UP Supplementary Budget 2026: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने विधानसभा चुनाव 2027 से पहले वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 59,019.54 करोड़ रुपये का अनुपूरक (सप्लीमेंट्री) बजट पेश किया है। इस बजट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें नई मुफ्त योजनाओं या बड़े लोकलुभावन ऐलानों की बजाय सड़क, एक्सप्रेसवे, बिजली, उद्योग और ग्रामीण विकास पर सबसे ज्यादा फोकस किया गया है। सरकार का मानना है कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश आधारित विकास से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलेगी।
चुनाव से पहले विकास मॉडल पर सरकार का दांव
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 करीब आने के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। ऐसे समय में सरकार ने ऐसा बजट पेश किया है जिसमें मुफ्त योजनाओं की जगह विकास परियोजनाओं को प्राथमिकता दी गई है।
सप्लीमेंट्री बजट में अतिरिक्त राशि का बड़ा हिस्सा सड़क निर्माण, ग्रामीण संपर्क मार्ग, औद्योगिक ढांचे, बिजली वितरण व्यवस्था और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं पर खर्च किया जाएगा। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार चुनाव से पहले विकास कार्यों को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में जनता के सामने रखना चाहती है।
महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों के लिए जारी रहेंगी पुरानी योजनाएं
बजट में महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगजनों से जुड़ी पहले से संचालित योजनाओं के लिए अतिरिक्त धनराशि का प्रावधान किया गया है।
हालांकि सरकार ने इस बार कोई नई सामाजिक कल्याण योजना शुरू नहीं की है। इसके अलावा—
- बुजुर्ग पेंशन में बढ़ोतरी का ऐलान नहीं किया गया।
- विधवा और निराश्रित पेंशन में भी कोई बदलाव नहीं हुआ।
- लड़कियों को मुफ्त स्कूटी या नई नकद सहायता योजना जैसी कोई घोषणा नहीं की गई।
ग्रामीण विकास को मिला सबसे बड़ा हिस्सा
इस सप्लीमेंट्री बजट का सबसे बड़ा लाभ ग्रामीण क्षेत्रों को मिलने वाला है।
सरकार ने ग्रामीण विकास योजनाओं के लिए 16,432.46 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया है, जो पूरे अनुपूरक बजट का सबसे बड़ा हिस्सा है।
इस राशि का उपयोग गांवों में—
- सड़क निर्माण,
- ग्रामीण संपर्क मार्ग,
- आधारभूत सुविधाओं,
- स्थानीय विकास परियोजनाओं
को गति देने के लिए किया जाएगा।
सड़क और कनेक्टिविटी पर बड़ा निवेश
सरकार ने सड़क एवं परिवहन क्षेत्र के लिए 15,750.01 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
इस राशि से राज्य में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को गति मिलेगी, जिनमें शामिल हैं—
- जेवर एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाला नया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे।
- हरदोई और फर्रुखाबाद के रास्ते आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाली सड़क।
- गंगा एक्सप्रेसवे का हरिद्वार तक विस्तार।
- सोनभद्र तक विंध्य एक्सप्रेसवे का निर्माण।
- एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक क्षेत्रों का विकास।
सरकार का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी से निवेश आकर्षित होगा और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
जेवर एयरपोर्ट और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर पर विशेष फोकस
सप्लीमेंट्री बजट में जेवर एयरपोर्ट को राष्ट्रीय स्तर का लॉजिस्टिक्स हब बनाने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं।
एक्सप्रेसवे और एयरपोर्ट को जोड़ने वाली परियोजनाओं के साथ-साथ औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करने पर भी जोर दिया गया है ताकि उद्योगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिल सके।
उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए हजारों करोड़ का प्रावधान
औद्योगिक विकास के लिए सरकार ने 2,220.89 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट रखा है।
इसके अलावा—
- 1,302.61 करोड़ रुपये विदेशी निवेश (FDI) और बड़े उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए।
- 1,500 करोड़ रुपये अटल औद्योगिक आधारभूत ढांचा मिशन के लिए।
- मुख्यमंत्री औद्योगिक क्षेत्र विस्तार योजना के तहत 3,000 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।
- आईटी सदन, स्टेट डेटा सेंटर 2.0 और केंद्र सरकार की BHAVYA योजना के तहत औद्योगिक आधारभूत ढांचा परियोजनाओं को भी अतिरिक्त धन मिलेगा।
सरकार का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को निवेश और विनिर्माण का बड़ा केंद्र बनाना है।
बिजली व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर
ऊर्जा क्षेत्र के लिए सरकार ने 7,358 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया है।
इसमें—
- 6,958 करोड़ रुपये बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के घाटे की भरपाई के लिए।
- 400 करोड़ रुपये प्रयागराज की मेजा-द्वितीय ताप बिजली परियोजना के लिए।
इससे बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने और वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति सुधारने का लक्ष्य रखा गया है।
किसानों और बुनकरों के लिए भी राहत
कृषि क्षेत्र के लिए 254.15 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है।
इस राशि का उपयोग—
- आलू भंडारण पर सब्सिडी,
- मूल्य स्थिरीकरण कोष,
- बागवानी विकास
जैसी योजनाओं में किया जाएगा।
वहीं हथकरघा एवं बुनकर क्षेत्र के लिए 140.03 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिससे बुनकर कल्याण योजनाओं और संत कबीर टेक्सटाइल एवं परिधान पार्क के विकास को गति मिलेगी।
बड़ी लोकलुभावन घोषणाओं से सरकार ने बनाई दूरी
चुनावी वर्ष से पहले पेश किए जाने वाले बजटों में आमतौर पर नई मुफ्त योजनाओं या बड़े कल्याणकारी ऐलानों की उम्मीद रहती है। लेकिन इस बार योगी सरकार ने अलग रणनीति अपनाते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाओं को प्राथमिकता दी है।
सरकार का मानना है कि सड़क, बिजली, उद्योग और निवेश आधारित विकास लंबे समय में राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिए अधिक प्रभावी साबित होगा।
यूपी के ₹59,019.54 करोड़ के सप्लीमेंट्री बजट की 8 बड़ी बातें
- ₹59,019.54 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश किया गया।
- ग्रामीण विकास के लिए सबसे अधिक ₹16,432.46 करोड़ आवंटित।
- सड़क और परिवहन क्षेत्र को ₹15,750.01 करोड़ मिले।
- जेवर एयरपोर्ट, विंध्य एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे विस्तार समेत कई बड़ी परियोजनाओं को धन।
- उद्योग क्षेत्र के लिए ₹2,220.89 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान।
- बिजली क्षेत्र को ₹7,358 करोड़ मिले, जिनमें डिस्कॉम के लिए ₹6,958 करोड़ शामिल।
- महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों की मौजूदा योजनाओं को अतिरिक्त फंड, लेकिन नई मुफ्त योजनाओं की घोषणा नहीं।
- किसानों के लिए ₹254.15 करोड़ और बुनकरों के लिए ₹140.03 करोड़ का प्रावधान।


