Investment Tips at 25: 25 साल की उम्र में निवेश शुरू करना आर्थिक रूप से मजबूत भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम माना जाता है। इस उम्र में कमाई शुरू होने के साथ-साथ निवेश के लिए लंबा समय भी मिलता है। यही लंबी अवधि कंपाउंडिंग का फायदा उठाने में मदद कर सकती है। हालांकि, पहली बार निवेश करने वाले युवाओं के लिए सिर्फ यह तय करना काफी नहीं है कि पैसा कहां लगाना है। उससे पहले इमरजेंसी फंड, इंश्योरेंस और फाइनेंशियल गोल को समझना भी जरूरी है।
मार्केट एक्सपर्ट और सेबी रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट शराफत खान के मुताबिक, 25 साल की उम्र में निवेश शुरू करने वाले व्यक्ति को शुरुआत में ज्यादा रिटर्न के पीछे भागने के बजाय एक व्यवस्थित फाइनेंशियल रोडमैप तैयार करना चाहिए। इसके लिए चार बुनियादी कदम काफी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
निवेश शुरू करने से पहले इन 4 चीजों पर दें ध्यान
निवेश की शुरुआत करने से पहले यह समझना जरूरी है कि हर पैसा शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में लगाने के लिए नहीं होता। कुछ पैसा ऐसी जगह होना चाहिए, जहां जरूरत पड़ने पर उसे तुरंत इस्तेमाल किया जा सके। इसी तरह किसी बड़ी बीमारी या अप्रत्याशित घटना की स्थिति में आपकी सालों की बचत खत्म न हो, इसके लिए पर्याप्त इंश्योरेंस भी जरूरी है।
1. सबसे पहले तैयार करें इमरजेंसी फंड
निवेश शुरू करने से पहले सबसे जरूरी कदम इमरजेंसी फंड तैयार करना है। एक्सपर्ट के मुताबिक, करीब 12 महीने के खर्च के बराबर रकम इमरजेंसी फंड में रखी जा सकती है।
मान लीजिए किसी व्यक्ति का हर महीने जरूरी खर्च 30,000 रुपये है। ऐसे में करीब 3.6 लाख रुपये का इमरजेंसी फंड रखने का लक्ष्य बनाया जा सकता है। यह रकम ऐसी जगह होनी चाहिए जहां जरूरत पड़ने पर आसानी से निकाली जा सके।
इसके लिए लिक्विड फंड या स्वीप-इन FD जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। इसका उद्देश्य अधिकतम रिटर्न कमाना नहीं, बल्कि पैसा सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध रखना है।
इमरजेंसी फंड का एक और फायदा यह है कि अगर शेयर बाजार में अचानक बड़ी गिरावट आ जाती है और उसी समय नौकरी या आय से जुड़ी कोई समस्या आती है, तो रोजमर्रा के खर्च पूरे करने के लिए बाजार में मौजूद निवेश को नुकसान में बेचने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
एक्सपर्ट के मुताबिक, इमरजेंसी फंड में मौजूद रकम के एक हिस्से को बाजार में बड़ी गिरावट आने पर धीरे-धीरे निवेश करने के लिए बफर के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, ऐसा करते समय यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि वास्तविक आपातकाल के लिए पर्याप्त नकदी उपलब्ध रहे।
2. SIP से पहले इंश्योरेंस को करें प्राथमिकता
कई युवा नौकरी या कमाई शुरू करते ही SIP शुरू कर देते हैं, लेकिन इंश्योरेंस को नजरअंदाज कर देते हैं। यह रणनीति लंबे समय में जोखिम बढ़ा सकती है।
एक बड़ी मेडिकल इमरजेंसी आपकी कई वर्षों की बचत को कुछ ही समय में खत्म कर सकती है। इसलिए निवेश बढ़ाने से पहले पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस होना जरूरी है।
कम उम्र में हेल्थ इंश्योरेंस लेने का एक फायदा यह भी हो सकता है कि व्यक्ति अपेक्षाकृत कम उम्र में अपनी स्वास्थ्य जरूरतों के अनुसार पर्याप्त कवर तैयार कर लेता है। पॉलिसी लेते समय अस्पतालों के नेटवर्क, कवरेज, वेटिंग पीरियड, exclusions और अन्य नियमों को ध्यान से समझना चाहिए।
जरूरत के अनुसार गंभीर बीमारियों से जुड़े अतिरिक्त कवर या राइडर पर भी विचार किया जा सकता है। उदाहरण के लिए कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की स्थिति में इलाज का खर्च काफी अधिक हो सकता है।
इसके अलावा, अगर व्यक्ति पर परिवार के सदस्यों की आर्थिक निर्भरता है या भविष्य में उसकी आय किसी अन्य व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण होगी, तो टर्म इंश्योरेंस भी फाइनेंशियल प्लान का हिस्सा होना चाहिए।
यहां मकसद निवेश से ज्यादा रिटर्न कमाना नहीं, बल्कि किसी अप्रत्याशित घटना के कारण परिवार की आर्थिक सुरक्षा प्रभावित होने से बचाना है।
3. गोल के हिसाब से तय करें निवेश का तरीका
निवेश करते समय सबसे आम गलती यह होती है कि लोग पहले प्रोडक्ट चुन लेते हैं और बाद में सोचते हैं कि पैसा किस काम आएगा। सही तरीका इसका उल्टा है।
सबसे पहले तय करें कि पैसे की जरूरत कब पड़ेगी। इसके बाद निवेश का विकल्प चुना जाना चाहिए।
0 से 1 साल का लक्ष्य
अगर किसी पैसे की जरूरत अगले कुछ महीनों या एक साल के भीतर पड़ने वाली है, तो उसमें ज्यादा जोखिम लेना उचित नहीं माना जाता।
ऐसे लक्ष्यों के लिए लिक्विड या कम अवधि वाले डेट विकल्पों पर ध्यान दिया जा सकता है। यहां प्राथमिकता पूंजी की सुरक्षा और जरूरत पड़ने पर पैसे की उपलब्धता होनी चाहिए।
1 से 3 साल का लक्ष्य
अगर लक्ष्य एक से तीन साल दूर है, तो शॉर्ट-ड्यूरेशन या कुछ डेट आधारित विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।
कुछ परिस्थितियों में टैक्स स्लैब और निवेशक की जरूरत के अनुसार आर्बिट्राज फंड भी एक विकल्प हो सकता है। हालांकि, किसी भी फंड में निवेश करने से पहले उसके जोखिम, टैक्स नियम और खर्च को समझना जरूरी है।
3 से 5 साल का लक्ष्य
तीन से पांच साल के लक्ष्य के लिए निवेश पोर्टफोलियो में डेट और इक्विटी का मिश्रण रखा जा सकता है। एक्सपर्ट के अनुसार, ऐसे लक्ष्य में करीब 60-70% हिस्सा डेट और बाकी इक्विटी में रखने जैसे एसेट एलोकेशन पर विचार किया जा सकता है।
इंडेक्स फंड या बैलेंस्ड एडवांटेज फंड जैसे विकल्पों को निवेशक अपनी जोखिम क्षमता और लक्ष्य के अनुसार देख सकते हैं।
हालांकि, यह किसी हर निवेशक के लिए तय फॉर्मूला नहीं है। सही एलोकेशन आय, मौजूदा निवेश, लक्ष्य और जोखिम सहने की क्षमता पर निर्भर करता है।
5 साल से ज्यादा का लक्ष्य
अगर निवेश का लक्ष्य पांच साल या उससे ज्यादा दूर है, तो इक्विटी का हिस्सा बढ़ाने की गुंजाइश हो सकती है। लंबी अवधि मिलने के कारण बाजार के छोटे और मध्यम अवधि के उतार-चढ़ाव से निपटने का समय भी अधिक मिलता है।
यही वह अवधि है जहां 25 साल की उम्र में निवेश शुरू करने वाले युवाओं को कंपाउंडिंग का फायदा मिल सकता है। उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक नियमित रूप से SIP करता है और निवेश को बीच-बीच में निकालने के बजाय अपने लक्ष्य तक बनाए रखता है, तो समय उसके पक्ष में काम कर सकता है।
हालांकि, इक्विटी में बाजार जोखिम रहता है और पिछले रिटर्न भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी नहीं होते।
4. निवेश को जरूरत से ज्यादा जटिल न बनाएं
शुरुआत में कई युवा अलग-अलग म्यूचुअल फंड, शेयर, थीम और निवेश प्रोडक्ट खरीद लेते हैं। इससे पोर्टफोलियो बड़ा तो दिखने लगता है, लेकिन उसे समझना और मैनेज करना मुश्किल हो सकता है।
एक्सपर्ट के मुताबिक, शुरुआत में निवेश को सरल रखना बेहतर हो सकता है। एक व्यवस्थित SIP के जरिए नियमित निवेश किया जा सकता है और साल में कम से कम एक बार पूरे पोर्टफोलियो की समीक्षा की जा सकती है।
अगर किसी एसेट क्लास का हिस्सा तय सीमा से बहुत ज्यादा बढ़ गया है, तो जरूरत के अनुसार रीबैलेंसिंग की जा सकती है।
इसका मतलब यह नहीं है कि बाजार में रोज होने वाले उतार-चढ़ाव के आधार पर निवेश खरीदना या बेचना शुरू कर दिया जाए। लंबी अवधि के निवेश में अनुशासन और नियमितता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सिर्फ रिटर्न नहीं, महंगाई और टैक्स के बाद देखें असली फायदा
निवेश का मूल्यांकन करते समय केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि पैसा कितने प्रतिशत बढ़ा। यह भी देखना जरूरी है कि टैक्स और महंगाई को ध्यान में रखने के बाद वास्तविक रिटर्न कितना बच रहा है।
उदाहरण के लिए, अगर किसी FD पर 6.25% ब्याज मिल रहा है और महंगाई दर 4.38% है, तो महंगाई को समायोजित करने के बाद वास्तविक रिटर्न काफी कम हो जाता है। इसके अलावा, निवेशक के टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स का असर भी पड़ सकता है।
इसलिए हर साल अपने निवेश की समीक्षा करते समय तीन सवाल जरूर पूछने चाहिए:
- क्या निवेश मेरे फाइनेंशियल गोल के हिसाब से सही दिशा में बढ़ रहा है?
- महंगाई और टैक्स के बाद वास्तविक रिटर्न कितना है?
- क्या मेरी मौजूदा जोखिम क्षमता के हिसाब से एसेट एलोकेशन सही है?
25 की उम्र में निवेश शुरू करने वालों के लिए आसान रोडमैप
अगर इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझें तो 25 साल की उम्र में निवेश शुरू करने का रोडमैप कुछ इस तरह बनाया जा सकता है:
पहला कदम: करीब 12 महीने के जरूरी खर्च का इमरजेंसी फंड तैयार करें।
दूसरा कदम: पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस लें और परिस्थितियों के अनुसार टर्म इंश्योरेंस की जरूरत समझें।
तीसरा कदम: अपने लक्ष्य और उसकी समयसीमा तय करें। शादी, घर, कार, उच्च शिक्षा, यात्रा और रिटायरमेंट जैसे अलग-अलग लक्ष्यों के लिए अलग रणनीति बनाई जा सकती है।
चौथा कदम: लक्ष्य और जोखिम क्षमता के अनुसार डेट और इक्विटी का संतुलन बनाएं तथा नियमित SIP जैसे सरल तरीके से निवेश शुरू करें।
25 की उम्र में सबसे बड़ी ताकत है समय
25 साल की उम्र में निवेश शुरू करने का सबसे बड़ा फायदा सिर्फ यह नहीं है कि कम उम्र में पैसा निवेश हो जाता है। असली फायदा यह है कि निवेश को लंबे समय तक बढ़ने का मौका मिलता है।
इसलिए शुरुआती दौर में बहुत ज्यादा रिटर्न कमाने की कोशिश करने के बजाय नियमित निवेश, पर्याप्त सुरक्षा, सही एसेट एलोकेशन और लंबे समय तक अनुशासन पर ध्यान देना ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।
एक मजबूत फाइनेंशियल प्लान का मतलब केवल पैसा कमाना नहीं है। इसका मतलब यह भी है कि इमरजेंसी आने पर आपके पास सुरक्षा हो, परिवार आर्थिक रूप से सुरक्षित रहे और भविष्य के लक्ष्यों के लिए पैसा सही दिशा में बढ़ता रहे।
नोट: निवेश से जुड़े फैसले व्यक्ति की आय, लक्ष्य, जोखिम क्षमता, टैक्स स्थिति और मौजूदा वित्तीय स्थिति पर निर्भर करते हैं। किसी भी निवेश विकल्प को चुनने से पहले उसके जोखिम और शर्तों को समझना जरूरी है। यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, इसे व्यक्तिगत निवेश सलाह न माना जाए।


