नई दिल्ली। देश में जायद सीजन की खेती को लेकर किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। कृषि मंत्रालय की ताजा साप्ताहिक रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल जायद फसलों की बुवाई में करीब 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 22 मई 2026 तक देशभर में कुल 86.02 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जायद फसलों की बुवाई हो चुकी है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 83.50 लाख हेक्टेयर था।
विशेष बात यह है कि इस बार दलहन और तिलहन फसलों के रकबे में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली है। वहीं दूसरी ओर धान और मूंग जैसी कुछ प्रमुख फसलों के रकबे में गिरावट दर्ज की गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यों की बोनस और MSP नीति के कारण किसानों का रुझान कुछ फसलों की ओर तेजी से बढ़ा है।
जायद सीजन भारतीय कृषि व्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह सीजन रबी फसलों की कटाई और खरीफ सीजन की बुवाई के बीच आता है। इस दौरान किसान मुख्य रूप से मूंग, उड़द, तिल, मक्का, तरबूज और सब्जियों जैसी फसलों की खेती करते हैं। गर्मी के मौसम में होने वाली यह खेती देश की खाद्य सुरक्षा और दाल-तिलहन उत्पादन में अहम भूमिका निभाती है।
धान की बुवाई घटी, मोटे अनाजों का बढ़ा रकबा
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार इस साल धान की बुवाई में गिरावट दर्ज की गई है। पिछले वर्ष 32.42 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई हुई थी, जो इस बार घटकर 31.05 लाख हेक्टेयर रह गई। यानी धान के रकबे में करीब 4 प्रतिशत की कमी आई है।
हालांकि मोटे अनाजों की खेती में अच्छी तेजी देखने को मिली है। मोटे अनाजों का कुल रकबा 14.25 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 16.01 लाख हेक्टेयर हो गया है। यह करीब 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। सरकार लगातार मोटे अनाजों यानी श्रीअन्न को बढ़ावा दे रही है और इसका असर अब खेती के आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है।
मक्के की खेती में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली है। मक्के का रकबा पिछले साल के 8.5 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 10 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। यानी इसमें करीब 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। वहीं बाजरा, रागी और ज्वार जैसी फसलों के रकबे में भी हल्की बढ़त देखने को मिली है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मोटे अनाजों की बढ़ती मांग, बेहतर बाजार मूल्य और सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं के कारण किसान इन फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मिलेट्स की मांग बढ़ने से किसानों को बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है।
उड़द पर बोनस का दिखा असर
इस साल दलहन फसलों की खेती में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण मध्य प्रदेश सरकार की बोनस नीति को माना जा रहा है। राज्य सरकार ने उड़द की फसल पर ₹7,800 प्रति क्विंटल MSP के अलावा ₹600 प्रति क्विंटल बोनस देने की घोषणा की थी।
कृषि जानकारों के मुताबिक, इस फैसले का सीधा असर किसानों की बुवाई रणनीति पर पड़ा है। बड़ी संख्या में किसानों ने मूंग की खेती छोड़कर उड़द की खेती की तरफ रुख किया है। यही कारण है कि इस बार मूंग के कुल रकबे में गिरावट दर्ज की गई है।
मध्य प्रदेश देश में ग्रीष्मकालीन मूंग उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। ऐसे में वहां मूंग की खेती कम होने का असर राष्ट्रीय उत्पादन पर भी पड़ सकता है। हालांकि उड़द की खेती बढ़ने से दाल उत्पादन में संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
तिलहन की खेती में भी शानदार बढ़त
दलहन के साथ-साथ तिलहन फसलों की खेती में भी उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला है। कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार तिलहन फसलों का कुल रकबा 9.58 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 11.04 लाख हेक्टेयर हो गया है।
मूंगफली की खेती में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले साल 4.20 लाख हेक्टेयर में मूंगफली की खेती हुई थी, जो इस बार बढ़कर 5.51 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है। वहीं तिल की खेती का रकबा भी 4.96 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 5.07 लाख हेक्टेयर हो गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि खाद्य तेलों की बढ़ती मांग और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार लगातार तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है। ऐसे में किसानों को बेहतर दाम और सरकारी समर्थन मिलने की उम्मीद से तिलहन फसलों की बुवाई में तेजी आई है।
सरकार ने तय किया बड़ा उत्पादन लक्ष्य
सरकार ने 2025-26 फसल वर्ष के लिए जायद फसलों के उत्पादन का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। कृषि मंत्रालय के अनुसार इस अवधि में कुल 19.67 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
इसमें:
- 12.15 मिलियन टन चावल
- 4 मिलियन टन मक्का
- 1.14 मिलियन टन मोटा अनाज
- 2.39 मिलियन टन दालें
उत्पादन का लक्ष्य शामिल है।
इसके अलावा बाजरा का लक्ष्य 1.10 मिलियन टन, उड़द का 0.32 मिलियन टन और मूंग का 2.07 मिलियन टन तय किया गया है। तिलहन उत्पादन का लक्ष्य 1.37 मिलियन टन रखा गया है।
किसानों और बाजार पर क्या होगा असर
जायद फसलों की बढ़ती बुवाई का असर आने वाले महीनों में खाद्यान्न बाजार पर भी दिखाई दे सकता है। यदि मौसम सामान्य रहा और उत्पादन लक्ष्य हासिल हुए, तो दालों और खाद्य तेलों की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। इससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना है।
दूसरी ओर, दलहन और तिलहन के बढ़ते रकबे से किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद भी जताई जा रही है। खासकर उन राज्यों में जहां सरकार बोनस और MSP के जरिए किसानों को प्रोत्साहन दे रही है, वहां कृषि क्षेत्र में सकारात्मक माहौल बन रहा है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में यदि सरकार इसी तरह फसल विविधीकरण और MSP आधारित प्रोत्साहन नीति जारी रखती है, तो भारत दाल और खाद्य तेल उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है।
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