भारत के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल Tata Group इस समय अपने नए कारोबारों को लेकर बड़े बदलाव की तैयारी में है। समूह के चेयरमैन Natarajan Chandrasekaran ने टाटा संस बोर्ड के सामने तीन साल का एक विस्तृत रोडमैप पेश किया है, जिसका मकसद नए बिजनेस में बढ़ते घाटे को नियंत्रित करना और उन्हें मुनाफे की राह पर लाना है।
मंगलवार को मुंबई स्थित बॉम्बे हाउस में हुई करीब साढ़े छह घंटे लंबी बोर्ड बैठक में एयर इंडिया, टाटा डिजिटल, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, अग्रतास और तेजस नेटवर्क्स जैसे नए कारोबारों की वित्तीय स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान समूह के भीतर बढ़ते घाटे और लगातार हो रहे भारी निवेश को लेकर कई अहम सवाल भी उठे।
क्यों बढ़ी टाटा समूह की चिंता?
पिछले कुछ वर्षों में टाटा समूह ने कई नए क्षेत्रों में आक्रामक विस्तार किया है। इनमें एविएशन, सेमीकंडक्टर, डिजिटल कॉमर्स, बैटरी मैन्युफैक्चरिंग और टेलीकॉम उपकरण जैसे सेक्टर शामिल हैं। इन क्षेत्रों को भविष्य का बिजनेस माना जा रहा है, लेकिन शुरुआती निवेश और संचालन लागत बहुत अधिक होने के कारण अभी ये कंपनियां घाटे में चल रही हैं।
सबसे ज्यादा दबाव Air India पर दिखाई दे रहा है। एयर इंडिया के अधिग्रहण के बाद टाटा समूह ने एयरलाइन के बेड़े के आधुनिकीकरण, नए विमानों की खरीद, सेवा सुधार और तकनीकी बदलावों पर भारी निवेश किया है। हालांकि इससे खर्च तेजी से बढ़ा और घाटा भी बड़ा होता गया।
सूत्रों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में टाटा समूह के नए कारोबारों का संयुक्त घाटा 29,000 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया। यह आंकड़ा शुरुआती अनुमान 5,700 करोड़ रुपये से करीब पांच गुना ज्यादा बताया जा रहा है।
किन कारोबारों पर हुई सबसे ज्यादा चर्चा?
बैठक में जिन प्रमुख व्यवसायों पर चर्चा हुई, उनमें शामिल रहे एयर इंडिया, टाटा डिजिटल, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, अग्रतास (बैटरी बिजनेस, तेजस नेटवर्क्स.
इन सभी कंपनियों को भविष्य की ग्रोथ इंजन के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन फिलहाल इनकी लागत और कैश बर्न दर बोर्ड के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
नोएल टाटा ने उठाए बड़े सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी में हुई पिछली बोर्ड बैठक में Noel Tata ने नए उद्यमों में लगातार बढ़ते निवेश और घाटे पर कई सवाल उठाए थे। उन्होंने पूछा था कि:
- इतनी बड़ी पूंजी खर्च करने का वास्तविक रिटर्न कब मिलेगा?
- घाटे को नियंत्रित करने की रणनीति क्या है?
- कौन से बिजनेस अगले कुछ वर्षों में लाभदायक बन सकते हैं?
बताया जा रहा है कि मंगलवार की बैठक उसी चर्चा का विस्तारित रूप थी, जिसमें चंद्रशेखरन ने विस्तृत रोडमैप पेश किया।
चंद्रशेखरन का 3 साल का प्लान क्या है?
सूत्रों के मुताबिक, चंद्रशेखरन ने बोर्ड के सामने जो रणनीति रखी, उसका फोकस तीन बड़े बिंदुओं पर है:
1. घाटे को चरणबद्ध तरीके से कम करना
समूह अब हर नए बिजनेस के लिए स्पष्ट फाइनेंशियल टारगेट तय करेगा। जिन यूनिट्स में खर्च तेजी से बढ़ रहा है, वहां ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने और लागत नियंत्रण पर जोर दिया जाएगा।
2. कैश फ्लो पर फोकस
अब केवल विस्तार नहीं, बल्कि टिकाऊ बिजनेस मॉडल पर ध्यान दिया जाएगा। यानी हर यूनिट को धीरे-धीरे अपने संचालन खर्च खुद निकालने की दिशा में काम करना होगा।
3. टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग में लंबी तैयारी
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और बैटरी बिजनेस जैसे सेक्टरों में शुरुआती वर्षों में भारी निवेश सामान्य माना जा रहा है। समूह का मानना है कि सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिक वाहन सप्लाई चेन आने वाले दशक में बड़े अवसर बन सकते हैं।
एयर इंडिया सबसे बड़ी चुनौती क्यों?
Air India फिलहाल टाटा समूह के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। एयरलाइन सेक्टर में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। दूसरी तरफ विमान खरीद पर भारी खर्च, ईंधन लागत, कर्मचारियों का पुनर्गठन, ब्रांड सुधार, अंतरराष्ट्रीय विस्तार इन सभी कारणों से कंपनी पर दबाव बना हुआ है।
हालांकि टाटा समूह का मानना है कि एयर इंडिया को वैश्विक स्तर की एयरलाइन बनाने के लिए शुरुआती वर्षों में बड़े निवेश की जरूरत पड़ेगी। कंपनी का फोकस लंबे समय में प्रीमियम एविएशन ब्रांड तैयार करने पर है।
टाटा डिजिटल से क्या उम्मीद?
Tata Digital को समूह के सुपर ऐप और डिजिटल कॉमर्स भविष्य का आधार माना जा रहा है। लेकिन इस क्षेत्र में पहले से ही बड़ी प्रतिस्पर्धा मौजूद है। रिलायंस, अमेजन, फ्लिपकार्ट, फोनपे, स्विगी, जोमैटो जैसी कंपनियों के बीच जगह बनाना आसान नहीं है। यही कारण है कि टाटा डिजिटल को अभी तक स्थिर लाभ नहीं मिल पाया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और बैटरी बिजनेस पर बड़ा दांव
भारत सरकार की सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को बढ़ावा देने वाली नीतियों के चलते Tata Electronics और अग्रतास जैसे बिजनेस को भविष्य का बड़ा अवसर माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि EV बैटरी, चिप मैन्युफैक्चरिंग, हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स आने वाले वर्षों में भारत के सबसे तेजी से बढ़ने वाले सेक्टर बन सकते हैं। टाटा समूह अभी शुरुआती निवेश चरण में है, इसलिए तत्काल मुनाफे की उम्मीद नहीं की जा रही।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
यह बैठक इस बात का संकेत मानी जा रही है कि टाटा समूह अब केवल विस्तार नहीं बल्कि लाभप्रदता पर भी गंभीरता से ध्यान दे रहा है। निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि:
- क्या ये नए बिजनेस अगले 3-5 वर्षों में मुनाफा देना शुरू करेंगे?
- क्या एयर इंडिया घाटे से बाहर निकल पाएगी?
- क्या टाटा डिजिटल प्रतिस्पर्धा में टिक पाएगा?
यदि चंद्रशेखरन का रोडमैप सफल रहता है, तो टाटा समूह भविष्य के टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टरों में भारत की सबसे मजबूत कंपनियों में शामिल हो सकता है।
निष्कर्ष
टाटा समूह इस समय एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। एक तरफ भारी निवेश और बढ़ते घाटे का दबाव है, वहीं दूसरी तरफ भविष्य के सेक्टरों में मजबूत पकड़ बनाने की महत्वाकांक्षा भी है। यही कारण है कि चंद्रशेखरन का यह तीन साल का ब्लूप्रिंट समूह के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
आने वाले वर्षों में यह तय होगा कि टाटा का यह आक्रामक विस्तार भविष्य का मास्टरस्ट्रोक साबित होता है या फिर अत्यधिक पूंजी खर्च समूह की चुनौती बन जाता है।
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