देश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और जलाशयों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (Pradhan Mantri Surya Sarovar Yojana – PM-SSY) को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस महत्वाकांक्षी योजना को हरी झंडी दिखाई है। इसके तहत देशभर में जलाशयों, बांधों और औद्योगिक तालाबों पर फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक (Floating Solar PV) परियोजनाएं विकसित की जाएंगी, जिनमें ऊर्जा भंडारण (Energy Storage System) भी शामिल होगा।
सरकार का मानना है कि यह योजना न केवल भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को बढ़ाएगी बल्कि भूमि की कमी जैसी बड़ी चुनौती का भी समाधान करेगी। योजना के लिए 5,070 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है।
Highlights
- प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी
- 5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य
- 10,000 MWh ऊर्जा भंडारण क्षमता भी जोड़ी जाएगी
- परियोजनाओं को मिलेगा 1 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट तक अनुदान
- प्रति परियोजना 50 लाख रुपये तक प्री-डेवलपमेंट ग्रांट
- हर साल करीब 10 मिलियन टन CO₂ उत्सर्जन में कमी का अनुमान
- 16,000 से 17,000 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बनने की उम्मीद
क्या है प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना?
प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY) का उद्देश्य देश के जलाशयों, झीलों, बांधों और औद्योगिक जल निकायों पर फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट स्थापित करना है। इन परियोजनाओं के साथ आधुनिक ऊर्जा भंडारण प्रणाली (Battery Energy Storage System) भी जोड़ी जाएगी ताकि सौर ऊर्जा का बेहतर उपयोग किया जा सके और बिजली आपूर्ति अधिक विश्वसनीय बन सके।
इस योजना से उन क्षेत्रों में भी सौर ऊर्जा उत्पादन संभव होगा जहां जमीन की उपलब्धता सीमित है।
5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर क्षमता का लक्ष्य
सरकार ने योजना के तहत 5,000 मेगावाट (MW) फ्लोटिंग सोलर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ कम से कम दो घंटे की ऊर्जा भंडारण क्षमता वाली बैटरी प्रणाली स्थापित की जाएगी, जिससे कुल 10,000 MWh स्टोरेज क्षमता तैयार होगी।
परियोजनाओं को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 के बीच मंजूरी दी जाएगी, जबकि केंद्रीय वित्तीय सहायता का वितरण 2032-33 तक जारी रहेगा।
भारत में फ्लोटिंग सोलर की कितनी क्षमता है?
फिलहाल भारत में फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं की स्थापित क्षमता करीब 700 मेगावाट है। नई योजना के लागू होने के बाद इसमें 5,000 मेगावाट की अतिरिक्त क्षमता जुड़ेगी, जिससे भारत इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ सकेगा।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी (NISE) के अनुसार देश के जलाशयों और अन्य इनलैंड वॉटर बॉडीज में लगभग 102.18 GWp फ्लोटिंग सोलर क्षमता विकसित करने की संभावनाएं मौजूद हैं।
सरकार कितनी वित्तीय सहायता देगी?
योजना के तहत पात्र परियोजनाओं को आकर्षित करने और शुरुआती जोखिम कम करने के लिए केंद्र सरकार वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगी।
- सफलतापूर्वक चालू होने वाली परियोजनाओं को 1 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट केंद्रीय वित्तीय सहायता मिलेगी।
- परियोजना की प्रारंभिक तैयारी जैसे फिजिबिलिटी स्टडी, बाथिमेट्री सर्वे, हाइड्रोग्राफी विश्लेषण, पर्यावरणीय अध्ययन और अन्य तकनीकी कार्यों के लिए 50 लाख रुपये प्रति परियोजना तक अनुदान दिया जाएगा।
इस सहायता का उद्देश्य निजी और सरकारी निवेश को बढ़ावा देना है।
किन राज्यों को मिलेगा फायदा?
प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना का लाभ देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलेगा। जहां भी बड़े जलाशय, बांध, झीलें या औद्योगिक तालाब उपलब्ध हैं, वहां फ्लोटिंग सोलर परियोजनाएं विकसित की जा सकेंगी।
इससे राज्यों को स्वच्छ बिजली उत्पादन बढ़ाने और स्थानीय ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
योजना से क्या होंगे बड़े फायदे?
प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना कई स्तरों पर लाभ पहुंचाएगी।
- जलाशयों का बेहतर उपयोग होगा और कृषि या अन्य जरूरतों के लिए भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता कम होगी।
- ऊर्जा भंडारण प्रणाली जुड़ने से बिजली ग्रिड की स्थिरता और विश्वसनीयता बढ़ेगी।
- हर वर्ष लगभग 10 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है।
- फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म, सोलर मॉड्यूल, बैटरी स्टोरेज और अन्य उपकरणों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।
- परियोजना की पूरी वैल्यू चेन में 16,000 से 17,000 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
भारत के ग्रीन एनर्जी मिशन को मिलेगी मजबूती
भारत ने वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य तय किया है। प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। जलाशयों पर सोलर परियोजनाएं विकसित होने से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा, भूमि पर दबाव कम होगा और देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी।
यदि योजना तय समय पर लागू होती है तो आने वाले वर्षों में भारत फ्लोटिंग सोलर ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो सकता है।


