यूपीआई यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस आज भारत में डिजिटल पेमेंट का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुका है। चाय की दुकान से लेकर बड़े स्टोर, ऑनलाइन शॉपिंग और बिल पेमेंट तक, लोग रोजाना यूपीआई का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में यूपीआई ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से जुड़ी खबर सामने आने के बाद लोगों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या अब यूपीआई से पेमेंट करने पर उन्हें भी अतिरिक्त चार्ज देना पड़ेगा।
अगर आप भी रोजाना यूपीआई से भुगतान करते हैं तो राहत की बात है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, आम कंज्यूमर्स के लिए यूपीआई पेमेंट फ्री बना रहेगा। MDR से जुड़ा प्रस्ताव मुख्य रूप से कुछ खास बिजनेस और मर्चेंट ट्रांजेक्शंस से संबंधित है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर बार यूपीआई से पेमेंट करने पर ग्राहक से कोई अतिरिक्त फीस वसूली जाएगी।
पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया ने क्या कहा?
यूपीआई यूजर्स के बीच बढ़ते कन्फ्यूजन को देखते हुए पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने 7 अगस्त को स्थिति स्पष्ट की। PCI के मुताबिक, कंज्यूमर्स के लिए यूपीआई पेमेंट फ्री बना रहेगा। छोटे दुकानदारों को भी यूपीआई से पेमेंट स्वीकार करने के लिए किसी तरह की अनिवार्य फीस नहीं देनी होगी।
इस स्पष्टीकरण के बाद यह साफ है कि सिर्फ MDR से जुड़े प्रस्ताव को देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब आम लोगों को यूपीआई से भुगतान करने पर चार्ज देना पड़ेगा।
PhonePe CEO ने भी किया कन्फ्यूजन दूर
देश में बड़े यूपीआई प्लेटफॉर्म में शामिल PhonePe के CEO समीर निगम ने भी इस मुद्दे पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूपीआई पेमेंट कंज्यूमर्स के लिए फ्री रहेगा।
दरअसल, लोकसभा में Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 पारित होने के बाद MDR को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। इससे कुछ लोगों को लगा कि इसका सीधा असर उनकी जेब पर पड़ेगा। हालांकि, MDR का मतलब यह नहीं है कि हर यूपीआई ट्रांजेक्शन पर ग्राहक से फीस ली जाएगी।
MDR क्या है और इसका भुगतान कौन करता है?
MDR यानी Merchant Discount Rate डिजिटल पेमेंट से जुड़ी एक फीस है। सामान्य तौर पर यह मर्चेंट और पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल कंपनियों के बीच होने वाली व्यावसायिक व्यवस्था का हिस्सा होती है।
यूपीआई के मामले में लंबे समय से ज्यादातर ट्रांजेक्शंस पर MDR नहीं लिया जाता रहा है। इसके कारण यूपीआई इकोसिस्टम से जुड़े खर्च को बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और दूसरे भागीदार वहन करते रहे हैं।
इसलिए MDR का नाम सामने आने का सीधा अर्थ यह नहीं है कि ग्राहक को अपने हर भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क देना होगा।
2,000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर क्या है प्रस्ताव?
Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 के तहत कुछ खास बिजनेस-डायरेक्टेड इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट ट्रांजेक्शंस पर MDR से जुड़ा प्रावधान किया गया है। दिए गए विवरण के अनुसार, 2,000 रुपये के कुछ खास बिजनेस ट्रांजेक्शंस पर 0.25% से 0.4% तक चार्ज का प्रस्ताव है।
हालांकि, यह महत्वपूर्ण है कि इस प्रावधान को आम व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P (Person-to-Person) पेमेंट से अलग समझा जाए। एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले सामान्य यूपीआई भुगतान को इस प्रस्तावित लेवी के दायरे में नहीं रखा गया है।
यानी किसी दोस्त को पैसे भेजना, परिवार के सदस्य को यूपीआई से भुगतान करना या इसी तरह के सामान्य व्यक्ति-से-व्यक्ति ट्रांजेक्शन को लेकर आम यूजर्स को MDR की वजह से अतिरिक्त चार्ज देने की चिंता नहीं करनी चाहिए।
क्या दुकानदार से MDR लिया जाएगा?
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि MDR से जुड़ी फीस का संबंध मर्चेंट और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर के बीच व्यावसायिक व्यवस्था से है।
अगर किसी विशेष ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट सर्विस चार्ज लागू होता है, तो उसका भुगतान कमर्शियल अरेंजमेंट के तहत मर्चेंट की ओर से किया जा सकता है। इसे सीधे ग्राहक से यूपीआई इस्तेमाल करने की फीस के तौर पर नहीं समझना चाहिए।
PCI ने भी इसी बात को स्पष्ट करते हुए कहा है कि प्रस्तावित व्यवस्था का मतलब यह नहीं है कि कंज्यूमर्स से डिजिटल पेमेंट करने के लिए अतिरिक्त चार्ज वसूला जाएगा।
क्या यूपीआई से रोजाना पेमेंट करना महंगा होगा?
फिलहाल उपलब्ध स्पष्टीकरण के आधार पर आम कंज्यूमर्स के लिए यूपीआई पेमेंट फ्री रहेगा। इसलिए रोजमर्रा के सामान्य यूपीआई ट्रांजेक्शन को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।
यूपीआई का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए सबसे जरूरी अंतर यह समझना है कि MDR और Consumer Transaction Fee एक ही चीज नहीं हैं। MDR का संबंध मुख्य रूप से मर्चेंट और पेमेंट इकोसिस्टम के बीच होने वाली फीस व्यवस्था से है, जबकि ग्राहक से सीधे चार्ज लिया जाना अलग विषय है।
सरकार को MDR लगाने का अधिकार क्यों मिला?
Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 के तहत इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के कुछ खास तरीकों पर MDR से संबंधित लेवी लगाने का अधिकार देने का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में होने वाली लागत और उससे जुड़े कमर्शियल अरेंजमेंट को एक फ्रेमवर्क के तहत लाना है।
हालांकि, इस व्यवस्था को आम यूपीआई यूजर पर सीधे लागू होने वाले चार्ज के तौर पर देखना सही नहीं है। खासतौर पर P2P ट्रांजेक्शंस और बिजनेस-डायरेक्टेड ट्रांजेक्शंस के बीच अंतर समझना जरूरी है।
यूपीआई यूजर्स को क्या याद रखना चाहिए?
अगर आप रोजाना यूपीआई का इस्तेमाल करते हैं तो फिलहाल सबसे अहम बातें ये हैं:
- सामान्य कंज्यूमर के लिए यूपीआई पेमेंट फ्री रहने की बात स्पष्ट की गई है।
- MDR का प्रस्ताव कुछ खास बिजनेस-डायरेक्टेड ट्रांजेक्शंस से संबंधित है।
- सामान्य व्यक्ति-से-व्यक्ति यूपीआई पेमेंट इस प्रस्तावित लेवी के दायरे में नहीं है।
- MDR का संबंध मर्चेंट और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर के बीच होने वाली व्यावसायिक व्यवस्था से है।
- सिर्फ MDR के प्रस्ताव से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि हर यूपीआई पेमेंट पर ग्राहक से चार्ज लिया जाएगा।
निष्कर्ष
यूपीआई को लेकर सबसे बड़ा कन्फ्यूजन इस बात पर है कि MDR का प्रस्ताव क्या सीधे आम लोगों की जेब पर असर डालेगा। अभी तक सामने आए स्पष्टीकरण के मुताबिक आम कंज्यूमर्स के लिए यूपीआई पेमेंट फ्री बना रहेगा। MDR से जुड़े प्रावधान मुख्य रूप से कुछ खास बिजनेस ट्रांजेक्शंस और मर्चेंट-पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर के बीच की व्यवस्था से संबंधित हैं।
इसलिए रोजाना यूपीआई से भुगतान करने वाले लोगों को सिर्फ MDR से जुड़ी खबरों के आधार पर यह मानने की जरूरत नहीं है कि अब हर यूपीआई पेमेंट के लिए उन्हें अतिरिक्त शुल्क देना पड़ेगा।


