पेरिस/सियोल: फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रॉन ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अपनी पत्नी ब्रिजिट मैक्रॉन से जुड़ी टिप्पणियों की कड़ी निंदा की है। मैक्रॉन ने इन टिप्पणियों को “अनुचित” और “शिष्टाचारहीन” बताते हुए कहा कि ऐसे बयान किसी भी वैश्विक नेता के लिए स्वीकार्य नहीं हैं।
मैक्रॉन यह प्रतिक्रिया दक्षिण कोरिया के दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में दे रहे थे, जहां वे अपनी पत्नी ब्रिजिट मैक्रॉन के साथ मौजूद थे। उन्होंने कहा, “ट्रंप बहुत ज्यादा बोलते हैं। उनके बयान न तो शालीन हैं और न ही किसी मानक के अनुसार उचित हैं।”
ट्रंप का विवादित बयान
'Then I call up Macron, whose wife treats him EXTREMELY BADLY' — Trump
'He’s still recovering from the RIGHT to the JAW'
Puts on accent as he describes his call with French Prez https://t.co/ZAG8H3NYB6 pic.twitter.com/KJK2NG6w2u
— RT (@RT_com) April 1, 2026 इस प्रतिक्रिया से कुछ घंटे पहले, ट्रंप ने वाशिंगटन डीसी में एक निजी लंच के दौरान मैक्रॉन का मजाक उड़ाया। उन्होंने दावा किया कि मैक्रॉन की पत्नी उनके साथ बेहद खराब व्यवहार करती हैं। ट्रंप ने कहा, “मैं फ्रांस को फोन करता हूं, मैक्रॉन, जिसकी पत्नी उसे बहुत बुरी तरह ट्रीट करती है। अभी भी उनके जबड़े का दर्द ठीक नहीं हुआ है।”
यह बयान मई 2025 के एक वीडियो की ओर इशारा करता है, जिसमें मैक्रॉन के वियतनाम दौरे के दौरान ब्रिजिट मैक्रॉन उनका चेहरा हल्के अंदाज में धकेलती दिख रही थीं। मैक्रॉन ने इस वीडियो को पहले ही “डिसइन्फॉर्मेशन” करार दिया था और कहा था कि यह क्षण हल्के-फुल्के मजाक का हिस्सा था।
ईरान युद्ध और नाटो पर ट्रंप के निशाने
ट्रंप ने यह टिप्पणी उस समय की, जब वे ईरान से जुड़ी अमेरिका-नेतृत्व वाली संघर्ष स्थिति में नाटो सहयोगियों की भूमिका पर आलोचना कर रहे थे। उन्होंने कहा कि फ्रांस को खाड़ी में समर्थन भेजने के लिए कहा गया था, लेकिन मैक्रॉन ने यह प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया और सुझाव दिया कि युद्ध जीतने के बाद फ्रांस मदद कर सकता है।
ट्रंप ने फ्रांसीसी उच्चारण की नक़ल करते हुए कहा, “मुझे युद्ध जीतने के बाद मदद की ज़रूरत नहीं है।” इसके अलावा, उन्होंने नाटो की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए इसे “पेपर टाइगर” करार दिया और कहा कि “यदि कभी बड़ा संघर्ष हुआ, तो यह वहां मौजूद नहीं होगा।”
फ्रांस में राजनीतिक प्रतिक्रिया
ट्रंप की टिप्पणियों के बाद फ्रांस के राजनीतिक वातावरण में भारी नाराजगी देखी गई। फ्रांस की नेशनल असेंबली की अध्यक्ष याएल ब्रौन-पिवेट ने कहा कि ऐसे बयान वैश्विक संघर्ष के समय में “उचित नहीं हैं। लोग मर रहे हैं और हमारे राष्ट्रपति दूसरों का मजाक उड़ा रहे हैं।”
फ्रांस अनबोव्ड पार्टी के मैनुएल बॉम्पार्ड ने भी इस टिप्पणी की निंदा करते हुए कहा कि मैक्रॉन और उनकी पत्नी के बारे में इस तरह की बातें “पूर्णतः अस्वीकार्य” हैं।
फ्रांसीसी दैनिक ले फ़िगारो ने इस घटना को “एक और विवादास्पद प्रकटव्य” करार दिया।
हॉर्मुज़ जलसंधि पर मैक्रॉन का आगाह
व्यापक तनाव के बीच, मैक्रॉन ने हॉर्मुज़ जलसंधि को सैन्य तरीके से खोलने के किसी भी प्रयास के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि फ्रांस कभी भी ऐसा कदम समर्थन नहीं करेगा क्योंकि यह “अव्यवहारिक” होगा।
उन्होंने स्पष्ट किया, “ऐसी कोई योजना नहीं है जिसे हमने समर्थन किया हो। यह एक लंबी और जोखिमपूर्ण प्रक्रिया होगी। इसके कारण वैश्विक शिपिंग को रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स और बैलिस्टिक मिसाइलों से खतरा होगा।”
मैक्रॉन ने जोर दिया कि कूटनीति ही एकमात्र व्यावहारिक रास्ता है और हॉर्मुज़ जलसंधि के पुनः खुलने की प्रक्रिया सिर्फ ईरान के साथ परामर्श में ही संभव है।
अमेरिका और नाटो को मिली अप्रत्यक्ष चेतावनी
मैक्रॉन ने ट्रंप को सीधे नाम लिए बिना अमेरिका की बदलती नीतियों पर अप्रत्यक्ष चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “यह कोई शो नहीं है। हम युद्ध और शांति की बात कर रहे हैं। गंभीर रहें और हर दिन विपरीत बयान न दें।”
नाटो सहयोगियों के समर्थन की कमी पर आलोचना के जवाब में उन्होंने कहा कि फ्रांस का लक्ष्य शांति है। उन्होंने नाटो की स्थिति को कमजोर करने वाली सार्वजनिक आलोचना पर भी ध्यान दिलाया। “यदि आप हर दिन अपने वादों पर संदेह पैदा करते हैं, तो आप इसकी मूल भावना को खो देते हैं।”
विश्लेषण: अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल व्यक्तिगत टकराव नहीं है, बल्कि अमेरिका और यूरोप के बीच सैन्य और राजनीतिक भरोसे पर भी असर डाल सकता है। ट्रंप की टिप्पणियां, जो अक्सर मीडिया में विवादित बनी रहती हैं, मैक्रॉन के नेतृत्व और फ्रांस की कूटनीतिक स्थिति को चुनौती दे रही हैं।
विशेषज्ञ डॉ. सैनी वर्मा कहते हैं, “इस तरह के व्यक्तिगत हमले अंतरराष्ट्रीय मंच पर गंभीर संदेश भेजते हैं। मैक्रॉन का संयम और सटीक जवाब फ्रांस की स्थिरता को दर्शाता है।”
इसके अलावा, ईरान और खाड़ी क्षेत्र के लिए मैक्रॉन की कूटनीतिक नीति वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार को भी प्रभावित करती है। उनके दृष्टिकोण से सैन्य समाधान असंभव और जोखिमपूर्ण है, और यह यूरोपीय और अमेरिकी रणनीतिक सोच के बीच मतभेद को उजागर करता है।
निष्कर्ष
फ्रांस और अमेरिका के बीच यह हालिया तनाव केवल व्यक्तिगत विवाद तक सीमित नहीं है। यह अंतरराष्ट्रीय नीति, सैन्य गठबंधनों और वैश्विक कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण संकेत देता है। मैक्रॉन की संयमित प्रतिक्रिया और कूटनीतिक दृष्टिकोण दुनिया भर के नेताओं के लिए एक संदेश हैं कि विवादों में भी शांति और तर्क को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
वैश्विक नजरिए से देखा जाए तो यह घटना अंतरराष्ट्रीय मंच पर व्यक्तिगत व्यवहार, सैन्य नीतियों और गठबंधन रणनीति के बीच संतुलन की चुनौती को दर्शाती है।
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