Wadia Realty Land Auction: वाडिया रियल्टी की ठाणे स्थित करीब 95 एकड़ जमीन अब नीलामी के लिए रखी गई है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की अगुवाई में लेंडर्स इस प्रॉपर्टी को बेचकर डूबे हुए कर्ज की वसूली करना चाहते हैं। इस जमीन का रिजर्व प्राइस ₹1,375 करोड़ तय किया गया है और नीलामी 20 अगस्त 2026 को होगी।
मुंबई के प्रतिष्ठित वाडिया ग्रुप की रियल एस्टेट कंपनी वाडिया रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड (Wadia Realty Pvt Ltd) को बड़ा झटका लगा है। कंपनी की ठाणे स्थित करीब 95 एकड़ जमीन की नीलामी होने जा रही है। यह कार्रवाई गो फर्स्ट (Go First) के पुराने कर्ज की वसूली के लिए की जा रही है।
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की अगुवाई में सिक्योर्ड लेंडर्स के एक समूह ने इस जमीन को नीलामी में उतारने का फैसला किया है। बैंकों ने इस प्रॉपर्टी के लिए ₹1,375 करोड़ का रिजर्व प्राइस तय किया है। यानी इससे कम कीमत पर बोली स्वीकार नहीं की जाएगी।
ठाणे में कहां स्थित है वाडिया रियल्टी की जमीन?
नीलामी नोटिस के अनुसार, वाडिया रियल्टी की यह जमीन महाराष्ट्र के ठाणे जिले में घोड़बंदर रोड के पास भयांदरपाड़ा इलाके में स्थित है।
यह कुल 94.71 एकड़ जमीन है, जिसे वाडिया रियल्टी ने गो फर्स्ट को दिए गए कर्ज के लिए सिक्योरिटी के तौर पर गिरवी रखा था। अब कर्ज की वसूली के लिए बैंक इस संपत्ति को बेचने जा रहे हैं।
नीलामी प्रक्रिया के तहत इच्छुक खरीदारों को रिजर्व प्राइस का 5% हिस्सा जमा करना होगा। जमीन की ऑनलाइन नीलामी 20 अगस्त 2026 को आयोजित की जाएगी।
Go First पर ₹3,918 करोड़ से ज्यादा का बकाया
बैंकों की यह कार्रवाई बंद हो चुकी एयरलाइन कंपनी गो एयरलाइंस (Go Airlines India), जिसे पहले Go First के नाम से जाना जाता था, के कर्ज से जुड़ी हुई है।
लेंडर्स करीब ₹3,918.55 करोड़ की वसूली करना चाहते हैं। इसमें 31 अगस्त 2023 तक का बकाया मूलधन, ब्याज और इसके बाद लागू अतिरिक्त ब्याज व अन्य शुल्क शामिल हैं।
गो फर्स्ट पर कुल मिलाकर कई बैंकों का करीब ₹6,521 करोड़ का कर्ज था। इसमें प्रमुख रूप से:
- सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया
- बैंक ऑफ बड़ौदा
- आईडीबीआई बैंक
- डॉयचे बैंक एजी
जैसे बैंक शामिल थे।
इन बैंकों ने मिलकर कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) बनाई थी, जिसने लंबे समय तक कंपनी को बचाने के लिए समाधान तलाशने की कोशिश की।
रिजॉल्यूशन प्लान नहीं मिलने के बाद लिया गया लिक्विडेशन का फैसला
गो फर्स्ट के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया करीब दो साल तक चली। हालांकि, कंपनी को दोबारा शुरू करने के लिए कोई मजबूत खरीदार या व्यवहारिक रिजॉल्यूशन प्लान नहीं मिल पाया।
इसके बाद कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स ने कंपनी को लिक्विडेट करने का फैसला किया। जनवरी 2025 में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने भी गो फर्स्ट के लिक्विडेशन को मंजूरी दे दी।
इसके बाद बैंकों के लिए कंपनी की गिरवी रखी गई संपत्तियों को बेचकर कर्ज वसूलने का रास्ता खुल गया।
क्यों बंद हुई थी Go First एयरलाइन?
गो फर्स्ट वाडिया ग्रुप की एविएशन कंपनी थी। कंपनी को साल 2004 में रजिस्टर किया गया था और 2005 में इसने Go Air ब्रांड के नाम से उड़ान सेवाएं शुरू की थीं।
यह भारत की प्रमुख लो-कॉस्ट एयरलाइंस में शामिल थी। हालांकि, साल 2023 में कंपनी ने NCLT में दिवालिया प्रक्रिया के लिए आवेदन किया और अपनी उड़ान सेवाएं बंद कर दीं।
कंपनी ने इसके लिए मुख्य रूप से Pratt & Whitney इंजन की समस्या को जिम्मेदार बताया था। एयरबस A320neo विमानों के कई इंजन खराबी के कारण जमीन पर खड़े रहे, जिससे कंपनी के ऑपरेशन पर भारी असर पड़ा।
Go First का IPO प्लान भी नहीं हो पाया था सफल
गो फर्स्ट ने साल 2021 में करीब ₹3,600 करोड़ का IPO लाने की योजना बनाई थी। कंपनी इस रकम का इस्तेमाल कर्ज कम करने और कारोबार की वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करने के लिए करना चाहती थी।
लेकिन कोरोना महामारी, खराब बाजार परिस्थितियों और बढ़ते वित्तीय दबाव के कारण IPO योजना लगातार टलती रही। आखिरकार कंपनी के दिवालिया होने के बाद यह योजना पूरी तरह खत्म हो गई।
वाडिया रियल्टी के लिए क्यों अहम है यह मामला?
रियल एस्टेट सेक्टर में वाडिया ग्रुप एक जाना-पहचाना नाम है। ठाणे की यह जमीन कंपनी की बड़ी संपत्तियों में शामिल थी, लेकिन गो फर्स्ट के कर्ज की गारंटी के रूप में गिरवी रखे जाने के कारण अब यह नीलामी के दायरे में आ गई है।
बैंकों की कोशिश है कि इस संपत्ति की बिक्री से अधिकतम राशि हासिल कर लंबे समय से अटके कर्ज की भरपाई की जा सके।
निष्कर्ष
वाडिया रियल्टी की 94.71 एकड़ जमीन की नीलामी गो फर्स्ट के कर्ज संकट का अगला बड़ा कदम है। ₹1,375 करोड़ के रिजर्व प्राइस वाली यह प्रॉपर्टी 20 अगस्त 2026 को नीलाम होगी। अब देखना होगा कि इस हाई-वैल्यू रियल एस्टेट एसेट के लिए कितने खरीदार सामने आते हैं और बैंकों को कितनी रिकवरी मिल पाती है।


