Diesel Price in USA: अमेरिका में डीजल की कीमत रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है। ईरान और यूक्रेन से जुड़े संघर्षों के कारण ग्लोबल फ्यूल सप्लाई पर दबाव बढ़ा है। इसका असर अमेरिकी बाजार में डीजल की कीमतों के साथ-साथ इसके स्टॉक पर भी देखने को मिल रहा है।
नई दिल्ली: अमेरिका में डीजल की कीमतों ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। ईरान से जुड़े बढ़ते तनाव और रूस की रिफाइनरियों पर यूक्रेन के हमलों के कारण वैश्विक स्तर पर फ्यूल सप्लाई प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर अमेरिका के डीजल बाजार पर पड़ा है। कीमतों में तेजी ऐसे समय आई है जब आने वाले महीनों में डीजल की मांग और बढ़ने की उम्मीद है।
डीजल केवल वाहनों में इस्तेमाल होने वाला ईंधन नहीं है। अमेरिका में ट्रकिंग, खेती, निर्माण और कई इंडस्ट्रियल गतिविधियां बड़े पैमाने पर डीजल पर निर्भर हैं। ऐसे में इसकी कीमत में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो इसका असर ट्रांसपोर्टेशन से लेकर खाने-पीने की चीजों तक की कीमतों पर पड़ सकता है।
अमेरिका में डीजल की कीमत रिकॉर्ड हाई पर
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्यूल प्राइस ट्रैक करने वाली सर्विस GasBuddy के आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में डीजल की राष्ट्रीय औसत कीमत बढ़कर 5.820 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गई है।
इससे पहले अमेरिका में डीजल की सबसे ऊंची औसत कीमत 17 जून 2022 को दर्ज की गई थी। उस समय रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद सप्लाई को लेकर पैदा हुई चिंताओं के बीच डीजल की कीमत 5.819 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई थी।
एक अमेरिकी गैलन करीब 3.785 लीटर के बराबर होता है। इस हिसाब से 5.820 डॉलर प्रति गैलन की कीमत करीब 1.53 डॉलर प्रति लीटर बैठती है।
15 जुलाई से लगातार 5 डॉलर के ऊपर कीमत
अमेरिका में डीजल की औसत कीमतें 15 जुलाई से 5 डॉलर प्रति गैलन के स्तर से ऊपर बनी हुई हैं। बाजार पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 अमेरिकी इतिहास में डीजल के लिए सबसे महंगा साल साबित हो सकता है।
आने वाले समय में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि सितंबर से डीजल की मौसमी मांग बढ़ने लगती है। अमेरिका में इस दौरान कृषि गतिविधियों के साथ-साथ माल ढुलाई की जरूरत भी बढ़ती है।
फसल कटाई से बढ़ेगी डीजल की मांग
अमेरिका में कृषि क्षेत्र डीजल का बड़ा उपभोक्ता है। फसल की कटाई और उससे जुड़ी गतिविधियों के दौरान ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और दूसरे कृषि उपकरणों में डीजल की खपत बढ़ जाती है।
इसके अलावा सर्दियों के हीटिंग सीजन से पहले हीटिंग ऑयल की मांग भी बढ़ने लगती है। डीजल और हीटिंग ऑयल बाजारों के आपसी संबंधों के कारण यह अतिरिक्त मांग फ्यूल मार्केट पर दबाव बढ़ा सकती है।
यही वजह है कि बाजार विशेषज्ञों को आशंका है कि यदि सप्लाई में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले महीनों में डीजल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।
महंगा डीजल बढ़ा सकता है महंगाई का दबाव
डीजल की कीमत बढ़ने का असर केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहता। अमेरिका में ट्रकों और दूसरे भारी वाहनों से बड़े पैमाने पर सामान की ढुलाई होती है। ऐसे में फ्यूल महंगा होने पर ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ जाती है।
इसका असर आगे चलकर कंपनियों की उत्पादन लागत और लॉजिस्टिक्स खर्च पर पड़ सकता है। आखिरकार इसका कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंच सकता है और खाने-पीने की वस्तुओं समेत कई जरूरी सामान महंगे हो सकते हैं।
यानी डीजल की कीमतों में लगातार तेजी अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए महंगाई का एक नया दबाव पैदा कर सकती है।
ईरान संघर्ष के बाद 55% चढ़ी कीमत
रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिकी डीजल की कीमतों में करीब 55% की बढ़ोतरी हुई है। इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी चिंता ग्लोबल फ्यूल सप्लाई को लेकर है।
ईरान और खाड़ी क्षेत्र से जुड़ी सप्लाई में किसी भी तरह की बाधा का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में फ्यूल की उपलब्धता पर पड़ सकता है। यही कारण है कि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के साथ डीजल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है।
डीजल का स्टॉक अगस्त में ऑल टाइम लो पर
एक तरफ जहां डीजल की कीमत रिकॉर्ड बना रही है, वहीं अमेरिका में इसका स्टॉक भी चिंता बढ़ा रहा है। अगस्त महीने में देश का डीजल इन्वेंटरी स्तर ऑल टाइम लो पर पहुंच गया।
कम स्टॉक और बढ़ती मांग का यह संयोजन कीमतों के लिए बेहद अहम माना जाता है। यदि रिफाइनरियों से सप्लाई बढ़ने में देरी होती है और मांग मजबूत बनी रहती है तो बाजार में कीमतों पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल सकता है।
कंपनियों के लिए रिकॉर्ड मार्जिन
डीजल की कीमतों में तेजी जहां ग्राहकों और अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है, वहीं रिफाइनिंग कंपनियों के लिए यह बेहद फायदे का सौदा साबित हो रही है।
अमेरिका में डीजल रिफाइनिंग मार्जिन बढ़कर रिकॉर्ड 106 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। यह पहली बार है जब डीजल रिफाइनिंग मार्जिन ने 100 डॉलर प्रति बैरल का स्तर पार किया है।
इसका मतलब है कि कच्चे तेल को रिफाइन करके डीजल तैयार करने वाली कंपनियों को मौजूदा बाजार परिस्थितियों में असाधारण मार्जिन मिल रहा है। हालांकि, यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहेगी या नहीं, यह ग्लोबल सप्लाई, युद्ध की स्थिति और आने वाले महीनों की मांग पर निर्भर करेगा।
खाड़ी क्षेत्र की सप्लाई पर भी नजर
ईरान संघर्ष से पहले खाड़ी क्षेत्र से रोजाना करीब 9 लाख बैरल डीजल और लगभग 3.5 लाख बैरल जेट फ्यूल का परिवहन होता था। इस क्षेत्र में किसी भी तरह की बड़ी सप्लाई बाधा का असर वैश्विक फ्यूल बाजार पर पड़ सकता है।
फिलहाल बाजार की नजर तीन प्रमुख चीजों पर है—ईरान से जुड़ा भू-राजनीतिक तनाव, रूस की रिफाइनरियों पर यूक्रेन के हमले और अमेरिका में बढ़ती मौसमी मांग।
यदि इन तीनों मोर्चों पर दबाव बना रहता है तो अमेरिकी डीजल बाजार में कीमतों की तेजी आगे भी जारी रह सकती है। वहीं, रिकॉर्ड रिफाइनिंग मार्जिन से तेल और रिफाइनिंग कंपनियों को फिलहाल बड़ा फायदा मिलता दिख रहा है।


