नई दिल्ली: भारत अमेरिका के साथ व्यापार से जुड़े मुद्दों को एकतरफा कदमों के बजाय आपसी बातचीत से सुलझाना चाहता है। उसने USTR (US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव) से अपने प्रस्तावित 12.5% टैरिफ पर फिर से विचार करने को कहा है। भारत ने फोर्स्ड लेबर यानी जबरन मजदूरी से जुड़ी चिंताओं पर अमेरिकी ‘सेक्शन 301’ जांच में गंभीर विसंगतियों का हवाला दिया है।
‘जबरन मजदूरी खत्म करना हमारी संवैधानिक जिम्मेदारी’
पब्लिक हियरिंग में हिस्सा लेते हुए कॉमर्स डिपार्टमेंट के जॉइंट सेक्रेटरी बृज मोहन मिश्रा ने कहा कि जबरन मजदूरी के मुद्दों पर भारत की सच्ची भागीदारी को देखते हुए भारत USTR के फैसले पर अपनी चिंता जाहिर करता है। भारत जबरन मजदूरी को खत्म करने को एक संवैधानिक जिम्मेदारी और अंतरराष्ट्रीय कानून व सिद्धांत के मामले के तौर पर पूरी गंभीरता से लेता है।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, “भारत, USTR की भारत के खिलाफ रिपोर्ट और नतीजों पर अपनी कड़ी आपत्ति और चिंता जाहिर करना चाहता है।”
जरूरी कानूनी मानकों को नहीं किया पूरा
भारतीय पक्ष का मानना है कि USTR ने ट्रेड एक्ट के सेक्शन 301(d) के तहत जरूरी कानूनी मानकों को पूरा नहीं किया है। बिना किसी पुख्ता सबूत या कानूनी आवश्यकताओं के आधार के, सिर्फ जबरदस्ती मजदूरी वाले आयात पर रोक न होने को सेक्शन 301 के तहत ‘अनुचित’ नहीं माना जा सकता।
8 जुलाई को हुई और USTR की वेबसाइट पर प्रकाशित हियरिंग के लिखित ट्रांसक्रिप्ट के अनुसार:
- USTR का फैसला पूरे देश पर टैरिफ लगाने का कोई ठोस कारण नहीं बताता।
- यह रिपोर्ट भारत सहित 46 अर्थव्यवस्थाओं को गलत तरीके से एक ही कैटेगरी में खड़ा कर देती है।
- इस कार्यप्रणाली में बड़ी खामियां हैं क्योंकि यह फैसला कुछ ही चुनिंदा अर्थव्यवस्थाओं की केस स्टडीज और व्यापक व्यापार पैटर्न के अनुमानों पर आधारित है।
बृज मोहन मिश्रा ने आगे जोड़ा कि यह रिपोर्ट केवल व्यापक डेटा पर निर्भर करती है और मान लेती है कि जबरन मजदूरी से जुड़े आयातित सामान को अमेरिका भेजा जाता है। इसके लिए कोई विशिष्ट सेक्टर या देश-विशेष का सबूत पेश नहीं किया गया है। भारत के मामले में ऐसा कोई पर्याप्त प्रमाण नहीं है जिससे लगे कि अमेरिकी उद्योग को इससे कोई अनुचित प्रतिस्पर्धी लाभ मिल रहा है।
भारत का सुझाव:
“हमारा सुझाव है कि USTR फेडरल रजिस्टर नोटिस की रिपोर्ट में बताई गई कमियों को देखते हुए टैरिफ लगाने के फैसले पर फिर से विचार करे। हम चाहते हैं कि व्यापार से जुड़ी किसी भी समस्या का समाधान भारत-अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार बातचीत के दायरे में किया जाए, न कि इस जांच जैसे एकतरफा कदमों से।”
चावल निर्यात को लेकर अमेरिकी दावों पर आपत्ति
एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (APEDA) की ओर से बात रखते हुए वॉशिंगटन में भारतीय दूतावास के फर्स्ट सेक्रेटरी श्रेयंस गुप्ता ने USTR की उन टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई, जिनमें कहा गया था कि भारत में जबरन मजदूरी से उगाए गए चावल का आयात होता है।
गुप्ता ने आंकड़ों के साथ अपनी बात रखते हुए कहा:
- भारत में चावल का आयात बेहद कम है और यह सिर्फ खास तरह की चावल की किस्मों की जरूरतों को पूरा करने के लिए होता है।
- भारत से अमेरिका को एक्सपोर्ट किए जाने वाले चावल की वैल्यू के मुकाबले भारत में आयात किए जाने वाले चावल की कुल वैल्यू 3 फीसदी भी नहीं है।
- भारत में पहले से ही ऐसे कड़े रेगुलेटरी नियम हैं जो जबरन मजदूरी से पैदा किए गए आयातित चावल को भारत से एक्सपोर्ट होने से रोकते हैं।
उन्होंने मांग की कि भारत के खिलाफ इस मौजूदा जांच को बिना किसी पूर्वाग्रह के रद्द किया जाना चाहिए और यदि कार्यवाही जारी रहती है, तो भारतीय चावल को इस प्रस्तावित ड्यूटी से पूरी तरह छूट मिलनी चाहिए।
अतिरिक्त टैरिफ से दोनों देशों को नुकसान: उद्योग जगत (FICCI & CII)
भारतीय उद्योग मंडलों ने भी इस फैसले पर अमेरिकी प्रशासन को आगाह किया है:
- फिक्की (FICCI): चैंबर ने चेतावनी दी है कि इस अतिरिक्त टैरिफ से न केवल भारतीय एक्सपोर्टर्स की लागत बढ़ेगी, बल्कि अमेरिकी मैन्युफैक्चरर्स, इंपोर्टर्स, रिटेलर्स और आखिरकार वहां के आम कंज्यूमर्स की जेब पर भी सीधा बोझ पड़ेगा। यह उन वैध व्यवसायों की लागत बढ़ाएगा जो पहले से ही सभी नियमों का पालन कर रहे हैं।
- सीआईआई (CII): CII ने कहा कि प्रस्तावित 12.5 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ न तो पेश किए गए सबूतों से समर्थित है और न ही इससे अमेरिका अपने तय पॉलिसी लक्ष्यों को हासिल कर पाएगा। USTR की रिपोर्ट यह साबित करने में पूरी तरह नाकाम रही है कि भारत का पॉलिसी फ्रेमवर्क अमेरिकी व्यापार पर किसी भी तरह का बोझ डालता है।
पृष्ठभूमि: USTR ने जबरन मजदूरी और जरूरत से ज्यादा इंडस्ट्रियल कैपेसिटी से जुड़ी चिंताओं को लेकर दुनिया की 60 अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ 11 और 12 मार्च, 2026 को सेक्शन 301 के तहत दो अलग-अलग जांच शुरू की थीं।


