नई दिल्ली: आज के समय में ज्यादातर लोग अच्छी सैलरी वाली कॉर्पोरेट नौकरी को सफलता की पहचान मानते हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक महिला की कहानी इस सोच को चुनौती देती नजर आती है। करीब नौ साल तक आईटी सेक्टर में मैनेजर के पद पर काम करने वाली इस महिला ने लाखों रुपये की नौकरी छोड़कर ऑटो-रिक्शा चलाने का फैसला किया। हैरानी की बात यह है कि वह अपने इस फैसले से बिल्कुल भी पछता नहीं रही हैं। बल्कि उनका कहना है कि अब वह पहले से कहीं ज्यादा खुश और संतुष्ट हैं।
यह कहानी ऐसे समय में सामने आई है जब दुनिया भर में नौकरी के दबाव, मानसिक तनाव और वर्क-लाइफ बैलेंस की समस्याओं पर लगातार चर्चा हो रही है। बड़ी कंपनियों में काम करने वाले कई कर्मचारी बेहतर वेतन के बावजूद मानसिक दबाव और लंबे कार्य घंटों से परेशान रहते हैं। ऐसे माहौल में इस महिला का फैसला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।
नौ साल तक किया IT सेक्टर में काम
इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो के अनुसार महिला करीब नौ वर्षों तक आईटी मैनेजर के तौर पर काम कर चुकी हैं। कॉर्पोरेट दुनिया में उनके पास अच्छी सैलरी, स्थिर करियर और पेशेवर पहचान थी। लेकिन नौकरी के साथ लगातार बढ़ता तनाव, लक्ष्य हासिल करने का दबाव और निजी जीवन के लिए कम समय उन्हें परेशान करने लगा। महिला ने महसूस किया कि आर्थिक रूप से मजबूत होने के बावजूद वह मानसिक रूप से संतुष्ट नहीं हैं। इसी वजह से उन्होंने अपने जीवन में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया।
क्यों छोड़ी कॉर्पोरेट नौकरी?
Meet this woman. She drives an auto-rickshaw in Bangalore.
She worked as an IT manager for 9 years and had a salary package worth lakhs of rupees. But her job came with heavy workload, stress, tension and constant pressure from seniors.
Because of this, she decided to quit her… pic.twitter.com/znhQ6nJXZt
— Saffron Chargers (@SaffronChargers) May 30, 2026 महिला के अनुसार उनका सबसे बड़ा लक्ष्य अधिक पैसा कमाना नहीं बल्कि बेहतर जीवन जीना था। वह अपने समय पर नियंत्रण चाहती थीं और ऐसा काम करना चाहती थीं जिसमें उन्हें मानसिक शांति मिले। कॉर्पोरेट नौकरी में निश्चित समय, लगातार बैठकों और प्रदर्शन के दबाव के बीच उन्हें अपने लिए समय निकालना मुश्किल लगता था। इसके विपरीत ऑटो-रिक्शा चलाने से उन्हें अपने काम का समय खुद तय करने की आजादी मिलती है। उनका मानना है कि जीवन में केवल आय ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि मानसिक संतुष्टि और व्यक्तिगत स्वतंत्रता भी उतनी ही जरूरी है।
अब हर महीने करीब 60 हजार रुपये की कमाई

महिला ने बताया कि ऑटो चलाकर वह हर महीने लगभग 60 हजार रुपये तक कमा लेती हैं। हालांकि यह आय कुछ बड़ी कॉर्पोरेट नौकरियों की तुलना में कम हो सकती है, लेकिन उनके लिए यह पर्याप्त है क्योंकि अब उन्हें अपने काम में खुशी मिलती है। उन्होंने कहा कि पहले की तुलना में अब उनका तनाव काफी कम हो गया है और वे अपने परिवार तथा निजी जीवन को अधिक समय दे पा रही हैं।
सोशल मीडिया पर लोगों ने की तारीफ
इस कहानी को इंस्टाग्राम यूजर डॉ. नेजरीन मिधलाज ने साझा किया। उन्होंने महिला से हुई बातचीत का जिक्र करते हुए लिखा कि वह आत्मविश्वास से भरी हुई थीं और अपने फैसले से पूरी तरह संतुष्ट नजर आ रही थीं। पोस्ट वायरल होने के बाद हजारों लोगों ने महिला की सराहना की। कई यूजर्स ने कहा कि जीवन में खुशी और मानसिक शांति सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। कुछ लोगों ने इसे महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने का शानदार उदाहरण बताया। एक यूजर ने लिखा, “आखिरकार हर इंसान मन की शांति चाहता है। अगर वह अपने फैसले से खुश हैं तो यही सबसे बड़ी सफलता है।” दूसरे यूजर ने कहा, “समाज क्या सोचता है, इससे ज्यादा जरूरी है कि आप अपने काम से खुश हैं या नहीं।”
बदल रही है करियर को लेकर सोच
विशेषज्ञों का मानना है कि महामारी के बाद दुनिया भर में लोगों की प्राथमिकताएं बदली हैं। अब केवल ऊंची सैलरी ही नौकरी चुनने का आधार नहीं रह गई है। कर्मचारी मानसिक स्वास्थ्य, लचीले कार्य घंटे और जीवन की गुणवत्ता को भी महत्व देने लगे हैं। यही कारण है कि कई लोग पारंपरिक करियर छोड़कर अपने मनपसंद काम या छोटे व्यवसायों की ओर बढ़ रहे हैं। इस महिला की कहानी भी उसी बदलाव की एक मिसाल मानी जा रही है।
क्या सीख देती है यह कहानी?
यह कहानी बताती है कि सफलता की परिभाषा हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकती है। कुछ लोगों के लिए ऊंची सैलरी सफलता है, जबकि कुछ के लिए मानसिक शांति, स्वतंत्रता और खुशी ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। महिला ने यह साबित किया कि यदि कोई व्यक्ति अपने फैसले से संतुष्ट है और सम्मानजनक तरीके से आजीविका कमा रहा है, तो किसी भी पेशे को छोटा नहीं माना जा सकता।
निष्कर्ष
आईटी मैनेजर से ऑटो-रिक्शा ड्राइवर बनने वाली इस महिला की कहानी सोशल मीडिया पर इसलिए चर्चा में है क्योंकि यह पारंपरिक सफलता की धारणा को चुनौती देती है। करीब 60 हजार रुपये की मासिक कमाई के साथ वह आज खुद को पहले से ज्यादा खुश और तनावमुक्त महसूस करती हैं। उनकी कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा बन सकती है जो केवल सामाजिक अपेक्षाओं के कारण अपने पसंदीदा रास्ते पर चलने से हिचकिचाते हैं।
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