भारत का पहला टीवी किसने बनाया? आज हर घर में स्मार्ट TV, OTT और इंटरनेट की सुविधा आम है, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब भारत में टेलीविजन तकनीक बेहद शुरुआती दौर में थी। देश में टेलीविजन प्रसारण की शुरुआत 15 सितंबर 1959 को प्रायोगिक तौर पर हुई थी। इसके पीछे सिर्फ सरकार या विदेशी तकनीक नहीं थी, बल्कि भारतीय वैज्ञानिकों की दूरदर्शिता ने भी बड़ी भूमिका निभाई।
भारत के पहले स्वदेशी टीवी सेट को विकसित करने की दिशा में डॉ. ए.एस. राव और डॉ. विक्रम साराभाई का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। एक तरफ ए.एस. राव ने Electronics Corporation of India Limited (ECIL) जैसी कंपनी खड़ी की, वहीं विक्रम साराभाई ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की नींव मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
भारत में कब शुरू हुआ टेलीविजन प्रसारण?
भारत में टेलीविजन प्रसारण की शुरुआत 15 सितंबर 1959 को नई दिल्ली से हुई थी। उस समय इसे प्रायोगिक तौर पर शुरू किया गया था। इसके लिए एक छोटे ट्रांसमीटर और UNESCO की सहायता से तैयार किए गए अस्थायी स्टूडियो का इस्तेमाल किया गया।
शुरुआती दौर में टीवी प्रसारण का उद्देश्य मनोरंजन से ज्यादा शिक्षा और सामाजिक जागरूकता फैलाना था। धीरे-धीरे इसका विस्तार दूसरे क्षेत्रों तक हुआ और टीवी भारतीय घरों का हिस्सा बनने लगा।
भारत के पहले स्वदेशी TV के पीछे किनका दिमाग था?
देश में स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक्स तकनीक को बढ़ावा देने में वैज्ञानिक डॉ. अय्यागारी सांबशिव राव (A. S. Rao) की बड़ी भूमिका थी। वह ECIL के संस्थापक और पहले मैनेजिंग डायरेक्टर थे।
वहीं अंतरिक्ष वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई ने भी भारत में स्वदेशी तकनीक और वैज्ञानिक संस्थानों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। दोनों वैज्ञानिकों की सोच का एक बड़ा हिस्सा भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने से जुड़ा था।
उस दौर में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए भारत की विदेशी तकनीक और आयात पर काफी निर्भरता थी। ऐसे में स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग खड़ा करना एक बड़ी चुनौती थी।
1967 में हुई ECIL की स्थापना
Electronics Corporation of India Limited (ECIL) की स्थापना 11 अप्रैल 1967 को हैदराबाद में हुई थी। कंपनी की स्थापना का उद्देश्य भारत में महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक तकनीकों और उपकरणों का स्वदेशी विकास करना था।
ECIL ने बाद में कई क्षेत्रों में काम किया और देश की रणनीतिक जरूरतों के लिए इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम विकसित किए। इसी क्रम में कंपनी ने स्वदेशी टीवी तकनीक के विकास में भी योगदान दिया।
कैसा था भारत का पहला स्वदेशी TV?
भारत में शुरुआती स्वदेशी टीवी तकनीक का विकास उस समय की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया गया था। ECIL ने सॉलिड-स्टेट ब्लैक एंड व्हाइट टीवी विकसित किया, जिसे ECTV के नाम से बाजार में पेश किया गया।
यह उस समय भारत के लिए बड़ी उपलब्धि थी क्योंकि देश इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में अपनी तकनीकी क्षमता विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा था।
1975 में आया SITE प्रोजेक्ट
भारत में टीवी के विस्तार की कहानी में 1975 का SITE यानी Satellite Instructional Television Experiment बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस प्रयोग के तहत सैटेलाइट के जरिए दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों तक शैक्षणिक और विकास से जुड़ी सामग्री पहुंचाने का प्रयास किया गया। इस प्रोजेक्ट के लिए ECIL ने 2,500 से ज्यादा विशेष टीवी रिसीवर तैयार किए थे।
इन टीवी सेटों की खासियत यह थी कि इनके जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में सैटेलाइट से प्रसारित कार्यक्रम देखे जा सकते थे। इससे टीवी सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं रहा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और सामाजिक जागरूकता की जानकारी पहुंचाने का जरिया भी बना।
फिर ECIL ने टीवी बनाना क्यों छोड़ा?
समय के साथ भारत का टीवी बाजार तेजी से बदलने लगा। खासकर आर्थिक उदारीकरण के बाद विदेशी और निजी कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ी। टीवी उद्योग में टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही थी और बाजार में कई बड़े ब्रांड उतर चुके थे।
ऐसे माहौल में ECIL ने टीवी कारोबार से बाहर निकलकर अपने संसाधनों को ज्यादा रणनीतिक क्षेत्रों में लगाने पर ध्यान केंद्रित किया।
इसके बाद कंपनी का फोकस न्यूक्लियर इंस्ट्रूमेंटेशन, डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स, सिक्योरिटी सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) जैसे क्षेत्रों पर बढ़ा।
आज कितनी बड़ी है ECIL?
टीवी बनाने के शुरुआती दौर से निकलकर ECIL आज भारत के महत्वपूर्ण रणनीतिक इलेक्ट्रॉनिक्स संगठनों में शामिल है।
वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी ने करीब ₹2,426 करोड़ का कुल टर्नओवर दर्ज किया। इसमें ऑपरेशन से होने वाली आय लगभग ₹2,332 करोड़ रही।
खास बात यह रही कि कंपनी ने पहली बार EVM की बिक्री को शामिल किए बिना भी ₹2,000 करोड़ से अधिक का रेवेन्यू हासिल किया।
टीवी से शुरू हुई स्वदेशी तकनीक की कहानी
आज जब भारत सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस टेक्नोलॉजी और स्पेस सेक्टर में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तो इसकी जड़ें कई दशक पुराने प्रयासों में दिखाई देती हैं।
ए.एस. राव जैसे वैज्ञानिकों ने स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक्स क्षमता विकसित करने के लिए संस्थान और कंपनियां खड़ी कीं, जबकि विक्रम साराभाई जैसे वैज्ञानिकों ने भारत के अंतरिक्ष और वैज्ञानिक कार्यक्रमों को नई दिशा दी।
भारत के शुरुआती स्वदेशी टीवी से लेकर आज के एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स और स्पेस मिशनों तक का सफर यह बताता है कि तकनीकी आत्मनिर्भरता की नींव कई दशक पहले रखी जा चुकी थी।


