UPI MDR Charges Row: UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि MDR न तो टैक्स है और न ही सेस, बल्कि पेमेंट सिस्टम से जुड़े सेवा प्रदाताओं के बीच लगाया जाने वाला शुल्क है। वित्त मंत्री के मुताबिक इसका बोझ सीधे UPI ग्राहक पर नहीं डाला जाएगा।
नई व्यवस्था में निर्धारित ₹2,000 से अधिक के P2M यानी Person-to-Merchant UPI लेन-देन पर 0.40% MDR लागू होगा। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी। वहीं ₹75,000 या उससे अधिक के पात्र लेन-देन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन रखी गई है।
₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर MDR नहीं
#WATCH | Chandigarh: On Merchant Discount Rate (MDR) transaction charges for UPI, Union Finance Minister Nirmala Sitharaman says, "It does not apply to transactions below ₹2,000. It is neither a tax nor a cess; the funds will not be deposited into the Consolidated Fund of India.… pic.twitter.com/0J564Z9YMg
— ANI (@ANI) September 21, 2026 नई व्यवस्था में ₹2,000 तक के P2M UPI पेमेंट पर MDR नहीं लगेगा। वहीं Person-to-Person यानी P2P ट्रांजैक्शन भी मुफ्त रहेगा। सरकार के अनुसार, करीब 96% मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन नई MDR व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे।
हालांकि ₹2,000 से अधिक के सभी भुगतान पर एक जैसा MDR नहीं होगा। सामान्य पात्र P2M ट्रांजैक्शन के लिए दर 0.40% तय की गई है। उदाहरण के लिए ₹3,000 के भुगतान पर MDR ₹12 और ₹50,000 के भुगतान पर ₹200 होगा। ₹75,000 पर 0.40% के हिसाब से ₹300 बनता है और इसके बाद भी अधिकतम MDR ₹300 ही रहेगा।
वित्त मंत्री ने कहा- यह टैक्स या सेस नहीं
निर्मला सीतारमण ने ANI से बातचीत में कहा कि ₹2,000 से कम के ट्रांजैक्शन पर MDR लागू नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह रकम भारत के Consolidated Fund में जमा होने वाला टैक्स या सेस नहीं है। उनके अनुसार, यह पेमेंट सिस्टम को संचालित करने और बेहतर बनाने से जुड़े सेवा प्रदाताओं के बीच का चार्ज है।
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि MDR का बोझ ग्राहक पर नहीं डाला जाएगा। उन्होंने इस मुद्दे पर संसद में पहले दिए गए स्पष्टीकरण का भी उल्लेख किया और कहा कि इस व्यवस्था को लेकर लोगों के बीच गलतफहमी पैदा की जा रही है।
MDR की रकम कहां जाएगी?
MDR से मिलने वाली रकम सरकार के खाते में टैक्स के तौर पर जमा नहीं होगी। यह पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल अलग-अलग हिस्सेदारों के बीच बांटी जाएगी। इनमें बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर, मर्चेंट एक्वायरिंग संस्थाएं और UPI ऐप से जुड़े अन्य भागीदार शामिल हैं।
नई व्यवस्था का उद्देश्य UPI इकोसिस्टम के संचालन और विस्तार के लिए भुगतान प्रणाली से जुड़े खर्चों को कवर करना भी बताया गया है। इसके अलावा, सरकार ने कुल MDR कलेक्शन का 5% छोटे व्यापारियों के लिए बनाए जाने वाले फंड में रखने की बात कही है। इस फंड का इस्तेमाल छोटे कारोबारियों के बीच डिजिटल पेमेंट की पहुंच और इस्तेमाल बढ़ाने के लिए किया जाना है।
इन सेक्टर में ₹5 का फ्लैट MDR
रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और कृषि संबंधी कच्चे माल जैसे जरूरी और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था रखी गई है। इन श्रेणियों में ₹2,000 से अधिक के पात्र UPI लेन-देन पर ₹5 का फ्लैट MDR होगा। ₹2,000 तक के भुगतान इससे मुक्त रहेंगे।
सरकार का उद्देश्य इन क्षेत्रों में डिजिटल पेमेंट की लागत को एक समान रखने का बताया गया है। हालांकि इन सेक्टर में होने वाले सभी UPI ट्रांजैक्शन पर ₹5 शुल्क नहीं लगेगा, क्योंकि ₹2,000 तक के भुगतान इस व्यवस्था से बाहर हैं।
म्यूचुअल फंड और शेयर मार्केट पेमेंट पर 0.02% MDR
म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज और स्टॉक ब्रोकर या डीलर के जरिए होने वाले पात्र भुगतान के लिए MDR की दर 0.02% रखी गई है। इसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन होगी।
इसके साथ ही UPI ऐप प्रोवाइडर्स को अलग से डिजिटल प्लेटफॉर्म फीस या छिपे हुए शुल्क लगाने की अनुमति नहीं होगी। बैंकों को भी यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि MDR का अतिरिक्त बोझ ग्राहक पर न डाला जाए।
छोटे व्यापारियों को कैसे मिलेगी राहत?
नई व्यवस्था में UPI QR के जरिए हर महीने ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले पात्र छोटे व्यापारियों को जीरो MDR की सुविधा जारी रहेगी। यानी ऐसे व्यापारी अगर किसी एक ट्रांजैक्शन में ₹2,000 से अधिक भी प्राप्त करते हैं, तब भी निर्धारित शर्तों के तहत उन्हें MDR से छूट मिल सकती है।
सरकार के अनुसार, ज्यादातर मर्चेंट ट्रांजैक्शन या तो ₹2,000 से कम हैं या फिर छोटे व्यापारियों के लिए उपलब्ध जीरो-MDR व्यवस्था में आते हैं। इसी वजह से करीब 96% मर्चेंट ट्रांजैक्शन के प्रभावित नहीं होने की बात कही गई है।
₹2,000 से ऊपर UPI पर कितना MDR लगेगा?
| UPI भुगतान | MDR |
|---|---|
| ₹2,000 तक | ₹0 |
| ₹3,000 | ₹12 |
| ₹10,000 | ₹40 |
| ₹50,000 | ₹200 |
| ₹75,000 | ₹300 |
| ₹1 लाख | अधिकतम ₹300 |
ध्यान रहे कि यह MDR पात्र मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए है। सभी UPI पेमेंट पर यह शुल्क लागू नहीं होगा। P2P भुगतान मुफ्त रहेगा और अलग-अलग श्रेणियों जैसे छोटे व्यापारी, जरूरी सेवाओं तथा कैपिटल मार्केट पेमेंट के लिए अलग दरें तय की गई हैं।
आम UPI यूजर के लिए क्या बदलेगा?
नई व्यवस्था का सीधा फोकस बड़े और पात्र मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर है। सरकार ने कहा है कि ग्राहक से अलग से MDR ट्रांजैक्शन शुल्क नहीं लिया जाएगा। हालांकि MDR की वास्तविक लागत और इसका असर व्यापारियों के कारोबार पर किस तरह पड़ेगा, यह भुगतान प्रणाली में शामिल पक्षों और व्यापारिक व्यवहार पर निर्भर करेगा।
NPCI के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2026 में UPI पर कुल 24,508.96 मिलियन यानी करीब 2,450.90 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू ₹29.82 लाख करोड़ से अधिक रही। ऐसे विशाल डिजिटल पेमेंट नेटवर्क में MDR की नई व्यवस्था का असर खास तौर पर बड़े मर्चेंट भुगतान पर देखा जाएगा।
Source: Moneycontrol और आधिकारिक UPI/NPCI से संबंधित उपलब्ध जानकारी पर आधारित।
डिस्क्लेमर: UPI MDR से जुड़े नियम और शुल्क श्रेणी के अनुसार अलग हो सकते हैं। किसी भुगतान से पहले संबंधित बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर या आधिकारिक दिशा-निर्देशों से ताजा जानकारी की पुष्टि करें।


