UDAN Scheme: पहले चरण की चुनौतियों के बाद सरकार का बड़ा दांव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को उड़े देश का आम नागरिक (UDAN) योजना के दूसरे चरण यानी Modified UDAN की शुरुआत की। सरकार ने अगले 10 वर्षों के लिए इस महत्वाकांक्षी योजना पर ₹28,840 करोड़ खर्च करने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य देश के छोटे शहरों, दूरदराज और पहाड़ी इलाकों तक हवाई सेवाओं का विस्तार करना है।
हालांकि, पहले चरण के अनुभव सरकार के लिए पूरी तरह सकारात्मक नहीं रहे। क्षेत्रीय हवाई संपर्क बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना में भारी निवेश के बावजूद बड़ी संख्या में हवाई रूट बंद हो चुके हैं। ऐसे में सरकार ने नई योजना में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं ताकि क्षेत्रीय विमानन को लंबे समय तक टिकाऊ बनाया जा सके।
पहले चरण में ₹9500 करोड़ खर्च, फिर भी आधे से ज्यादा रूट बंद
साल 2017 में शुरू हुई UDAN योजना के तहत सरकार ने देशभर में 669 क्षेत्रीय हवाई रूट शुरू किए थे। लेकिन वर्तमान में इनमें से केवल 336 रूटों पर ही नियमित कमर्शियल उड़ानें संचालित हो रही हैं, जबकि लगभग आधे रूट बंद हो चुके हैं।
सरकार ने इस अवधि में दो प्रमुख मदों पर खर्च किया—
- एयरलाइंस को सस्ती टिकट उपलब्ध कराने के लिए करीब ₹4,700 करोड़ की सब्सिडी (VGF) दी गई।
- छोटे एयरपोर्ट और हवाई अड्डों के विकास के लिए लगभग ₹4,800 करोड़ खर्च किए गए।
यानी कुल मिलाकर करीब ₹9,500 करोड़ खर्च होने के बावजूद योजना अपने सभी लक्ष्यों को हासिल नहीं कर सकी।
क्यों बंद हो गए इतने हवाई रूट?
विशेषज्ञों और एयरलाइन कंपनियों के अनुसार इसके पीछे दो प्रमुख कारण रहे।
1. सब्सिडी खत्म होने के बाद बढ़ा घाटा
पहले चरण में एयरलाइंस को किसी रूट पर अधिकतम तीन वर्षों तक ही सब्सिडी मिलती थी। इसके बाद परिचालन पूरी तरह व्यावसायिक आधार पर करना पड़ता था।
कई छोटे शहरों में यात्रियों की संख्या अपेक्षा से कम रही, जिसके कारण सब्सिडी समाप्त होते ही रूट घाटे में चले गए। उदाहरण के तौर पर कर्नाटक के बीदर और कलबुर्गी के लिए स्टार एयर की दैनिक उड़ानें सब्सिडी खत्म होने के बाद बंद करनी पड़ीं।
2. छोटी एयरलाइंस का परिचालन बंद होना
UDAN योजना में कई क्षेत्रीय एयरलाइंस शामिल थीं। लेकिन वित्तीय कठिनाइयों, बढ़ती लागत और सीमित संसाधनों के कारण कई कंपनियां दिवालिया हो गईं या उन्होंने अपना परिचालन बंद कर दिया। इसका सीधा असर उन हवाई रूटों पर पड़ा, जहां केवल एक ही एयरलाइन सेवा दे रही थी।
एयरलाइंस ने सरकार से क्या मांगा?
क्षेत्रीय विमानन कंपनियों ने सरकार से कुछ महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं, जिनमें शामिल हैं—
- एयरपोर्ट स्लॉट आवंटन को आसान बनाना।
- छोटे विमानों की उपलब्धता बढ़ाना।
- नियमों और मंजूरी प्रक्रिया को सरल करना।
- क्षेत्रीय उड़ानों के लिए लंबे समय तक वित्तीय सहायता देना।
सरकार ने Modified UDAN तैयार करते समय इन सुझावों को भी ध्यान में रखा है।
Modified UDAN में क्या-क्या बदलेगा?
सरकार का मानना है कि पहले चरण की कमियों को दूर कर नई योजना को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। इसके लिए कई बड़े सुधार किए गए हैं।
100 नए एयरपोर्ट विकसित किए जाएंगे
देश में मौजूद लेकिन लंबे समय से उपयोग में नहीं आ रही हवाई पट्टियों को विकसित कर 100 नए क्षेत्रीय एयरपोर्ट बनाए जाएंगे।
इसके लिए अगले 8 वर्षों में ₹12,159 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
200 नए हेलिपैड बनेंगे
पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों तक बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए 200 नए हेलिपैड बनाए जाएंगे।
प्रत्येक हेलिपैड पर लगभग ₹15 करोड़ की लागत आने का अनुमान है।
छोटे एयरपोर्ट को मिलेगी आर्थिक मदद
नई योजना के तहत छोटे एयरपोर्ट शुरुआती वर्षों में घाटे से न जूझें, इसके लिए सरकार ₹2,577 करोड़ की वित्तीय सहायता देगी।
इससे क्षेत्रीय एयरपोर्ट लंबे समय तक संचालन योग्य बने रहेंगे।
एयरलाइंस को ज्यादा समय तक मिलेगी सब्सिडी
Modified UDAN की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब एयरलाइंस को मिलने वाली Viability Gap Funding (VGF) की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 5 साल कर दी गई है।
इसके लिए अगले 10 वर्षों में ₹10,043 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे एयरलाइंस को नए रूट विकसित करने और यात्रियों का भरोसा बनाने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।
नए विमान और हेलीकॉप्टर भी खरीदे जाएंगे
दूरदराज और पहाड़ी इलाकों में उड़ानों को बढ़ावा देने के लिए सरकार—
- पवन हंस के लिए 2 HAL ध्रुव हेलीकॉप्टर
- एलायंस एयर के लिए 2 HAL डोर्नियर विमान
खरीदेगी।
इससे उन क्षेत्रों में भी हवाई सेवाएं शुरू करने में मदद मिलेगी जहां बड़े विमान संचालित करना संभव नहीं है।
छोटे शहरों को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा
Modified UDAN का मुख्य फोकस Tier-2 और Tier-3 शहरों की हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाना है। सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक छोटे शहर राष्ट्रीय विमानन नेटवर्क से जुड़ें, जिससे व्यापार, पर्यटन, निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिले।
यदि नई योजना सफल रहती है तो देश के लाखों यात्रियों को कम किराए में हवाई यात्रा का लाभ मिलेगा और दूरदराज के इलाकों का विकास भी तेज होगा।
निष्कर्ष
UDAN योजना ने पिछले कुछ वर्षों में क्षेत्रीय विमानन को नई दिशा जरूर दी, लेकिन पहले चरण में सब्सिडी समाप्त होने और कई एयरलाइंस के बंद होने जैसी चुनौतियों के कारण लगभग आधे हवाई रूट बंद हो गए। अब सरकार ने ₹28,840 करोड़ के बजट के साथ Modified UDAN लॉन्च कर इन कमियों को दूर करने की कोशिश की है।
यदि सब्सिडी की बढ़ी अवधि, नए एयरपोर्ट, हेलिपैड और बेहतर बुनियादी ढांचे की योजनाएं समय पर लागू होती हैं, तो आने वाले वर्षों में देश के छोटे शहरों की हवाई कनेक्टिविटी पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हो सकती है।


