US Tariff on India: अमेरिका ने भारतीय सामानों पर 10% टैरिफ लागू कर दिया है। पहली नजर में यह फैसला भारतीय निर्यातकों के लिए चुनौती जैसा लग सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए यह स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि चीन, वियतनाम, थाईलैंड, यूएई, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे कई प्रतिस्पर्धी देशों पर इससे अधिक 12.5% टैरिफ लगाया गया है। ऐसे में अमेरिकी आयातकों के लिए भारतीय उत्पाद अधिक आकर्षक विकल्प बन सकते हैं।
भारत पर 10% टैरिफ, लेकिन राहत की बात भी
अमेरिका ने Section 301 (धारा 301) के तहत भारतीय उत्पादों पर 10% टैरिफ लागू किया है। इससे पहले 12.5% टैरिफ लगाए जाने की चर्चा थी, लेकिन अंतिम निर्णय में इसे घटाकर 10% कर दिया गया। आर्थिक विशेषज्ञ इसे भारत के लिए राहत भरा कदम मान रहे हैं।
अर्थशास्त्री सुनील आर. पारेख के अनुसार, टैरिफ दर में 12.5% से 10% की कमी यह संकेत देती है कि भारत अमेरिका के साथ अपनी व्यापारिक बातचीत में बेहतर तरीके से अपना पक्ष रखने में सफल रहा।
क्या भारतीय निर्यात पर पड़ेगा बड़ा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस टैरिफ का भारत के कुल निर्यात पर फिलहाल कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है।
सुनील आर. पारेख के अनुसार, 2.5% का अंतर आर्थिक दृष्टि से बहुत बड़ा बदलाव नहीं लाता, लेकिन यह भारत को प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में जरूर खड़ा करता है। उनका कहना है कि भारतीय उद्योगों को केवल अमेरिकी बाजार पर निर्भर रहने के बजाय नए निर्यात बाजारों की तलाश भी जारी रखनी चाहिए।
टेक्सटाइल सेक्टर को मिल सकता है सबसे बड़ा फायदा
कम टैरिफ का सबसे अधिक लाभ टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर को मिलने की संभावना जताई जा रही है।
भारत इस क्षेत्र में चीन, वियतनाम और अन्य एशियाई देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा करता है। अब जब कई प्रतिस्पर्धी देशों पर अधिक टैरिफ लगाया गया है, तो अमेरिकी खरीदार भारतीय उत्पादों की ओर अधिक रुख कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भारत तकनीक, आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग और गुणवत्ता सुधार पर निवेश बढ़ाता है, तो यह अवसर लंबे समय तक लाभदायक साबित हो सकता है।
FIEO ने क्या कहा?
देश के शीर्ष निर्यातक संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (FIEO) का मानना है कि भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा पर इस फैसले का बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
संगठन के अनुसार, भारत उन देशों में शामिल है जिन पर सबसे कम टैरिफ लगाया गया है। जबकि कई प्रतिस्पर्धी देशों पर 12.5% की उच्च दर लागू हुई है। इससे भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है।
किन देशों पर भारत से ज्यादा टैरिफ?
अमेरिका ने निम्न देशों पर 12.5% टैरिफ लागू किया है:
- चीन
- वियतनाम
- थाईलैंड
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
- ब्राजील
- दक्षिण अफ्रीका
इन देशों की तुलना में भारत पर केवल 10% टैरिफ लागू होने से अमेरिकी कंपनियों के लिए भारतीय उत्पाद अपेक्षाकृत सस्ते पड़ सकते हैं।
किन सेक्टरों को मिली राहत?
कुछ प्रमुख उद्योगों को इस अतिरिक्त टैरिफ से छूट मिलती रहेगी। इनमें शामिल हैं:
- स्टील
- एल्युमीनियम
- ऑटो कंपोनेंट्स
- फार्मास्यूटिकल्स
- फार्मा अवयव (API)
- कुछ कृषि उत्पाद
ये उत्पाद पहले से Section 232 के तहत अलग व्यवस्था में आते हैं, इसलिए उन पर इस नए टैरिफ का अतिरिक्त प्रभाव नहीं पड़ेगा।
GTRI ने फैसले पर उठाए सवाल
थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने अमेरिका के “फोर्स्ड लेबर” (बंधुआ मजदूरी) से जुड़े टैरिफ लगाने के फैसले पर सवाल उठाए हैं।
GTRI का कहना है कि अमेरिकी सरकार ने इस आरोप के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया है। संस्था के अनुसार यह कदम व्यापारिक बाधाओं को बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है।
भारत के लिए आगे की रणनीति क्या हो?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को केवल कम टैरिफ का लाभ लेने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। आने वाले वर्षों में निम्न क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देना होगा:
- नए वैश्विक निर्यात बाजारों की खोज
- हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा
- गुणवत्ता और उत्पादकता में सुधार
- सप्लाई चेन को मजबूत बनाना
- निर्यातकों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना
यदि इन क्षेत्रों में तेजी से काम किया गया तो भारत भविष्य में वैश्विक सप्लाई चेन का और मजबूत केंद्र बन सकता है।
निष्कर्ष
अमेरिका द्वारा भारत पर 10% टैरिफ लगाना पहली नजर में चुनौती लग सकता है, लेकिन वैश्विक प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में यह भारत के लिए अवसर भी बन सकता है। चीन और वियतनाम जैसे प्रमुख प्रतिस्पर्धी देशों पर अधिक टैरिफ लगाए जाने से भारतीय निर्यातकों, खासकर टेक्सटाइल और श्रम-प्रधान उद्योगों को अतिरिक्त बढ़त मिलने की संभावना है। हालांकि, दीर्घकालिक सफलता के लिए भारत को निर्यात विविधीकरण, तकनीकी निवेश और नए बाजारों पर लगातार ध्यान देना होगा।


