Commodity Corner: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और सप्लाई बाधित होने की आशंका ने कच्चे तेल की कीमतों को जोरदार सपोर्ट दिया है। ब्रेंट क्रूड $95.67 और WTI $91.56 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। दूसरी ओर, अमेरिकी फेड के ब्याज दरों पर नरम रुख की उम्मीद के बीच सोना $4,477 प्रति औंस के करीब बना हुआ है। निवेशकों की नजर अब अमेरिकी जॉब्स डेटा पर है, जो आगे कमोडिटी बाजार की दिशा तय कर सकता है।
Commodity Market Updates: शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका ने क्रूड की कीमतों को ऊपर धकेल दिया है।
ब्रेंट और WTI क्रूड में इस सप्ताह की तेजी खास तौर पर उल्लेखनीय है। दूसरी तरफ, सोने और चांदी में भी मजबूती बनी हुई है। बाजार की नजर अब अमेरिका के महत्वपूर्ण रोजगार आंकड़ों पर है, क्योंकि इनसे सितंबर में फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है।
ब्रेंट क्रूड $95 के पार, WTI भी $91 के ऊपर
मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने की आशंका के बीच शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट और WTI दोनों में तेजी दर्ज की गई।
ब्रेंट क्रूड करीब 15 सेंट यानी 0.2% की बढ़त के साथ $95.67 प्रति बैरल पर पहुंच गया। साप्ताहिक आधार पर ब्रेंट में लगभग 7.1% की तेजी दर्ज की जा रही है।
इसी तरह अमेरिकी WTI क्रूड करीब 26 सेंट यानी 0.3% बढ़कर $91.56 प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। सप्ताह के दौरान WTI में करीब 9.8% का उछाल देखने को मिला है।
क्रूड में मौजूदा तेजी को मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और संभावित सप्लाई व्यवधान की आशंका से जोड़कर देखा जा रहा है। बाजार में आशंका है कि अगर क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव पड़ सकता है।
जुलाई के बाद क्रूड में सबसे बड़ी साप्ताहिक तेजी
कच्चे तेल की मौजूदा तेजी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ब्रेंट और WTI में जुलाई के बाद मजबूत साप्ताहिक बढ़त देखने को मिल रही है।
तेल बाजार में भू-राजनीतिक तनाव हमेशा एक अहम ट्रिगर रहा है। जब प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों से सप्लाई बाधित होने का खतरा बढ़ता है, तो ट्रेडर्स भविष्य में उपलब्धता को लेकर प्रीमियम जोड़ना शुरू कर देते हैं। यही वजह है कि मिडिल ईस्ट की घटनाओं का असर क्रूड की कीमतों पर तेजी से दिखाई दे रहा है।
हालांकि, आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि क्षेत्रीय तनाव कितना लंबा चलता है और वास्तविक सप्लाई पर इसका कितना असर पड़ता है।
सोने की कीमत $4,477 के करीब स्थिर
कच्चे तेल में तेजी के बीच सोने में भी मजबूती बनी हुई है। निवेशक अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर फेड के अगले कदम और शुक्रवार को जारी होने वाले रोजगार आंकड़ों पर नजर रख रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब $4,477.10 प्रति औंस के मजबूत स्तर पर बना हुआ है।
वहीं, दिसंबर डिलीवरी वाला अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स करीब 0.4% की गिरावट के साथ $4,522.60 प्रति औंस पर कारोबार करता नजर आया।
सोने को फिलहाल अमेरिकी मौद्रिक नीति से सहारा मिल रहा है। यदि बाजार को लगता है कि फेड ब्याज दरों में सख्ती से बच सकता है, तो इससे सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्ति की मांग को समर्थन मिल सकता है।
चांदी में भी मामूली तेजी
सोने के साथ-साथ चांदी में भी शुक्रवार को मजबूती देखने को मिली।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सिल्वर करीब 0.1% बढ़कर $66.90 प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गई। हालांकि, प्लैटिनम और पैलेडियम में हल्की कमजोरी देखने को मिली।
कमोडिटी बाजार में फिलहाल निवेशकों का फोकस एक साथ कई संकेतकों पर है। एक तरफ भू-राजनीतिक तनाव क्रूड को ऊपर धकेल रहा है, वहीं अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीदें कीमती धातुओं को प्रभावित कर रही हैं।
गुरुवार को सोने में क्यों आया था 2% का उछाल?
सोने में गुरुवार को करीब 2% की तेज बढ़त देखने को मिली थी। इसके पीछे अमेरिकी फेडरल रिजर्व के गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर का बयान प्रमुख वजहों में शामिल रहा।
वॉलर ने संकेत दिया था कि अगर महंगाई का दबाव नियंत्रण में रहता है, तो वह ब्याज दरों में बढ़ोतरी के पक्ष में नहीं होंगे। इस बयान के बाद बाजार में सितंबर में दरों में बढ़ोतरी की संभावना को लेकर उम्मीदें कमजोर हुईं।
ब्याज दरों को लेकर नरम रुख की संभावना बढ़ने से सोने को समर्थन मिला और गुरुवार को इसकी कीमत में तेज उछाल आया।
अब अमेरिकी जॉब्स डेटा पर बाजार की नजर
कमोडिटी बाजार के लिए शुक्रवार का सबसे बड़ा ट्रिगर अमेरिकी रोजगार आंकड़े हो सकते हैं। निवेशक यह जानने की कोशिश करेंगे कि अमेरिकी लेबर मार्केट की स्थिति कैसी है और इसका फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति पर क्या असर पड़ सकता है।
अगर रोजगार आंकड़े कमजोर आते हैं, तो बाजार में ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर दबाव आ सकता है, जिसका फायदा सोने को मिल सकता है।
इसके उलट मजबूत रोजगार आंकड़े अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत दे सकते हैं और फेड की नीति को लेकर बाजार की उम्मीदों को बदल सकते हैं।
डॉलर इंडेक्स में मामूली गिरावट
कमोडिटी बाजार के लिए डॉलर की चाल भी बेहद महत्वपूर्ण है। शुक्रवार को प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.05% गिरकर 99.54 पर आ गया।
आमतौर पर डॉलर कमजोर होने पर डॉलर में कीमत वाली कमोडिटीज विदेशी खरीदारों के लिए अपेक्षाकृत सस्ती हो जाती हैं। इससे सोने जैसी कमोडिटीज की मांग को कुछ समर्थन मिल सकता है।
अन्य प्रमुख मुद्राओं की बात करें तो यूरो $1.1589 के आसपास स्थिर रहा।
वहीं, जापानी येन डॉलर के मुकाबले 0.07% मजबूत होकर 158.59 प्रति डॉलर पर कारोबार करता दिखा।
आगे किन संकेतकों पर रहेगी नजर?
कमोडिटी बाजार में आने वाले दिनों में मुख्य रूप से इन फैक्टर्स पर नजर रहेगी:
- मिडिल ईस्ट का सैन्य और भू-राजनीतिक तनाव
- कच्चे तेल की वैश्विक सप्लाई
- अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल और अन्य रोजगार आंकड़े
- फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति
- डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड
- गोल्ड और सिल्वर की निवेश मांग
फिलहाल क्रूड में तेजी का सबसे बड़ा कारण सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंता है, जबकि सोने और चांदी की दिशा अमेरिकी ब्याज दरों और डॉलर की चाल से प्रभावित हो रही है। ऐसे में शुक्रवार के अमेरिकी रोजगार आंकड़े आने के बाद कमोडिटी बाजार में और बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
Disclaimer
यह लेख केवल बाजार और कमोडिटी से जुड़ी जानकारी देने के उद्देश्य से है। कमोडिटी और अन्य वित्तीय बाजारों में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश का निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें। NewsJagran.in किसी निवेश की गारंटी या व्यक्तिगत निवेश सलाह प्रदान नहीं करता है।


