अमेरिका से भारत में रिकॉर्ड निवेश, कंपनियों ने बदला पैसा भेजने का तरीका
नई दिल्ली। भारत में विदेशी निवेश का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। लंबे समय तक टैक्स हेवन देशों के जरिए भारत में पैसा लगाने वाली विदेशी कंपनियां अब सीधे निवेश को प्राथमिकता दे रही हैं। यही वजह है कि वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में अमेरिका भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरा है। अमेरिका ने इस मामले में मॉरीशस को पीछे छोड़ दिया, जबकि सिंगापुर पहले स्थान पर बना हुआ है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, FY26 में अमेरिका से भारत में आने वाला इक्विटी निवेश बढ़कर 11.2 अरब डॉलर (करीब 1.05 लाख करोड़ रुपये) पहुंच गया। यह पिछले वित्त वर्ष FY25 के मुकाबले 103.6% अधिक है। इससे साफ है कि अमेरिकी कंपनियां अब भारत को सिर्फ एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि लंबी अवधि के निवेश केंद्र के रूप में देख रही हैं।
यह बदलाव ऐसे समय आया है जब भारत तेजी से मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स और सप्लाई चेन हब के रूप में उभर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन पर निर्भरता कम करने की वैश्विक रणनीति का भी फायदा भारत को मिल रहा है।
सिंगापुर अब भी सबसे बड़ा निवेशक
हालांकि अमेरिका ने मॉरीशस को पीछे छोड़ दिया, लेकिन सिंगापुर भारत में FDI का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है। FY26 में सिंगापुर से भारत में 19.8 अरब डॉलर का निवेश आया, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 33% अधिक है।
मॉरीशस से निवेश घटकर 6.6 अरब डॉलर रह गया। इसकी बड़ी वजह भारत और मॉरीशस के बीच टैक्स संधि में किए गए बदलाव माने जा रहे हैं। पहले कई कंपनियां टैक्स बचाने के लिए मॉरीशस रूट का इस्तेमाल करती थीं, लेकिन अब नियम सख्त होने के बाद सीधे निवेश बढ़ रहा है।
किस देश से कितना निवेश आया?
| देश | FY25 (अरब डॉलर) | FY26 (अरब डॉलर) | बदलाव |
|---|---|---|---|
| सिंगापुर | 14.9 | 19.8 | +32.9% |
| अमेरिका | 5.5 | 11.2 | +103.6% |
| मॉरीशस | 8.3 | 6.6 | -20.5% |
| जापान | 2.5 | 3.7 | +48% |
| नीदरलैंड्स | 4.6 | 3.4 | -26.1% |
अमेरिकी कंपनियां भारत में क्यों बढ़ा रही हैं निवेश?
विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे कई बड़े कारण हैं:
1. चीन प्लस वन रणनीति
कोविड महामारी और जियोपॉलिटिकल तनाव के बाद वैश्विक कंपनियां चीन पर निर्भरता कम करना चाहती हैं। भारत को इसका बड़ा फायदा मिल रहा है।
2. डिजिटल इंडिया और डेटा सेंटर बूम
भारत में इंटरनेट यूजर्स, AI, क्लाउड सर्विसेज और डिजिटल पेमेंट्स की तेजी से बढ़ती मांग ने अमेरिकी टेक कंपनियों को आकर्षित किया है।
3. मैन्युफैक्चरिंग पर सरकार का फोकस
PLI स्कीम, सेमीकंडक्टर मिशन और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग जैसे कार्यक्रमों ने विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।
4. स्थिर आर्थिक ग्रोथ
वैश्विक मंदी के बीच भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। यही वजह है कि लंबी अवधि के निवेशक भारत को सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं।
कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर सेक्टर बना निवेशकों की पहली पसंद
FY26 में सबसे ज्यादा निवेश कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर सेक्टर में आया। इस सेक्टर ने सर्विसेज सेक्टर को पीछे छोड़ दिया।
| सेक्टर | FY25 (अरब डॉलर) | FY26 (अरब डॉलर) | बदलाव |
|---|---|---|---|
| कंप्यूटर/सॉफ्टवेयर | 7.8 | 13.9 | +78.2% |
| सर्विसेज | 9.3 | 10 | +7.5% |
| ट्रेडिंग | 4.2 | 4 | -4.8% |
| रिन्यूएबल्स | 4 | 3 | -25% |
| फूड प्रोसेसिंग | 0.5 | 3 | +500% |
डेटा सेंटरों में बढ़ते निवेश को इस उछाल की बड़ी वजह माना जा रहा है। AI और क्लाउड टेक्नोलॉजी की बढ़ती जरूरतों के कारण बड़ी विदेशी कंपनियां भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही हैं।
फूड प्रोसेसिंग और शिपिंग सेक्टर में भी जबरदस्त उछाल
FY26 में फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में निवेश पांच गुना बढ़ गया। सरकार की एग्री-प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट बढ़ाने की योजनाओं का फायदा इस सेक्टर को मिला। इसके अलावा समुद्री परिवहन और शिपिंग से जुड़ी गतिविधियों में भी भारी निवेश देखने को मिला। अधिकारियों के मुताबिक इस सेक्टर में करीब 30 गुना तक वृद्धि दर्ज की गई है। भारत के बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स और निर्यात क्षमता को मजबूत करने पर सरकार का फोकस इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है।
टैक्स हेवन देशों का असर पूरी तरह खत्म नहीं
हालांकि मॉरीशस जैसे देशों से निवेश घटा है, लेकिन टैक्स हेवन का इस्तेमाल पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। केमैन आइलैंड्स से भारत में निवेश FY25 के 371 मिलियन डॉलर से बढ़कर FY26 में 2.1 अरब डॉलर पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कुछ बड़े निवेश सौदों की वजह से हो सकता है। हालांकि सरकार लगातार पारदर्शी निवेश प्रणाली को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है।
पीयूष गोयल ने क्या कहा?
वाणिज्य और उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने हाल ही में कहा था कि अमेरिकी कंपनियों ने भारत में लगभग 60 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया है। उन्होंने कहा कि सरकार सप्लाई चेन को मजबूत करने और आयात निर्भरता कम करने के लिए कई बड़े प्रस्तावों पर काम कर रही है।
गोयल के मुताबिक भारत अब सिर्फ एक उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
अमेरिका और अन्य विकसित देशों से बढ़ता FDI भारत के लिए कई मायनों में अहम माना जा रहा है रोजगार बढ़ेंगे, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होगा, मैन्युफैक्चरिंग मजबूत होगी, डॉलर इनफ्लो बढ़ेगा, रुपये को स्थिरता मिल सकती है, एक्सपोर्ट सेक्टर को फायदा होगा. अगर यह ट्रेंड जारी रहता है तो आने वाले वर्षों में भारत एशिया का सबसे बड़ा निवेश केंद्र बन सकता है। खासतौर पर टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन एनर्जी और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में भारी निवेश की संभावना बनी हुई है।
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