भारत में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन आज भी बड़ी संख्या में महिला उद्यमी सिस्टम की जटिलताओं, नियमों और अवसरों की कमी से जूझ रही हैं। हाल ही में Observer Research Foundation (ORF) की एक रिपोर्ट ने इस मुद्दे को गहराई से उठाया है और बताया है कि सिर्फ “महिलाओं को बढ़ावा देने” की बात काफी नहीं है—बल्कि सिस्टम में स्ट्रक्चरल बदलाव जरूरी हैं।
रिपोर्ट साफ कहती है कि अगर महिलाओं को बराबरी से बाजार में हिस्सा लेना है, तो नीतियों, लाइसेंसिंग, शहरी ढांचे और सरकारी खरीद प्रणाली (procurement) में बड़े बदलाव करने होंगे।
समस्या कहां है? सिर्फ फंडिंग नहीं, सिस्टम ही चुनौती है
अक्सर यह माना जाता है कि महिलाओं को बिजनेस में सबसे बड़ी समस्या फंडिंग की होती है। लेकिन ORF की रिपोर्ट एक अलग तस्वीर पेश करती है।
रिपोर्ट के अनुसार:
- महिलाओं को मार्केट एक्सेस (बाजार तक पहुंच) में दिक्कत होती है
- जटिल लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन सिस्टम उन्हें रोकते हैं
- शहरी प्लानिंग में महिलाओं के लिए अलग से सोच नहीं होती
- छोटे और घरेलू बिजनेस को “औपचारिक इकॉनमी” में मान्यता नहीं मिलती
यानी समस्या सिर्फ पैसे की नहीं, बल्कि पूरे इकोसिस्टम की है।
3% GeM कोटा: गेम चेंजर बन सकता है यह कदम
भारत सरकार का Government e-Marketplace (GeM) प्लेटफॉर्म सरकारी खरीद के लिए एक बड़ा डिजिटल मार्केट है। ORF रिपोर्ट में कहा गया है कि महिलाओं के लिए 3% कोटा तय किया गया है, लेकिन इसका सही इस्तेमाल नहीं हो पा रहा।
रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशें:
- 3% कोटा को सख्ती से लागू किया जाए
- इसे सिर्फ छोटे या कम मुनाफे वाले सेक्टर तक सीमित न रखा जाए
- महिला उद्यमियों को बड़े टेंडर में भी मौका मिले
अगर यह लागू होता है, तो हजारों महिला बिजनेस को सीधा सरकारी बाजार मिल सकता है।
लाइसेंस और नियम: सबसे बड़ा रोडब्लॉक
भारत में बिजनेस शुरू करना आसान बताया जाता है, लेकिन ग्राउंड लेवल पर तस्वीर अलग है—खासकर महिलाओं के लिए।
रिपोर्ट बताती है कि:
- अलग-अलग लाइसेंस (GST, FSSAI, ट्रेड लाइसेंस) लेना मुश्किल
- कई बार घर से बिजनेस चलाने की अनुमति नहीं
- रात या शाम के समय काम करने पर पाबंदी
सुझाए गए समाधान:
- सिंगल-विंडो सिस्टम बनाया जाए
- घर से चलने वाले बिजनेस को मान्यता मिले
- “हाइब्रिड बिजनेस मॉडल” (ऑनलाइन + ऑफलाइन) को सपोर्ट किया जाए
महिला उद्यमियों के लिए ‘Vendor Support Cells’ की जरूरत
ORF ने एक बहुत ही व्यावहारिक सुझाव दिया है—Ward-level Vendor Support Cells।
इनका काम होगा:
- महिलाओं को GeM जैसे प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर करना सिखाना
- डॉक्यूमेंटेशन में मदद करना
- टैक्स और डिजिटल ट्रेनिंग देना
यह कदम छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है।
MSME सेक्टर में महिलाओं की असली पहचान अभी बाकी है
भारत में लाखों महिलाएं छोटे स्तर पर बिजनेस करती हैं—जैसे:
- होम-बेस्ड फूड बिजनेस
- सिलाई, कढ़ाई, हैंडीक्राफ्ट
- ऑनलाइन सेलिंग
लेकिन इनमें से कई बिजनेस “अनऑर्गनाइज्ड” माने जाते हैं।
रिपोर्ट कहती है कि:
- इन्फॉर्मल और कलेक्टिव बिजनेस को भी मान्यता दी जाए
- महिला समूहों (Self Help Groups) को MSME का दर्जा मिले
- छोटे बिजनेस के लिए नियम आसान हों
महिलाओं की भागीदारी क्यों जरूरी है? (Economic Angle)
यह सिर्फ सामाजिक मुद्दा नहीं है—यह एक बड़ा आर्थिक अवसर भी है।
अगर महिलाओं की भागीदारी बढ़ती है:
- GDP में बड़ा योगदान बढ़ सकता है
- रोजगार के नए अवसर बनते हैं
- इनकम वितरण बेहतर होता है
भारत जैसे देश के लिए यह “अंडर-यूज्ड पोटेंशियल” है।
फाइनेंशियल सपोर्ट से ज्यादा जरूरी है ‘सही गाइडेंस’
रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि महिलाओं को सिर्फ लोन देना काफी नहीं है।
जरूरत है:
- सही समय पर सही सलाह
- बिजनेस स्केल करने की रणनीति
- मार्केट एक्सेस की जानकारी
यानी “Money + Mentorship” दोनों जरूरी हैं।
शहरी प्लानिंग में महिलाओं की जगह कहां है?
यह मुद्दा अक्सर नजरअंदाज होता है।
रिपोर्ट बताती है कि:
- मार्केट एरिया डिजाइन करते समय महिलाओं की जरूरतें नहीं देखी जातीं
- सुरक्षा, समय और लोकेशन जैसे फैक्टर महत्वपूर्ण हैं
- नाइट मार्केट या फ्लेक्सिबल टाइमिंग महिलाओं के लिए जरूरी है
नीतिगत स्तर पर क्या बदलाव जरूरी हैं?
ORF रिपोर्ट के अनुसार, भारत को इन बड़े सुधारों की जरूरत है:
- Procurement Reform – GeM कोटा लागू करना
- Regulatory Reform – लाइसेंस आसान बनाना
- Institutional Inclusion – निर्णय लेने वाली संस्थाओं में महिलाओं को शामिल करना
- Infrastructure Support – डिजिटल और फिजिकल दोनों सपोर्ट
एक्सपर्ट नजरिया: क्या भारत तैयार है इस बदलाव के लिए?
पॉलिसी एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत में महिला उद्यमिता तेजी से बढ़ रही है, लेकिन सिस्टम अभी भी पुराना है।
अगर सरकार:
- नियम आसान करे
- मार्केट एक्सेस बढ़ाए
- और महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करे
तो भारत दुनिया के सबसे बड़े “Women-led Business Ecosystem” में से एक बन सकता है।
निष्कर्ष: बदलाव की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन रास्ता लंबा है
ORF की रिपोर्ट एक साफ संदेश देती है—
महिलाएं बिजनेस करना चाहती हैं, सक्षम भी हैं, लेकिन सिस्टम उन्हें रोक रहा है।
अगर सही नीतियां लागू होती हैं, तो:
- लाखों महिला उद्यमी आगे आ सकती हैं
- भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ा बूस्ट मिल सकता है
- और “आत्मनिर्भर भारत” का सपना और मजबूत हो सकता है
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