US-Iran War: पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर उड़ रहे अमेरिका के MQ-1 प्रीडेटर ड्रोन को मार गिराया है। हालांकि, इस दावे की अभी तक अमेरिका की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो यह हालिया अमेरिका-ईरान सैन्य टकराव का एक बड़ा घटनाक्रम माना जाएगा।
ईरान ने अमेरिकी MQ-1 ड्रोन गिराने का किया दावा
ईरान के सरकारी टीवी नेटवर्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि “कुछ मिनट पहले ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर उड़ रहे अमेरिकी MQ-1 ड्रोन को सफलतापूर्वक मार गिराया है।” इसके बाद ईरान के कई सरकारी मीडिया संस्थानों ने भी इस दावे को प्रसारित किया।
हालांकि, ड्रोन को किस हथियार से निशाना बनाया गया, यह घटना किस समय हुई और ड्रोन का मलबा कहां गिरा, जैसी अहम जानकारियां अभी सार्वजनिक नहीं की गई हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) और व्हाइट हाउस ने इस दावे पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
लगातार तीसरी रात अमेरिकी हमले, बढ़ा सैन्य तनाव
यह दावा ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने लगातार तीसरी रात ईरान से जुड़े कई सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य ईरान समर्थित सैन्य गतिविधियों को कमजोर करना और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी दोबारा लागू करने की घोषणा की है। साथ ही होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर 20% शुल्क लगाने की योजना का भी संकेत दिया गया है। इन फैसलों से पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों है दुनिया के लिए इतना अहम?
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) की बड़ी मात्रा इसी रास्ते से गुजरती है। इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य गतिविधि या संघर्ष का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और बढ़ता है, तो वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है और कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।
यूएई के टैंकरों पर हमला, भारतीय क्रू सदस्य की मौत
तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी बड़ा दावा किया है। यूएई के अनुसार, ओमान के समुद्री क्षेत्र के पास ईरानी क्रूज़ मिसाइलों के हमले में उसके दो तेल टैंकर क्षतिग्रस्त हुए हैं।
इस घटना में एक भारतीय चालक दल (Crew) सदस्य की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य लोग घायल बताए गए हैं। घायल कर्मचारियों का इलाज कराया जा रहा है। इस घटना ने भारत समेत कई देशों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक खाड़ी देशों के समुद्री और ऊर्जा क्षेत्र में कार्यरत हैं।
क्या है MQ-1 Predator ड्रोन?
MQ-1 Predator अमेरिका द्वारा विकसित एक अत्याधुनिक मानवरहित लड़ाकू और निगरानी विमान (Unmanned Aerial Vehicle – UAV) है। इसका उपयोग मुख्य रूप से खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी (Surveillance), लक्ष्य की पहचान और सटीक हमलों के लिए किया जाता है।
MQ-1 Predator की प्रमुख विशेषताएं
- लंबी दूरी तक उड़ान भरने में सक्षम।
- कई घंटों तक लगातार निगरानी कर सकता है।
- हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे और सेंसर से लैस।
- AGM-114 Hellfire मिसाइल दागने की क्षमता।
- आतंकवाद विरोधी अभियानों और सीमा निगरानी में व्यापक उपयोग।
कितनी है MQ-1 ड्रोन की कीमत?
रिपोर्ट्स के अनुसार, एक MQ-1 Predator ड्रोन की कीमत लगभग 40 लाख डॉलर (करीब 34–35 करोड़ रुपये) होती है। वहीं इसके पूरे ऑपरेशनल सिस्टम, ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और सपोर्ट सिस्टम सहित कुल लागत करीब 2 करोड़ डॉलर (लगभग 170 करोड़ रुपये) तक पहुंच सकती है।
यदि ईरान का दावा सही साबित होता है, तो यह अमेरिका के लिए केवल सैन्य नुकसान ही नहीं बल्कि रणनीतिक और राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाएगा।
अभी नहीं हुई स्वतंत्र पुष्टि
ध्यान देने वाली बात यह है कि ईरान द्वारा MQ-1 ड्रोन मार गिराने के दावे की अभी तक किसी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय एजेंसी या अमेरिकी प्रशासन ने पुष्टि नहीं की है। इसलिए इस खबर को फिलहाल दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। आने वाले घंटों में अमेरिका की आधिकारिक प्रतिक्रिया और उपग्रह या अन्य स्वतंत्र स्रोतों से मिलने वाली जानकारी के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।


