Tukaram Mundhe News: महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा को लेकर इन दिनों IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे की कार्यशैली चर्चा में है। महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर का पद संभालने के बाद उन्होंने खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले बड़े ब्रांडों से लेकर छोटे दुकानदारों और स्ट्रीट फूड कारोबारियों तक के खिलाफ कार्रवाई तेज की है। उनकी टीम की छापेमारी की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहे हैं।
मुंबई में खाने-पीने के कारोबार से जुड़े लोगों के बीच इन दिनों तुकाराम मुंढे का नाम खासा चर्चा में है। FDA कमिश्नर के तौर पर उनकी सख्ती का असर सिर्फ बड़े होटल और रेस्टोरेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़क किनारे लगने वाली खाने की दुकानों से लेकर संस्थागत कैंटीन तक दिखाई दे रहा है। उनका स्पष्ट संदेश है कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों को नजरअंदाज करने वाले कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
3,000 से ज्यादा निरीक्षण और छापेमारी
मई में महाराष्ट्र FDA कमिश्नर की जिम्मेदारी संभालने के बाद से विभाग ने खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर बड़े पैमाने पर अभियान चलाया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मुंढे के नेतृत्व में उनकी टीम अब तक 3,000 से ज्यादा निरीक्षण और छापेमारी कर चुकी है।
इन कार्रवाइयों में बड़े अंतरराष्ट्रीय फूड ब्रांड, होटल और चर्चित रेस्टोरेंट के साथ क्रिकेट क्लब, पुराने आइसक्रीम पार्लर, डेयरी और छोटे ढाबे भी शामिल रहे हैं। FDA का फोकस यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहकों को मिलने वाला खाना साफ-सुथरा और निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो।
मुंढे का कहना है कि यह सिर्फ नियमों का पालन कराने का मामला नहीं है। खाद्य सुरक्षा सीधे लोगों की सेहत और जिंदगी से जुड़ी हुई है। इसलिए नियमों के उल्लंघन को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अदालत की कैंटीन तक पहुंची FDA की कार्रवाई
तुकाराम मुंढे की कार्रवाई उस समय और चर्चा में आ गई, जब मुंबई की एक अदालत में जज ने सवाल उठाया कि क्या FDA सिर्फ निजी दुकानों और रेस्टोरेंट पर ही कार्रवाई कर रहा है या अदालत परिसर में मौजूद कैंटीन भी जांच के दायरे में आती हैं।
इसके बाद FDA अधिकारियों ने अदालत परिसर की कैंटीनों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान कथित तौर पर ऐसी कैंटीन भी सामने आईं, जो आवश्यक लाइसेंस के बिना संचालित हो रही थीं। विभाग ने ऐसी कैंटीनों के खिलाफ कार्रवाई की।
इस घटना को मुंढे की कार्यशैली के उदाहरण के तौर पर देखा गया, क्योंकि विभाग ने यह संकेत दिया कि खाद्य सुरक्षा के नियम किसी खास वर्ग या प्रतिष्ठान तक सीमित नहीं हैं।
गंदगी, कॉकरोच और एक्सपायर्ड सामान की तस्वीरें वायरल
FDA की कार्रवाई की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही हैं। कई निरीक्षणों के दौरान कथित तौर पर गंदगी, कॉकरोच, चूहों और एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री से जुड़ी तस्वीरें सामने आईं।
इन तस्वीरों ने लोगों का ध्यान इसलिए भी खींचा क्योंकि आमतौर पर ग्राहक रेस्टोरेंट या दुकान की रसोई के अंदर की स्थिति नहीं देख पाते। सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों को लेकर लोगों ने खाद्य सुरक्षा और साफ-सफाई के मानकों पर सवाल उठाए।
मुंढे की कार्रवाई ने इस बहस को भी तेज किया है कि खाद्य कारोबारियों के लिए स्वच्छता सिर्फ कागजों पर दर्ज नियम न रहकर रोजमर्रा की व्यवस्था का हिस्सा कैसे बने।
खाने के रंग से लेकर तेल बदलने तक असर
मुंढे की सख्ती का असर स्ट्रीट फूड कारोबारियों के काम करने के तरीके पर भी देखने को मिल रहा है। मुंबई में कई दुकानदार अब खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों को लेकर अधिक सतर्क दिखाई दे रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, एक दुकानदार ने चीनी व्यंजनों में इस्तेमाल होने वाले कृत्रिम लाल रंग की जगह प्राकृतिक लाल मिर्च का इस्तेमाल शुरू किया। वहीं, एक अन्य दुकानदार ने खाना तलने के लिए इस्तेमाल होने वाले तेल को दिन में कई बार बदलना शुरू कर दिया।
इसके अलावा कुछ दुकानों में कर्मचारियों के लिए दस्ताने और सिर ढकने वाली कैप पहनना भी अनिवार्य किया गया है। यानी FDA की कार्रवाई का असर केवल जुर्माने या लाइसेंस संबंधी कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि कारोबारियों की रोजमर्रा की कार्यप्रणाली भी बदल रही है।
मुंबई के वड़ा पाव की पैकिंग भी बदली
मुंबई का लोकप्रिय वड़ा पाव भी खाद्य सुरक्षा अभियान के दायरे में आया। खाद्य विभाग ने खाने की चीजों की पैकिंग के लिए अखबार के इस्तेमाल पर रोक लगाने की दिशा में कार्रवाई की।
मुंबई में लंबे समय से वड़ा पाव और दूसरे स्ट्रीट फूड को अखबार में लपेटकर देने का चलन रहा है। अब कई जगहों पर इसकी जगह बटर पेपर या दूसरे उपयुक्त पैकिंग मटेरियल का इस्तेमाल किया जा रहा है।
खाने की पैकिंग में बदलाव को लेकर ग्राहकों की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। खासकर बच्चों और परिवारों के बीच यह धारणा मजबूत हो रही है कि साफ और सुरक्षित पैकिंग से स्ट्रीट फूड को लेकर भरोसा बढ़ सकता है।
Domino’s और Pizza Hut के आउटलेट पर भी कार्रवाई
तुकाराम मुंढे की अगुवाई में FDA की कार्रवाई बड़े फूड ब्रांडों तक भी पहुंची है। विभाग ने Domino’s के चार और Pizza Hut के एक आउटलेट के फूड परमिट निलंबित किए।
इसके बाद एक McDonald’s आउटलेट पर भी कार्रवाई की गई। विभाग के अनुसार, निरीक्षण के दौरान वहां कथित तौर पर जिंदा कीट और खराब भोजन से जुड़ी कमियां सामने आई थीं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि FDA की कार्रवाई केवल अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों तक सीमित नहीं रही। मुंबई में पुराने और प्रसिद्ध स्थानीय प्रतिष्ठानों को भी जांच के दायरे में रखा गया। इनमें ब्रिटिश दौर से जुड़े एक क्रिकेट क्लब, करीब सात दशक पुराने आइसक्रीम पार्लर और एक सदी से ज्यादा पुराने पारसी डेयरी प्रतिष्ठान का भी उल्लेख किया गया है।
कारोबारियों ने उठाए सख्ती पर सवाल
जहां एक तरफ आम लोगों के बीच मुंढे की कार्रवाई को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, वहीं कुछ कारोबारी उनकी कार्यशैली पर सवाल भी उठा रहे हैं।
कुछ कारोबारियों का कहना है कि यदि किसी प्रतिष्ठान में कमियां पाई जाती हैं तो उसे सुधार के लिए उचित समय दिया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि अचानक लाइसेंस या परमिट निलंबित होने से कारोबार पर बड़ा असर पड़ सकता है।
कुछ प्रतिष्ठानों ने कथित तौर पर अदालत का रुख भी किया। एक मामले में अदालत ने विभाग की कार्रवाई पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत की टिप्पणी के बाद विभाग ने माना कि जहां सुधार की गुंजाइश हो, वहां आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए।
मुंढे ने भी कहा कि अदालत की टिप्पणियों को गंभीरता से लिया जाता है। यानी उनका अभियान केवल कार्रवाई करने तक सीमित नहीं, बल्कि नियमों और न्यायिक प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी सामने है।
भारत में खाद्य सुरक्षा की बड़ी चुनौती
महाराष्ट्र में चल रहे इस अभियान को देश में खाद्य सुरक्षा से जुड़ी व्यापक समस्या के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2020 के बाद से भारत में हर साल एक लाख से ज्यादा खाद्य नमूनों की जांच की गई है।
इनमें एक बड़ी संख्या ऐसे नमूनों की रही जिन्हें असुरक्षित, घटिया गुणवत्ता वाला या सही लेबलिंग के मानकों पर खरा नहीं पाया गया। पिछले कुछ वर्षों में हजारों खाद्य कारोबारियों के लाइसेंस भी रद्द किए गए हैं।
ऐसे में मुंबई और महाराष्ट्र में FDA की कार्रवाई को सिर्फ एक अधिकारी की व्यक्तिगत सख्ती के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। असली चुनौती यह है कि निरीक्षण और कार्रवाई के बाद खाद्य कारोबारियों में स्वच्छता और सुरक्षा के नियमों का पालन लंबे समय तक कायम रहे।
21 साल के करियर में कई बार हुआ तबादला
तुकाराम मुंढे का सख्त प्रशासनिक रवैया नया नहीं है। करीब 21 साल के IAS करियर में वह कई बार तबादलों का सामना कर चुके हैं। 2018 में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने लगातार तबादलों का भी जिक्र किया था।
मुंढे की पहचान ऐसे अधिकारी के रूप में बनी है जो प्रशासनिक नियमों को लेकर सख्त रुख अपनाने के लिए जाने जाते हैं। रिश्वत से दूरी और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई को लेकर उनके सार्वजनिक बयान भी पहले चर्चा में रहे हैं।
अब FDA में उनकी भूमिका ने उनकी पुरानी प्रशासनिक छवि को एक नए मुद्दे से जोड़ दिया है—खाने की गुणवत्ता और आम लोगों की खाद्य सुरक्षा।
सोशल मीडिया पर बढ़ी लोकप्रियता
FDA की लगातार कार्रवाई और वायरल तस्वीरों के कारण तुकाराम मुंढे की लोकप्रियता भी बढ़ी है। हाल ही में नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान लोगों को उनके साथ सेल्फी लेने और हाथ मिलाने के लिए उत्साहित देखा गया।
सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने तो यहां तक सुझाव दिया कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। हालांकि, मुंढे खुद इस लोकप्रियता को सेलिब्रिटी का दर्जा देने से इनकार करते हैं।
उन्होंने कहा कि वह कोई सेलिब्रिटी नहीं हैं, बल्कि सिर्फ फूड सेफ्टी कमिश्नर हैं। उनके लिए प्राथमिकता खाद्य सुरक्षा के नियमों को लागू करना है।
‘एक रेड रोज’ से कितना बदलेगा मुंबई का खाना?
तुकाराम मुंढे की कार्रवाई ने मुंबई के खाद्य कारोबार में एक अलग तरह की चर्चा जरूर शुरू कर दी है। स्ट्रीट फूड से लेकर बड़े रेस्टोरेंट तक, कारोबारी अब साफ-सफाई, तेल, खाद्य सामग्री, पैकिंग और लाइसेंस जैसे मुद्दों को लेकर पहले से अधिक सतर्क दिखाई दे रहे हैं।
लेकिन किसी भी अभियान की असली सफलता सिर्फ छापेमारी की संख्या से तय नहीं होगी। सवाल यह है कि क्या कार्रवाई के बाद कारोबारी लगातार खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करेंगे? क्या ग्राहकों को लंबे समय तक साफ-सुथरा और सुरक्षित खाना मिलेगा?
अगर FDA का यह अभियान लगातार चलता रहा और कार्रवाई के साथ कारोबारियों को नियमों की स्पष्ट जानकारी तथा सुधार का उचित अवसर भी मिलता रहा, तो इसका असर मुंबई के फूड कल्चर पर लंबे समय तक दिखाई दे सकता है।
फिलहाल तुकाराम मुंढे का नाम महाराष्ट्र की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था में सख्ती, निरीक्षण और जवाबदेही के साथ तेजी से जुड़ता जा रहा है। अब देखने वाली बात होगी कि यह सख्ती सिर्फ वायरल तस्वीरों और छापेमारी तक रहती है या वास्तव में मुंबई और पूरे महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा के मानकों को स्थायी रूप से बदलने में कामयाब होती है।


