Vedanta Demerger News: वेदांता लिमिटेड अपने रियल एस्टेट कारोबार को अलग कर नई कंपनी बनाने जा रही है। शेयरधारकों को हर 20 वेदांता शेयर पर नई कंपनी का 1 शेयर मिलेगा। नई कंपनी को BSE और NSE पर लिस्ट किया जाएगा।
नई दिल्ली: मेटल और माइनिंग सेक्टर की प्रमुख कंपनी वेदांता लिमिटेड (Vedanta Ltd) ने अपने कारोबार को अलग-अलग कंपनियों में बांटने की रणनीति को आगे बढ़ाते हुए एक और बड़ा कदम उठाया है। कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के नेतृत्व में वेदांता अब अपने रियल एस्टेट कारोबार को अलग कर एक नई कंपनी बनाने की तैयारी कर रही है।
इस नई कंपनी का नाम वेदांता प्रॉपर्टी प्लेटफॉर्म्स (Vedanta Property Platforms) होगा। यह एक स्वतंत्र रियल एस्टेट कंपनी के रूप में काम करेगी और भविष्य में इसके शेयरों को भारतीय शेयर बाजारों में सूचीबद्ध किया जाएगा।
वेदांता का यह कदम कंपनी के बड़े डीमर्जर प्लान का हिस्सा है, जिसके जरिए कंपनी अपने अलग-अलग कारोबार को स्वतंत्र इकाइयों में बदल रही है। इससे प्रत्येक बिजनेस की अलग वैल्यू सामने आने की उम्मीद है।
वेदांता रियल एस्टेट कारोबार क्यों अलग कर रही है?
वेदांता का मानना है कि अलग-अलग कारोबार को स्वतंत्र कंपनियों में बांटने से निवेशकों को प्रत्येक बिजनेस की वास्तविक कीमत समझने में आसानी होगी। वर्तमान में कंपनी का रियल एस्टेट पोर्टफोलियो उसके मुख्य मेटल और माइनिंग कारोबार के साथ जुड़ा हुआ है।
डीमर्जर के बाद रियल एस्टेट कारोबार एक स्वतंत्र कंपनी के रूप में काम करेगा, जिससे उसका फोकस केवल प्रॉपर्टी और जमीन से जुड़े एसेट्स के विकास पर रहेगा।
कंपनी ने बताया है कि यह डीमर्जर स्कीम ऑफ अरेंजमेंट के तहत किया जाएगा। इसके लिए शेयरधारकों, नियामकीय संस्थाओं और अन्य जरूरी मंजूरियों की आवश्यकता होगी।
शेयरधारकों को मिलेगा नई कंपनी का शेयर
वेदांता के निवेशकों के लिए सबसे अहम बात यह है कि डीमर्जर के बाद उन्हें नई कंपनी में हिस्सेदारी मिलेगी।
प्रस्तावित योजना के अनुसार:
- वेदांता के शेयरधारकों को हर 20 शेयर पर नई कंपनी का 1 पूरी तरह पेड-अप इक्विटी शेयर मिलेगा।
- नई कंपनी को अलग से BSE और NSE पर लिस्ट किया जाएगा।
- रिकॉर्ड डेट की घोषणा बाद में की जाएगी।
- रिकॉर्ड डेट के दिन जिन निवेशकों के डीमैट खाते में वेदांता के शेयर होंगे, वे नई कंपनी के शेयर पाने के पात्र होंगे।
इसका मतलब है कि मौजूदा निवेशक बिना अतिरिक्त निवेश किए नई रियल एस्टेट कंपनी में हिस्सेदार बन जाएंगे।
2200 एकड़ जमीन और कई प्रॉपर्टीज होंगी शामिल
वेदांता प्रॉपर्टी प्लेटफॉर्म्स में कंपनी की बड़ी रियल एस्टेट संपत्तियां शामिल की जाएंगी। इस पोर्टफोलियो में देशभर में फैली कई औद्योगिक और रिहायशी संपत्तियां शामिल हैं।
नई कंपनी के पास:
- करीब 2200 एकड़ औद्योगिक भूमि
- लगभग 55,000 वर्ग फुट रिहायशी और कमर्शियल संपत्तियां
- देशभर में मौजूद 22 प्रमुख एसेट्स
शामिल होंगे।
इन संपत्तियों में फ्लैट, इमारतें, बंगले और जमीन के प्लॉट शामिल हैं। ये संपत्तियां महाराष्ट्र, गोवा, तमिलनाडु, गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों में स्थित हैं।
वित्त वर्ष 2026 में कितना रहा कारोबार?
वेदांता के अनुसार, डीमर्ज होने वाली रियल एस्टेट इकाई का वित्त वर्ष 2026 में परिचालन राजस्व करीब 1.26 करोड़ रुपये रहा।
हालांकि यह आंकड़ा कंपनी के मेटल और माइनिंग कारोबार की तुलना में काफी छोटा है, लेकिन इसके पास मौजूद जमीन और संपत्तियों की वैल्यू काफी ज्यादा मानी जा रही है।
डीमर्जर पूरा होने में लग सकता है दो साल का समय
वेदांता का डीमर्जर प्लान एक लंबी प्रक्रिया है। इसमें कई चरणों में मंजूरियां लेनी होंगी। विशेषज्ञों के मुताबिक पूरी प्रक्रिया पूरी होने में करीब दो साल तक का समय लग सकता है।
इस दौरान कंपनी को:
- बोर्ड की मंजूरी
- शेयरधारकों की मंजूरी
- नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मंजूरी
- अन्य नियामकीय प्रक्रियाएं
पूरी करनी होंगी।
निवेशकों को क्या फायदा हो सकता है?
डीमर्जर के बाद वेदांता एक ज्यादा केंद्रित कंपनी बन सकती है। अलग-अलग कारोबारों की स्वतंत्र पहचान बनने से निवेशकों को हर बिजनेस की अलग वैल्यू देखने का मौका मिलेगा।
कंपनी पहले भी अपने कारोबार को अलग-अलग इकाइयों में बांटने की योजना पर काम कर रही है। इससे निवेशकों को मेटल, ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, एल्युमिनियम और अन्य कारोबारों में अलग-अलग निवेश का अवसर मिल सकता है।
हालांकि निवेशकों को डीमर्जर से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, नई कंपनी की वैल्यूएशन और भविष्य की रणनीति पर नजर रखनी होगी।
वेदांता शेयर में आई तेजी
डीमर्जर की खबर के बाद वेदांता के शेयरों में तेजी देखने को मिली। मंगलवार को BSE पर कंपनी का शेयर करीब 2 फीसदी बढ़कर 270 रुपये के स्तर पर बंद हुआ।
इससे पहले सोमवार को भी वेदांता के शेयर में मजबूती देखी गई थी। कंपनी का मौजूदा मार्केट कैप करीब 1,05,580 करोड़ रुपये है।
बाजार विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर होगी कि नई रियल एस्टेट कंपनी की वैल्यूएशन कितनी तय होती है और लिस्टिंग के बाद निवेशकों की प्रतिक्रिया कैसी रहती है।


