नई दिल्ली: यूक्रेन के साथ लंबे समय से चल रहे संघर्ष के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल (Crude Oil) उत्पादकों और रिफाइनरों में से एक, रूस अब अप्रत्याशित रूप से भारत से पेट्रोल खरीद रहा है।
यूक्रेन के हमलों के कारण रूस के रिफाइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे वहां ईंधन की किल्लत हो गई है। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ (ToI) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बना पेट्रोल अंतरराष्ट्रीय व्यापार चैनलों (International Trade Channels) के जरिए रूस पहुंच रहा है।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री का स्पष्टीकरण
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस मामले पर स्थिति साफ की है:
- कोई डायरेक्ट डील नहीं: भारतीय कंपनियां सीधे रूस को पेट्रोल का निर्यात नहीं कर रही हैं।
- इंटरनेशनल ट्रेडर्स की भूमिका: रूसी खरीदारों तक पहुंचने से पहले यह ईंधन अंतरराष्ट्रीय व्यापारियों (International Traders) द्वारा खरीदा जाता है।
- यह कोई सरकार-समर्थित या कंपनी-से-कंपनी (Company-to-Company) सप्लाई सिस्टम नहीं है।
क्यों लड़खड़ाया रूस का रिफाइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर?
रूस पारंपरिक रूप से रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का एक बड़ा निर्यातक रहा है, लेकिन हालिया परिस्थितियों ने पासा पलट दिया है:
- ड्रोन हमलों से नुकसान: पिछले एक साल में लगातार हुए ड्रोन हमलों और सैन्य कार्रवाई ने रूस की रिफाइनिंग क्षमता के एक बड़े हिस्से को ठप कर दिया है।
- ऐतिहासिक निचले स्तर पर प्रोडक्शन: रूस में रिफाइनरी का इस्तेमाल कई सालों के निचले स्तर पर आ गया है, जिससे पेट्रोल उत्पादन में भारी गिरावट आई है।
- जटिल मरम्मत प्रक्रिया: केवल कच्चे तेल को अलग करने वाली इकाइयां (Crude Distillation Units) ही नहीं, बल्कि सेकेंडरी प्रोसेसिंग सुविधाएं भी प्रभावित हुई हैं। इनके विशेष उपकरणों को बनाने और डिलीवर करने में लंबा समय लगता है।
- निर्यात पर रोक: घरेलू मांग (विशेषकर गर्मियों के पीक सीजन में) को पूरा करने के लिए मॉस्को को पेट्रोल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाना पड़ा है और विदेशों से मदद लेनी पड़ रही है।
‘इनडायरेक्ट रूट’ से रूस पहुंचा भारतीय कार्गो
रिपोर्ट्स के अनुसार, नायरा एनर्जी की वाडिनार रिफाइनरी से लोड किया गया पेट्रोल का एक कार्गो सीधे रूस जाने के बजाय एक अप्रत्यक्ष व्यापार मार्ग (Indirect Trading Route) से होकर मॉस्को पहुंचा।
नोट: नायरा एनर्जी रूसी कच्चे तेल को प्रोसेस करती है। यूरोपीय प्रतिबंधों के कड़े होने के बाद से यह कंपनी कच्चे तेल की खरीद और रिफाइंड प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापारियों पर निर्भर है। यह घटनाक्रम दिखाता है कि प्रतिबंधों के बाद ग्लोबल एनर्जी ट्रेड कितना जटिल और अपारदर्शी (Opaque) हो गया है।
हर मांग को पूरी करने की स्थिति में भारत
वैश्विक स्तर पर भारत एक बड़े रिफाइनिंग हब के रूप में उभरा है:
- बड़ा एक्सपोर्ट बेस: भारत हर दिन लगभग 350,000 से 400,000 बैरल पेट्रोल नॉर्थ अमेरिका से लेकर अफ्रीका तक के देशों को एक्सपोर्ट करता है।
- यूरो-5 स्पेसिफिकेशन्स: भारत अलग-अलग क्वालिटी स्टैंडर्ड्स का ईंधन बनाने में सक्षम है, जिसमें रूस में इस्तेमाल होने वाला यूरो-5 पेट्रोल भी शामिल है।
- रिफाइनिंग हब के रूप में मजबूती: सस्ते रूसी कच्चे तेल को रिफाइंड फ्यूल में बदलकर वैश्विक बाजारों में बेचने की भारत की क्षमता ने इसकी फ्लेक्सिबिलिटी (लचीलेपन) को साबित किया है।
आगे क्या? (भविष्य का अनुमान)
- लगातार बनी रहेगी मांग: रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुसार, जब तक रूस अपनी क्षतिग्रस्त रिफाइनरियों को ठीक नहीं कर लेता, तब तक वहां इंपोर्टेड पेट्रोल की मांग बनी रहेगी। रूस इसके लिए बेलारूस जैसे देशों से भी संपर्क कर रहा है।
- भारत पर असर: विश्लेषकों का मानना है कि रूस को जाने वाली ईंधन की मात्रा भारत के कुल एक्सपोर्ट बेस के मुकाबले बहुत कम है, इसलिए भारतीय रिफाइनिंग सेक्टर पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।
- भू-राजनीतिक जोखिम (Geopolitical Risks): जानकारों ने चेतावनी दी है कि यदि रूसी ऊर्जा व्यापार में शामिल शिपिंग कंपनियों, ट्रेडर्स या बैंकों पर प्रतिबंधों का दायरा और बढ़ाया गया, तो मौजूदा सप्लाई चेन फिर से प्रभावित हो सकती है।


