबैक की समीक्षा कर रहा है। इसके बाद CAS से जुड़े नियमों या व्यवस्था में बदलाव की संभावना पर विचार किया जा सकता है।
निवेशकों के लिए यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि BSE के कारोबार और ट्रेडिंग गतिविधियों पर बाजार में होने वाले बदलावों का असर पड़ सकता है।
शॉर्ट टर्म में BSE Share में पुलबैक संभव?
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के वाइस प्रेसिडेंट रुचित जैन के मुताबिक, BSE का शेयर अपने करीब ₹4,400 के हाई से गिरकर ₹3,200 के आसपास आ चुका है।
उन्होंने RSI यानी Relative Strength Index का हवाला देते हुए बताया कि शेयर ओवरसोल्ड जोन में दिखाई दे रहा है। इसका मतलब यह है कि हाल की गिरावट के बाद तकनीकी आधार पर शेयर में कुछ रिकवरी की गुंजाइश बन सकती है।
हालांकि, उनके मुताबिक शॉर्ट टर्म में किसी मजबूत पुलबैक के लिए शेयर का ₹3,200-₹3,150 के सपोर्ट जोन के ऊपर बने रहना जरूरी होगा।
अगर यह सपोर्ट टूटता है तो निवेशकों को सावधानी बरतनी होगी, क्योंकि इससे शेयर पर दोबारा बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।
NSE के अपने प्लेटफॉर्म पर लिस्टिंग को लेकर क्या है मामला?
PL Capital की एक रिपोर्ट में NSE के शेयरों की संभावित लिस्टिंग को लेकर BSE पर पड़ने वाले प्रभाव का भी जिक्र किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, अगर NSE के शेयर उसके खुद के प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होते, तो इसका FY27 में BSE की कमाई पर असर पड़ने की संभावना हो सकती थी। हालांकि, मौजूदा नियमों और एक्सचेंज स्ट्रक्चर को देखते हुए NSE के शेयरों की अपने ही प्लेटफॉर्म पर लिस्टिंग की संभावना नहीं दिखती।
यही वजह है कि NSE IPO को लेकर BSE के शेयर में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि BSE का शेयर केवल NSE IPO की वजह से लगातार ऊपर ही जाएगा।
क्या NSE IPO से पहले BSE में निवेश करना चाहिए?
यह सवाल निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। मौजूदा घटनाक्रम BSE के लिए कुछ सकारात्मक संकेत जरूर दे रहे हैं। NSE IPO की मंजूरी, अपने प्लेटफॉर्म पर NSE की संभावित लिस्टिंग को लेकर स्थिति और CAS में संभावित बदलाव जैसे कारक BSE के शेयर को सपोर्ट कर सकते हैं।
इसके अलावा, शेयर को 200-DMA के आसपास सपोर्ट मिलना और RSI का ओवरसोल्ड संकेत भी शॉर्ट टर्म में सकारात्मक माना जा सकता है।
लेकिन दूसरी तरफ, BSE का शेयर अपने साल के हाई से काफी नीचे है और हाल के महीनों में इसमें अच्छी-खासी अस्थिरता भी रही है। इसलिए केवल NSE IPO की खबर देखकर जल्दबाजी में निवेश करना उचित नहीं होगा।
निवेशकों को खासतौर पर ₹3,150-₹3,200 के सपोर्ट जोन और करीब ₹3,550 के रेसिस्टेंस पर नजर रखनी चाहिए। इन स्तरों के आसपास शेयर का व्यवहार आगे की दिशा के बारे में बेहतर संकेत दे सकता है।
निवेशकों के लिए जरूरी बात
BSE और NSE दोनों ही भारतीय शेयर बाजार के महत्वपूर्ण संस्थान हैं और इनके बिजनेस में रेगुलेटरी बदलाव, ट्रेडिंग वॉल्यूम, डेरिवेटिव्स गतिविधि और बाजार की परिस्थितियां अहम भूमिका निभाती हैं।
इसलिए BSE Share में निवेश का फैसला केवल NSE IPO को आधार बनाकर नहीं लेना चाहिए। निवेश से पहले कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, वैल्यूएशन, जोखिम और अपनी निवेश अवधि को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध बाजार जानकारी और विशेषज्ञों के तकनीकी विश्लेषण पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी को निवेश सलाह या शेयर खरीदने-बेचने की सिफारिश न समझें। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।


