NSE IPO GMP Today: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित आईपीओ को सेबी से मंजूरी मिलने के बाद अनलिस्टेड मार्केट में हलचल तेज हो गई है। करीब ₹30,000 करोड़ का यह इश्यू देश के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, NSE के अनलिस्टेड शेयरों का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) बढ़कर करीब ₹285 प्रति शेयर पहुंच गया है। वहीं, प्राइस बैंड को लेकर भी एक बड़ा अपडेट सामने आया है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, बड़े संस्थागत निवेशक और म्यूचुअल फंड NSE के शेयरों को करीब ₹1,800 प्रति शेयर के भाव पर खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इससे बाजार में यह अनुमान लगाया जा रहा है कि कंपनी अपने आईपीओ का आधिकारिक प्राइस बैंड इसी के आसपास तय कर सकती है।
NSE IPO का प्राइस बैंड ₹1,800 के आसपास?
NSE के आईपीओ को लेकर संस्थागत निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े निवेशकों के साथ हुई अनौपचारिक चर्चाओं में करीब ₹1,800 प्रति शेयर के मूल्यांकन स्तर पर मजबूत रुचि देखने को मिली है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ₹1,800 का भाव अभी आधिकारिक प्राइस बैंड नहीं है। कंपनी की ओर से प्राइस बैंड की औपचारिक घोषणा किए जाने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, NSE सितंबर 2026 में अपना आईपीओ लाने और 21 सितंबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में शेयर बाजार में लिस्टिंग की तैयारी कर रहा है।
GMP ₹285 पर पहुंचा
सेबी से आईपीओ को मंजूरी मिलने के बाद NSE के अनलिस्टेड शेयरों में तेजी देखने को मिल रही है। आईपीओ वॉच के मुताबिक, ग्रे मार्केट में NSE के शेयर का GMP करीब ₹285 प्रति शेयर बताया जा रहा है।
अगर भविष्य में ₹1,800 का इश्यू प्राइस और ₹285 का GMP बरकरार रहता है, तो ग्रे मार्केट के हिसाब से संभावित लिस्टिंग कीमत करीब ₹2,085 बन सकती है।
हालांकि, यहां यह समझना बेहद जरूरी है कि GMP कोई आधिकारिक या गारंटीड लिस्टिंग प्राइस नहीं होता। लिस्टिंग के समय शेयर की वास्तविक कीमत बाजार की मांग, निवेशकों की धारणा और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
₹30,000 करोड़ का IPO, लेकिन NSE को नहीं मिलेगा पैसा
NSE का प्रस्तावित आईपीओ इसलिए भी खास है क्योंकि यह पूरी तरह Offer for Sale यानी OFS होगा।
इसका मतलब है कि आईपीओ में NSE नए शेयर जारी नहीं करेगा। इसके बजाय कंपनी के मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचेंगे।
प्रस्तावित इश्यू से जुड़ी प्रमुख बातें:
- इश्यू साइज: करीब ₹30,000 करोड़
- इश्यू का प्रकार: पूरी तरह OFS
- बेचे जाने वाले शेयर: करीब 14.89 करोड़ इक्विटी शेयर
- कुल हिस्सेदारी: लगभग 6% पेड-अप इक्विटी कैपिटल
- फ्रेश इश्यू: नहीं
- NSE को मिलने वाली रकम: नहीं
- आईपीओ से मिलने वाली रकम: मौजूदा शेयरधारकों को जाएगी
इस वजह से NSE का आईपीओ कंपनी के लिए फंड जुटाने वाला इश्यू नहीं होगा। इसके बजाय मौजूदा निवेशकों को अपनी हिस्सेदारी बेचकर निवेश से बाहर निकलने या आंशिक मुनाफा बुक करने का मौका मिलेगा।
कौन-कौन बेच रहा है NSE के शेयर?
NSE के OFS में कई बड़े घरेलू और विदेशी संस्थागत निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में हैं। इनमें बैंक, ग्लोबल इन्वेस्टमेंट फर्म और पेंशन फंड शामिल हैं।
प्रस्तावित बिक्री में प्रमुख शेयरधारकों की हिस्सेदारी इस प्रकार बताई गई है:
| शेयरधारक | बेचने वाले शेयर |
|---|---|
| SBI ग्रुप | 2.475 करोड़ |
| MS Strategic Mauritius | 1.60 करोड़ |
| CPPIB | 1.19 करोड़ |
| Aranda Investments Mauritius | 1.12 करोड़ |
| Bank of Baroda | करीब 1.10 करोड़ |
| SHCIL | करीब 1.09 करोड़ |
इन बड़े निवेशकों की हिस्सेदारी की बिक्री NSE के आईपीओ को लेकर बाजार में खास दिलचस्पी की एक बड़ी वजह है।
निवेशकों की क्यों है NSE IPO पर नजर?
NSE भारत के सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय बाजार संस्थानों में से एक है। इक्विटी ट्रेडिंग, डेरिवेटिव्स और अन्य बाजार गतिविधियों में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। लंबे समय से NSE की संभावित लिस्टिंग का इंतजार किया जा रहा था।
सेबी से मंजूरी मिलने के बाद अब इस आईपीओ की टाइमलाइन को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी और बढ़ गई है। खासकर अनलिस्टेड मार्केट में कारोबार करने वाले निवेशक GMP और संभावित इश्यू प्राइस पर नजर बनाए हुए हैं।
लेकिन निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि अनलिस्टेड शेयरों का GMP और आईपीओ से पहले की कीमतें बदलती रहती हैं। इन्हें केवल बाजार के संकेत के तौर पर देखा जाना चाहिए, न कि भविष्य की लिस्टिंग कीमत की गारंटी के रूप में।
NSE IPO में निवेश से पहले इन बातों का रखें ध्यान
NSE IPO को लेकर बाजार में उत्साह जरूर है, लेकिन किसी भी आईपीओ में निवेश करने से पहले केवल GMP के आधार पर फैसला करना सही रणनीति नहीं है।
निवेशकों को कंपनी की वित्तीय स्थिति, वैल्यूएशन, आईपीओ प्राइस बैंड, शेयरधारकों की बिक्री, कारोबार की संभावनाओं और बाजार के मौजूदा माहौल का विश्लेषण करना चाहिए।
खास तौर पर NSE IPO में फ्रेश इश्यू नहीं होने का मतलब समझना जरूरी है। इस इश्यू से मिलने वाला पैसा कंपनी के कारोबार में नहीं जाएगा, बल्कि OFS के तहत शेयर बेचने वाले मौजूदा निवेशकों को मिलेगा।
निष्कर्ष
NSE के ₹30,000 करोड़ के प्रस्तावित आईपीओ को सेबी की मंजूरी मिलने के बाद अब निवेशकों की नजर प्राइस बैंड, आईपीओ की तारीख और लिस्टिंग टाइमलाइन पर है। अनलिस्टेड मार्केट में करीब ₹285 के GMP और ₹1,800 के आसपास संभावित प्राइस बैंड की चर्चाओं ने इस इश्यू को और सुर्खियों में ला दिया है।
हालांकि, अंतिम प्राइस बैंड, आईपीओ की तारीख और लिस्टिंग से जुड़ी जानकारी के लिए NSE और संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों की घोषणा का इंतजार करना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी स्टॉक या आईपीओ में निवेश करने से पहले अपनी रिसर्च करें और जरूरत पड़ने पर SEBI-रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार से सलाह लें। NewsJagran.in किसी भी निवेश की सलाह या गारंटी नहीं देता है।


